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DUSU Election 2026: NSUI की हार से राहुल गांधी और कांग्रेस के टॉप लीडर नाराज; इंचार्ज पर हो सकता है एक्शन

DUSU Election 2026: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव में नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) को करारी हार का सामना करना पड़ा. NSUI के इस खराब प्रदर्शन को लेकर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व में नाराजगी की बात सामने आई है. न्यूज एजेंसी ANI ने सूत्रों के हवाले से बताया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी समेत कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने NSUI के चुनावी प्रदर्शन पर असंतोष जताया है.

NSUI इस बार DUSU के चारों केंद्रीय पदों में से एक भी सीट जीतने में सफल नहीं रही. वहीं, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पद पर जीत दर्ज की. उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन विजयी रहे.

चुनावी रणनीति और उम्मीदवार चयन पर नाराजगी

सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस नेतृत्व ने NSUI के अभियान की रणनीति, उम्मीदवारों के चयन और चुनाव प्रबंधन को लेकर सवाल उठाए हैं. पार्टी के भीतर इस बात की भी चर्चा है कि संगठन में अंदरूनी मतभेद और बागी उम्मीदवारों की मौजूदगी का चुनाव पर असर पड़ा.

दीपांशु शौकीन ने NSUI से अलग होकर निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा और उपाध्यक्ष पद पर 30,615 वोट हासिल किए. उन्होंने ABVP के ईशु मौर्य को 16,910 वोट और NSUI के वीर छत्राथ को 4,313 वोट मिले.

सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस नेतृत्व पूरे मामले की समीक्षा कर रहा है और संगठन के स्तर पर जल्द कार्रवाई की जा सकती है.

20 राउंड की गिनती के बाद आया DUSU Result

DUSU चुनाव की 20 राउंड की मतगणना के बाद अध्यक्ष पद पर ABVP के यश डबास ने जीत दर्ज की. उन्हें 24,576 वोट मिले, जबकि NSUI के विजय शंकर मीणा को 22,523 वोट मिले. डबास ने 2,053 वोटों के अंतर से जीत हासिल की.

सचिव पद पर ABVP की रिया छावड़ी को 21,650 वोट मिले. NSUI की नम्रता चौधरी 14,869 वोट के साथ दूसरे स्थान पर रहीं.

संयुक्त सचिव पद पर ABVP के लक्ष्य राज सिंह विजयी रहे. उन्हें 16,615 वोट मिले, जबकि निर्दलीय उम्मीदवार विशेष यादव को 15,778 और NSUI के गोपाल चौधरी को 15,206 वोट मिले.

छात्र मुद्दों पर रहा चुनाव का फोकस

DUSU चुनाव प्रचार के दौरान छात्र सुरक्षा, हॉस्टल और आवास, कैंपस इंफ्रास्ट्रक्चर, शैक्षणिक सुविधाओं और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दे प्रमुख रहे.

दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत ढहने की घटना के बाद छात्र आवास और सुरक्षा का मुद्दा भी चुनावी चर्चा में रहा. इस हादसे में सात लोगों की मौत हुई थी, जिनमें पांच छात्र शामिल थे.

इस बार ABVP, NSUI और AISA-SFI गठबंधन समेत विभिन्न छात्र संगठनों के कुल 20 उम्मीदवारों ने चार केंद्रीय पदों के लिए चुनाव लड़ा था.

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