
Hartalika Teej 2026 Puja Samagri: हरतालिका तीज का त्योहार 14 सितंबर 2026 सोमवार को मनाया जाएगा. इस दिन सुहागन स्त्री द्वारा भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है. इस मौके पर पूरा समाप्त होने के बाद अक्सर फूल, पत्ते, अक्षत, सुपारी, हल्दी, रोली और दूसरी पूजन सामग्री बच जाती है. इन बची सामग्री का क्या करना चाहिए इसे लेकर उलझन रहती होगी, तो आइए बताएं कि बची पूजा सामग्री का क्या करें.
व्रत पर बचे अक्षत, सुपारी, हल्दी, रोली और दूसरी पूजन सामग्री को कचरे के डब्बे में नहीं फेंकना चाहिए. इन्हें सम्मानपूर्वक विसर्जन करना चाहिए. परंपरा के अनुसार इन सामग्रियों को पवित्र जल में विसर्जन किया जा सकता है, लेकिन पर्यावरण की दृष्टि से प्राकृतिक सामग्री को स्थानीय धार्मिक परंपरा और स्वच्छता नियमों के अनुसार विसर्जित करें. पूजन के बाद बची सामग्रियों को अगर जल में प्रवाह नहीं कर सकते हैं, तो फूल इत्यादि को मिट्टी में दबा देना उचित रहेगा.
फूल और पत्तियों को ऐसे करें अलग
पूजा में चढ़ाए गए फूल और पत्तियों को भी घर के कूड़ेदान में फेंकने से बचना चाहिए. मान्यताओं में ऐसा बताया गया है कि फूल और पत्तियों को पौधे या पेड़ (स्वच्छ और शुद्ध) के नीचे भी रख सकते हैं, बशर्ते पेड़ और पौधे के नीचे की जगह साफ हो. धार्मिक परंपरा में पूजा की प्राकृतिक सामग्री को प्रकृति में लौटाने की भावना महत्वपूर्ण मानी जाती है.
अक्षत और सुपारी को संभालकर रख सकते हैं
पूजा में इस्तेमाल हुए अक्षत यानी साबुत चावल, सुपारी और कुछ अन्य सूखी सामग्री को साफ करके अलग रखा जा सकता है. भविष्य में इनका प्रयोग किया जा सकता है (पूजन कार्यों को अलावा). जो सामग्री खराब या गंदी हो गई हो तो उसे दोबारा इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. इसके अलावा पूजा के बाद बची हल्दी, रोली या सिंदूर को पूजा स्थान पर सुरक्षित रखा जा सकता है. मान्यता के अनुसार इन्हें पैरों के नीचे नहीं आने देना चाहिए.
ज्योतिष में क्यों माना जाता है शुभ?
ज्योतिषाचार्य नितेश निरंजन बताते हैं कि ज्योतिषीय मान्यताओं में हरतालिका तीज का संबंध शुक्र, चंद्रमा और दांपत्य सुख से जोड़ा जाता है. माता पार्वती को अखंड सौभाग्य और दांपत्य सुख की प्रतीक माना जाता है. इसलिए पूजा की सामग्री के साथ सम्मानजनक व्यवहार करने को श्रद्धा, सकारात्मकता और गृहस्थ जीवन की मंगल भावना से जोड़ा जाता है.
शास्त्रों में शिव-पार्वती पूजा का महत्व
हर साल हरतालिका तीज का व्रत भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है. हरतालिका तीज व्रत की पूजा और माता पार्वती को समर्पित होती है. व्रतराज में हरतालिका पूजा की विधि का उल्लेख मिलता है, जिसमें उमा-महेश्वर के पूजन और षोडशोपचार पूजा का विधान बताया गया है.









