
आधुनिक राइस ट्रांसप्लांटर से 16 एकड़ में समय पर रोपाई, लागत घटी और बढ़ी उत्पादन की उम्मीद
*शासन की अनुदान योजना से मिली 4 लाख रुपये की सब्सिडी, आसपास के किसानों के लिए बने प्रेरणा स्रोत*
रायपुर, 31 जुलाई 2026/ कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों और उन्नत कृषि यंत्रों का बढ़ता उपयोग किसानों के लिए खेती-किसानी को अधिक सरल, किफायती और लाभकारी बना रहा है। इसी दिशा में बस्तर जिले के तेलीमारेंगा गांव के प्रगतिशील किसान महादेव मौर्य ने इस खरीफ सीजन में आधुनिक राइस ट्रांसप्लांटर (धान रोपाई मशीन) का उपयोग कर उन्नत खेती की नई मिसाल पेश की है। मशीन आधारित रोपाई से उन्होंने न केवल खेती की लागत में उल्लेखनीय कमी लाई है, बल्कि श्रमिकों पर निर्भरता घटाते हुए समय की भी बड़ी बचत की है।
*मजदूरों की कमी के बीच आधुनिक तकनीक बनी सहारा*
महादेव मौर्य के पास 8 एकड़ पैतृक कृषि भूमि है। इसके अतिरिक्त उन्होंने 8 एकड़ भूमि लीज पर लेकर इस वर्ष कुल 16 एकड़ में धान की खेती की है। खरीफ सीजन में श्रमिकों की कमी किसानों के लिए बड़ी चुनौती बनती है, लेकिन राइस ट्रांसप्लांटर के उपयोग से यह समस्या काफी हद तक दूर हो गई। जहां पारंपरिक तरीके से धान की रोपाई के लिए दर्जनों मजदूरों और कई दिनों का समय लगता था, वहीं मशीन की सहायता से केवल दो से तीन लोगों की मदद से कम समय में रोपाई का कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया जा रहा है।
*लागत में आई उल्लेखनीय कमी*
महादेव मौर्य बताते हैं कि पारंपरिक तरीके से हाथों से धान की रोपाई कराने पर प्रति एकड़ लगभग 7 से 8 हजार रुपये तक का खर्च आता था, जबकि राइस ट्रांसप्लांटर के उपयोग से यह लागत घटकर 2 से 2.5 हजार रुपये प्रति एकड़ रह गई है। इससे खेती की कुल लागत में उल्लेखनीय कमी आई है और खेती अधिक लाभकारी बन रही है।
*शासन की अनुदान योजना से मिला बड़ा संबल*
महादेव मौर्य ने बताया कि राइस ट्रांसप्लांटर मशीन की कुल कीमत लगभग 9 लाख रुपये थी। शासन की अनुदान योजना के तहत उन्हें 4 लाख रुपये की सब्सिडी प्राप्त हुई, जिससे यह आधुनिक कृषि यंत्र उन्हें मात्र 5 लाख रुपये में उपलब्ध हो सका। उन्होंने कहा कि सरकार की इस सहायता से आधुनिक तकनीक अपनाना किसानों के लिए कहीं अधिक आसान हुआ है।
*बेहतर पैदावार की उम्मीद, अन्य किसान भी हो रहे प्रेरित*
महादेव मौर्य का कहना है कि मशीन से धान की रोपाई करने पर पौधों के बीच समान दूरी बनी रहती है, जिससे फसल का विकास बेहतर होता है और अधिक उत्पादन मिलने की संभावना बढ़ जाती है। उनके इस सफल प्रयोग को देखकर आसपास के किसान भी आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग के प्रति उत्साहित हो रहे हैं और भविष्य में इस तकनीक को अपनाने की इच्छा जता रहे हैं।








