
रायपुर, 1 सितम्बर 2026/
प्रदेश के लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित कर स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
बैठक में मंत्री श्री जायसवाल ने कहा कि सुरक्षित मातृत्व आश्वासन योजना के तहत मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और प्रभावी बनाने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन एवं आशा कार्यकर्ताओं तथा स्वास्थ्य टीम के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित किया जाए, ताकि गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान, नियमित जांच, हाई-रिस्क गर्भावस्था की सतत निगरानी, संस्थागत प्रसव एवं आवश्यकता पड़ने पर समयबद्ध रेफरल संभव हो सके।
टीबी उन्मूलन कार्यक्रम को लेकर मंत्री ने निर्देशित किया कि टीबी मरीजों की समय पर पहचान, जांच एवं उपचार सुनिश्चित करते हुए अभियान को और अधिक प्रभावी बनाया जाए, जिससे तय लक्ष्यों की प्राप्ति समय पर हो सके। इसके साथ ही H1N1 यानी स्वाइन फ्लू की स्थिति पर सतत निगरानी रखने, जांच व उपचार की समुचित व्यवस्था करने तथा आवश्यक दवाइयों एवं संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के निर्देश दिए गए, ताकि किसी भी संभावित संक्रमण की स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
मलेरिया नियंत्रण के मुद्दे पर मंत्री ने विशेष रूप से बस्तर संभाग तथा अन्य मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में जांच, उपचार, सर्विलांस एवं रोकथाम गतिविधियों को और सुदृढ़ करने तथा संवेदनशील क्षेत्रों की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही ट्रांसजेंडर समुदाय को सुगम एवं समुचित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने हेतु प्रस्तावित व्यवस्था की प्रगति की समीक्षा करते हुए संबंधित कार्यवाही शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश भी दिए गए।
मंत्री श्री जायसवाल ने स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न संवर्गों में रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया की समीक्षा करते हुए इसे प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त दूरस्थ एवं स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित क्षेत्रों में विशेषज्ञ चिकित्सा परामर्श उपलब्ध कराने के लिए टेलीमेडिसिन सेवाओं को और सुदृढ़ करने तथा मेडिकल कॉलेजों एवं विशेषज्ञ चिकित्सकों को इससे प्रभावी रूप से जोड़ते हुए अधिकाधिक मरीजों को इसका लाभ पहुंचाने पर बल दिया गया।
बैठक के अंत में मंत्री ने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि उपरोक्त सभी विषयों पर वर्तमान स्थिति, लंबित कार्यवाही एवं आगामी कार्ययोजना स्पष्ट करते हुए समय-सीमा निर्धारित कर क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए तथा प्रगति की नियमित समीक्षा की जाती रहे।









