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अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस विशेष : स्व-सहायता समूहों से सशक्त हो रहीं महिलाएं, ममता राजवाड़े और चन्दा बनीं आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल

रायपुर, 06 मार्च 2026 (IMNB NEWS AGENCY)
छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण की दिशा में संचालित योजनाएं और स्व-सहायता समूह ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रहे हैं। छोटे-छोटे प्रयासों और सामूहिक सहयोग से महिलाएं आज आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं। सूरजपुर जिले की श्रीमती ममता राजवाड़े और श्रीमती चन्दा ऐसी ही प्रेरणादायक महिलाएं हैं, जिन्होंने स्व-सहायता समूह से जुड़कर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया, बल्कि समाज में नई पहचान भी बनाई है।

सूरजपुर जिले की निवासी ममता राजवाड़े ने श्रीमती लक्ष्मी स्व-सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भरता की अपनी यात्रा शुरू की। समूह की नियमित बैठकों और बचत की आदत ने उनके भीतर आत्मविश्वास का संचार किया। इसी आत्मविश्वास के साथ उन्होंने समूह से ऋण लेकर अपने घर के पास एक किराना दुकान की शुरुआत की। मेहनत और लगन से व्यवसाय को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने धीरे-धीरे अपनी आमदनी में वृद्धि की।

व्यवसाय में स्थिरता आने के बाद श्रीमती ममता ने अपने काम का विस्तार करते हुए एक फोटो कॉपी मशीन भी खरीदी, जिससे आय का एक नया स्रोत तैयार हुआ। आज उनकी मासिक आय 20 से 30 हजार रुपये तक पहुंच गई है। श्रीमती ममता का मानना है कि स्व-सहायता समूह ने उन्हें केवल आर्थिक सहायता ही नहीं दी, बल्कि आगे बढ़ने का आत्मविश्वास और हौसला भी प्रदान किया।

इसी तरह सूरजपुर जिले की ही श्रीमती चन्दा ने भी बिहान स्व-सहायता समूह से जुड़कर अपने जीवन को नई दिशा दी। कभी घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली श्रीमती चन्दा ने समूह के माध्यम से बचत, आत्मनिर्भरता और सामूहिक सहयोग की ताकत को समझा। समूह से मिली प्रेरणा के बाद उन्होंने अपने पति के साथ मिलकर एक किराना दुकान शुरू की। उनकी मेहनत का परिणाम यह हुआ कि आज उन्हें हर महीने लगभग 10 से 15 हजार रुपये की आय होने लगी है।

आज श्रीमती ममता राजवाड़े और श्रीमती चन्दा दोनों ही अपने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों को मजबूती से निभाते हुए आसपास की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बन गई हैं। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि यदि महिलाओं को सही अवसर, मार्गदर्शन और सामूहिक सहयोग मिले तो वे न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बना सकती हैं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव की मजबूत आधारशिला भी रख सकती हैं।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर इन महिलाओं की प्रेरक कहानियां यह दर्शाती हैं कि छत्तीसगढ़ में स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं के आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और सम्मान का नया अध्याय लिखा जा रहा है।

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