
*बाल संरक्षण को सर्वाेच्च प्राथमिकता देने के दिए निर्देश, पॉक्सो मामलों में जागरूकता बढ़ाने और स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की गहन निगरानी पर जोर*
धमतरी, 30 जुलाई 2026/ छत्तीसगढ़ राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने 29 जुलाई को जिला अधिकारियों की समीक्षा बैठक लेकर जिले में बाल संरक्षण, शिक्षा, खेल, बाल अधिकारों एवं बच्चों की सुरक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने कहा कि बच्चों का सुरक्षित, स्वस्थ एवं सम्मानजनक वातावरण सुनिश्चित करना शासन और समाज की साझा जिम्मेदारी है। देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रत्येक बच्चे के अधिकारों की रक्षा एवं समग्र विकास को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इस अवसर पर कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा और मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री जयंत नाहटा सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में अध्यक्ष ने नगर निगम से खेल मैदानों की स्थिति की जानकारी लेते हुए निर्देश दिए कि किसी भी खेल मैदान का व्यावसायिक उपयोग नहीं होना चाहिए। यदि कहीं खेल मैदानों का अन्य प्रयोजनों के लिए उपयोग हो रहा हो तो उसे तत्काल मुक्त कराकर बच्चों के खेलकूद के लिए उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि वर्षा ऋतु में मैदानों में जलभराव की स्थिति न रहे, इसके लिए आवश्यक प्रबंध किए जाएं।
नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि खेल सुविधाओं के विकास के लिए प्रस्ताव कलेक्टर को भेजा गया है। साथ ही एकलव्य मैदान में ई.ओ.आई. प्रक्रिया के तहत बॉक्स क्रिकेट का संचालन किया जा रहा है तथा जालमपुर स्कूल मैदान में भी बॉक्स क्रिकेट मैदान का निर्माण कराया गया है।
जिला खेल एवं युवा कल्याण अधिकारी ने जानकारी दी कि जिले के विभिन्न विकासखंडों में संचालित 81 मिनी स्टेडियमों में नियमित खेल गतिविधियां संचालित हो रही हैं। वहीं 36 प्रशिक्षण केन्द्रों के माध्यम से 1160 खिलाड़ियों को विभिन्न खेलों का प्रशिक्षण प्रदान किया गया है।
शिक्षा विभाग ने बताया कि स्कूल प्रबंधन समितियों एवं जनसहयोग से विद्यालयों के खेल मैदानों का समतलीकरण कराया जा रहा है। जिन ग्राम पंचायतों से अग्निवीर एवं थलसेना में अधिक युवा चयनित हुए हैं, वहां खेल सुविधाओं के विस्तार पर विशेष कार्य किया जा रहा है।
डॉ. वर्णिका शर्मा ने निर्देशित किया कि सभी विद्यालयों में छात्र एवं छात्राओं के लिए पृथक एवं स्वच्छ शौचालय, शुद्ध पेयजल, सफाई व्यवस्था तथा आवश्यक मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। उन्होंने कहा कि विद्यालय परिसर बच्चों के लिए सुरक्षित, स्वच्छ एवं अनुकूल वातावरण प्रदान करने वाले होने चाहिए।
शिक्षा विभाग ने अवगत कराया कि जिले के 1076 विद्यालयों में से जर्जर शौचालयों के स्थान पर 34 बालिका एवं 84 बालक शौचालयों के निर्माण हेतु प्रस्ताव जिला पंचायत को भेजा गया है। वहीं 615 विद्यालयों में खेल सामग्री उपलब्ध है तथा शेष विद्यालयों में जनसहयोग एवं खेल विभाग के माध्यम से खेल सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। जिले के 12 स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों में योग एवं संगीत के लिए अतिथि शिक्षकों की व्यवस्था भी की गई है।
बैठक में अध्यक्ष ने स्पष्ट निर्देश दिए कि विद्यालयों के सभी परिसरों एवं प्रमुख दीवारों पर चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 तथा संबंधित बाल कल्याण पुलिस अधिकारी का नाम एवं संपर्क विवरण प्रमुखता से अंकित किया जाए, ताकि आवश्यकता पड़ने पर बच्चे एवं आमजन तत्काल सहायता प्राप्त कर सकें। उन्होंने शिक्षकों से बच्चों के प्रति संवेदनशील एवं सकारात्मक व्यवहार अपनाने, किशोरियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विद्यालयों में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा बाल सुरक्षा संबंधी जागरूकता गतिविधियां नियमित रूप से आयोजित करने के निर्देश दिए।
पुलिस विभाग ने बताया कि जिले में पॉक्सो अधिनियम के तहत 195 प्रकरण दर्ज हुए हैं, जिनमें से केवल 4 प्रकरण लंबित हैं। इस पर चिंता व्यक्त करते हुए डॉ. शर्मा ने कहा कि बच्चों के विरुद्ध अपराधों की रोकथाम के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाए जाएं। साथ ही प्रत्येक थाने में बाल कल्याण अधिकारी का नाम एवं चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 प्रदर्शित किया जाना सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने शिक्षा विभाग को निर्देश दिए कि पिछले तीन वर्षों में विद्यालय छोड़ चुके बच्चों की सूची का गहन सत्यापन कर यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी बच्चा बाल श्रम, बाल विवाह, मानव तस्करी अथवा अन्य शोषण का शिकार न हो। जोखिमग्रस्त बच्चों की नियमित निगरानी कर उन्हें पुनः शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के प्रभावी प्रयास किए जाएं।
जिला बाल संरक्षण अधिकारी श्री आनंद पाठक ने बताया कि सड़क एवं सार्वजनिक स्थानों पर रहने वाले बच्चों के संरक्षण के लिए प्रत्येक तीन माह में विशेष अभियान संचालित किया जाता है। एक जून से 30 जून 2026 तक चलाए गए विशेष अभियान के दौरान 6 बालिकाओं एवं बाल श्रम में संलिप्त एक बालक का रेस्क्यू किया गया। वहीं पिछले तीन वर्षों में 30 बच्चों का सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर उनका पुनर्वास कराया गया।
बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि बाल अधिकार संरक्षण, सुरक्षित विद्यालय वातावरण, खेल सुविधाओं के विकास, बाल सुरक्षा कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन तथा बच्चों के समग्र विकास के लिए विभागीय समन्वय के साथ सतत कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। बच्चों के हितों से जुड़े प्रत्येक विषय पर संवेदनशीलता एवं जवाबदेही के साथ कार्य करना ही सुशासन की पहचान है।








