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बरसात में सर्पदंश से घबराएं नहीं, समय पर इलाज ही बचाएगा जान

 

प्रदेश के सभी 33 जिलों में एंटी स्नेक वेनम का पर्याप्त भंडार, अस्पतालों में उपलब्ध हैं एक लाख से अधिक वायल

रायपुर 17 जुलाई 2026/
बरसात की पहली फुहार जहां खेतों में हरियाली और किसानों के चेहरों पर उम्मीद लेकर आती है, वहीं इस मौसम में खेतों, मेड़ों, जंगलों और घरों के आसपास सांपों का निकलना भी सामान्य हो जाता है | लेकिन वास्तविक असामान्य है वह देरी, जो आज भी कई लोग इलाज कराने के बजाय झाड़-फूंक और अंधविश्वास के भरोसे कर देते हैं। सर्पदंश से होने वाली अधिकांश मौतें जहर से कम और उपचार में हुई देरी से अधिक होती हैं। इसलिए किसी भी प्रकार के अंधविश्वास या झाड़-फूंक में समय गंवाने के बजाय मरीज को तत्काल निकटतम स्वास्थ्य केन्द्र पहुंचाना ही जीवन बचाने का सबसे प्रभावी उपाय है।

इसी चुनौती को देखते हुए छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग ने इस वर्ष भी उपचार व्यवस्था को मजबूत बनाए रखा है। प्रदेश के सभी 33 जिलों के जिला अस्पतालों एवं स्वास्थ्य संस्थानों में पॉलीवैलेंट एंटी स्नेक वेनम (ASV) का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित किया गया है। वर्तमान में प्रदेश में 1,00,960 वायल एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध हैं। यह स्टॉक जिलों की आवश्यकता, पिछले वर्षों में सर्पदंश के मामलों और संवेदनशील क्षेत्रों को ध्यान में रखकर उपलब्ध कराया गया है, ताकि किसी भी मरीज का उपचार तत्काल शुरू किया जा सके।

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार रायगढ़ (6,401), बलरामपुर (6,280), जशपुर (6,063), सूरजपुर (6,002), कोरबा (4,847), दुर्ग (4,351), कवर्धा (4,286), अंबिकापुर (4,269), बीजापुर (4,049), महासमुंद (3,656) और कांकेर (3,547) सहित सभी जिलों में पर्याप्त मात्रा में एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध है। अन्य जिलों में भी स्थानीय आवश्यकता के अनुरूप स्टॉक रखा गया है तथा जरूरत पड़ने पर नियमित आपूर्ति की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सभी सर्पदंश जहरीले नहीं होते, लेकिन यदि सर्पदंश के बाद दो दांतों जैसे निशान दिखाई दें, दंश वाले स्थान पर रक्तस्राव या सूजन हो, आंखों की पलकों का झुकना, धुंधला दिखना, सांस लेने में कठिनाई या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो बिना किसी देरी के तुरंत निकटतम सरकारी स्वास्थ्य केन्द्र या अस्पताल पहुंचें। आपातकालीन सहायता के लिए 108 एम्बुलेंस सेवा का भी उपयोग किया जा सकता है।

सर्पदंश की स्थिति में प्रभावित अंग पर चीरा लगाना, विष चूसने का प्रयास करना, कसकर रस्सी बांधना या झाड़-फूंक जैसे उपाय करना वैज्ञानिक दृष्टि से गलत होने के साथ-साथ मरीज के लिए जानलेवा भी साबित हो सकते हैं। मरीज को शांत रखें, अनावश्यक रूप से चलने-फिरने से बचाएं और शीघ्र अस्पताल पहुंचाएं।

बरसात के मौसम में खेतों और जंगलों में कार्य करते समय ऊंचे जूते पहनना, रात में टॉर्च का उपयोग करना, घर के आसपास झाड़ियों की नियमित सफाई रखना तथा जमीन पर सीधे सोने से बचना जैसी सरल सावधानियां सर्पदंश के खतरे को काफी हद तक कम कर सकती हैं। स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि सर्पदंश की स्थिति में किसी भी प्रकार के अंधविश्वास में समय न गंवाएं। प्रदेश के सभी जिलों में प्रशिक्षित चिकित्सकों एवं पर्याप्त एंटी स्नेक वेनम की उपलब्धता के साथ उपचार की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।

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