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गौरैया संरक्षण की अनूठी पहल को मिला जिला प्रशासन का प्रोत्साहन कलेक्टर ने समाजसेवी मोहन साहू के प्रयासों की सराहना की, मंदरौद को “गौरैया गांव” के रूप में विकसित करने पर हुई चर्चा

 

15 हजार से अधिक पक्षियों के लिए बनाए गए कृत्रिम आशियाने, पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने पर दिया गया जोर

धमतरी, 11 जुलाई 2026। जिले के ग्राम मंदरौद में गौरैया एवं अन्य पक्षियों के संरक्षण के लिए वर्षों से सतत कार्य कर रहे समाजसेवी श्री मोहन साहू ने गांव प्रवास के दौरान कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा से सौजन्य मुलाकात कर अपने अभियान की जानकारी दी। कलेक्टर ने उनके अभिनव एवं जनसहभागिता आधारित प्रयासों की सराहना करते हुए इसे जैव विविधता संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन की दिशा में अनुकरणीय पहल बताया।

श्री मोहन साहू ने बताया कि उन्होंने अब तक 15 हजार से अधिक गौरैया एवं अन्य पक्षियों के लिए कृत्रिम आशियाने तैयार कर गांव के घरों, गलियों, विद्यालयों, खेल मैदानों, सार्वजनिक स्थलों तथा मुक्तिधाम सहित विभिन्न स्थानों पर स्थापित किए हैं। इन आशियानों में बड़ी संख्या में गौरैया सहित अन्य पक्षियों ने अपना बसेरा बनाया है, जिससे पक्षियों की संख्या में वृद्धि और उनके संरक्षण को नई दिशा मिली है। उन्होंने बताया कि इस अभियान के माध्यम से लोगों को पक्षियों के प्रति संवेदनशील बनाने तथा पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने के लिए लगातार जागरूकता गतिविधियां भी संचालित की जा रही हैं।

इस दौरान श्री साहू ने ग्राम मंदरौद को “गौरैया गांव” के रूप में विकसित करने तथा गांव के प्रमुख चौक को “गौरैया चौक” के रूप में पहचान दिलाने का प्रस्ताव भी कलेक्टर के समक्ष रखा। उन्होंने कहा कि इससे गौरैया संरक्षण का संदेश व्यापक स्तर पर पहुंचेगा तथा ग्रामीणों, विशेषकर बच्चों और युवाओं में प्रकृति एवं जैव विविधता के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।

कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने कहा कि बदलती जीवनशैली और शहरीकरण के कारण गौरैया जैसी छोटी पक्षी प्रजातियों का प्राकृतिक आवास लगातार प्रभावित हो रहा है। ऐसे समय में समाज की सहभागिता से किए जा रहे संरक्षण के प्रयास अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल शासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है और इस दिशा में श्री मोहन साहू का योगदान पूरे जिले के लिए प्रेरणास्रोत है।

कलेक्टर ने कहा कि “प्रकृति, पर्यावरण और पक्षियों का संरक्षण हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। गौरैया सहित अन्य पक्षियों के लिए हजारों कृत्रिम आशियाने तैयार कर उन्हें सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने का कार्य अत्यंत सराहनीय और अनुकरणीय है। ऐसे प्रयास पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ नई पीढ़ी में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित करते हैं। मंदरौद को ‘गौरैया गांव’ के रूप में विकसित करने का प्रयास निश्चित रूप से प्रेरक होगा।”

उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि गांव के प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर देश की रक्षा में अपना सर्वोच्च योगदान देने वाले वीर जवानों के चित्र एवं प्रेरक संदेश भी प्रदर्शित किए जाएं, ताकि बच्चों और युवाओं में पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ राष्ट्रभक्ति, सामाजिक जिम्मेदारी और सकारात्मक नागरिक मूल्यों का भी विकास हो सके।

कलेक्टर ने कहा कि प्रकृति संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और जनजागरूकता से जुड़े ऐसे नवाचार समाज में सकारात्मक परिवर्तन का आधार बनते हैं तथा प्रशासन भी जनहित और पर्यावरण संरक्षण की ऐसी रचनात्मक पहलों को सदैव प्रोत्साहित करता रहेगा।

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