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भरत तिवारी मामले में मुख्य सचिव-DGP और भोजपुर SP को नोटिस, मानवाधिकार आयोग ने 2 दिन में मांगी रिपोर्ट

Bharat Tiwari Encounter Case : भोजपुर के बिलौटी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी से जुड़े एनकाउंटर मामले में जांच का दायरा बढ़ गया है. बिहार मानवाधिकार आयोग ने मामले में राज्य के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और भोजपुर के पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी कर दो दिनों के भीतर तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है. वहीं न्यायिक जांच आयोग ने भी मामले में साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया तेज कर दी है. आयोग ने आम लोगों से 27 अगस्त तक साक्ष्य और बयान उपलब्ध कराने की अपील की है.

भरत तिवारी मामले में मानवाधिकार आयोग का बड़ा कदम

जानकारी अनुसार,  ने भोजपुर के भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में राज्य के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और भोजपुर के पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी किया है. आयोग ने संबंधित अधिकारियों से दो दिनों के भीतर मामले की तथ्यात्मक रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा है.

सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता की शिकायत पर कार्रवाई

मानवाधिकार आयोग की यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता डॉ. अजय कुमार पांडे की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत के बाद हुई है. बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग के उपसचिव-सह-वरीय प्रभारी पदाधिकारी अविनाश कुमार झा ने मामले में दर्ज शिकायतों और चल रही कार्रवाई की जानकारी दी.

आयोग में भरत तिवारी से जुड़े 42 केस दर्ज

अविनाश कुमार झा के अनुसार मानवाधिकार आयोग में भरत तिवारी से संबंधित 42 केस दर्ज किए जा चुके हैं. इससे मामले की गंभीरता और इसमें सामने आए अलग-अलग दावों की जांच का दायरा समझा जा सकता है.

न्यायिक आयोग भी जांच में जुटा

बता दें कि, भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले की न्यायिक जांच भी चल रही है. न्यायिक जांच आयोग की ओर से जल्द ही गवाहों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों का क्रॉस एग्जामिनेशन शुरू किया जाएगा. इसके लिए आम लोगों से भी मामले से संबंधित जानकारी और साक्ष्य उपलब्ध कराने की अपील की गई है.

27 अगस्त तक साक्ष्य देने का मौका

न्यायिक जांच आयोग के सचिव सह सेवानिवृत्त न्यायाधीश सुबोध कुमार श्रीवास्तव ने सोमवार को प्रेस वार्ता में बताया कि आम लोगों से 27 अगस्त तक साक्ष्य और बयान उपलब्ध कराने को कहा गया है. आयोग ने घटना से जुड़ी जानकारी रखने वाले लोगों से आगे आने की अपील की है.

बिलौटी पुलिस फायरिंग से जुड़े साक्ष्य मांगे गए

सचिव ने बताया कि 24 जुलाई को आयोग की ओर से बिलौटी पुलिस फायरिंग के संबंध में आम लोगों से साक्ष्य और बयान देने की अपील की गई थी. घटना से संबंधित इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य या अन्य महत्वपूर्ण जानकारी रखने वाले लोग उसे शपथ पत्र के जरिए आयोग के समक्ष उपलब्ध करा सकते हैं.

10 अगस्त तक नहीं मिला कोई शपथ पत्र

आयोग के सचिव के अनुसार 10 अगस्त तक दोनों पक्षों की ओर से कोई शपथ पत्र प्राप्त नहीं हुआ था. हालांकि आयोग को चार-पांच आवेदन मिले हैं. इनमें एक व्यक्ति ने अपने पास घटना से संबंधित साक्ष्य होने की जानकारी दी है. संबंधित व्यक्ति को 27 अगस्त तक साक्ष्य उपलब्ध कराने की सूचना दी गई है.

दूसरे चरण में गवाहों के बयान भी होंगे दर्ज

न्यायिक जांच आयोग के सचिव ने बताया कि 27 अगस्त के बाद प्राप्त होने वाले साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का क्रॉस एग्जामिनेशन शुरू किया जाएगा. पहले चरण की गवाही के दौरान जिन लोगों का बयान किसी कारण से दर्ज नहीं हो सका था, दूसरे चरण में उनके बयान भी लिए जाएंगे.

गवाहों के बयान और साक्ष्यों का होगा मिलान

जांच के अगले चरण में आयोग उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का मिलान करेगा. इसका उद्देश्य मामले से जुड़े तथ्यों को अधिक स्पष्ट करना और जांच के दौरान सामने आने वाली जानकारियों की पड़ताल करना है.

पूर्व IPS अमिताभ दास से भी साक्ष्य देने की अपील

न्यायिक जांच आयोग के सचिव ने बताया कि पूर्व IPS अमिताभ दास की ओर से भी आवेदन दिया गया है. आयोग ने कहा है कि यदि उनके पास मामले से संबंधित कोई साक्ष्य उपलब्ध है, तो उसे भी जांच आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया जा सकता है.

मानवाधिकार आयोग और न्यायिक आयोग की कार्रवाई पर नजर

एक ओर बिहार मानवाधिकार आयोग ने शीर्ष प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों से तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है, वहीं दूसरी ओर न्यायिक जांच आयोग साक्ष्य और गवाहों के बयान जुटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है. दोनों स्तरों पर चल रही कार्रवाई के कारण अब मामले की जांच को लेकर आगे आने वाले कदम महत्वपूर्ण होंगे.

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