
रायपुर, 26 सितंबर 2026/ मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी जिले के मानपुर विकासखंड के छोटे से गांव कुम्हारी में रहने वाली निर्माण श्रमिक श्रीमती केशर कोमा का जीवन संघर्ष और मेहनत की मिसाल है। ईंट-पत्थरों के बीच दिनभर मेहनत कर अपने परिवार का भरण-पोषण करने वाली केशर कोमा के मन में हमेशा से एक सपना रहा कि उनका बेटा विवेक पढ़-लिखकर अपने जीवन में आगे बढ़े और सम्मानजनक भविष्य बनाए।
सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने बेटे की पढ़ाई को कभी रुकने नहीं दिया। ऐसे समय में शासन की मुख्यमंत्री नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना उनके परिवार के लिए उम्मीद की एक नई किरण बनकर सामने आई। सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से श्रमिक परिवारों तक शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी और उनका लाभ पहुंचाने के प्रयासों के तहत विवेक को इस योजना का लाभ मिला। छात्रवृत्ति की सहायता से उसकी पढ़ाई को आर्थिक संबल मिला और शिक्षा के सपनों को आगे बढ़ाने का रास्ता और आसान हुआ।
मुख्यमंत्री नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत पात्र निर्माण श्रमिकों के बच्चों को कक्षा प्रथम से स्नातकोत्तर, पीएचडी एवं शोध कार्य तक की शिक्षा के लिए 1 हजार से 10 हजार रुपए तक की छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। योजना की विशेषता यह है कि छात्रवृत्ति के लिए अंकों की बाध्यता नहीं रखी गई है, बल्कि श्रमिक अभिभावक द्वारा पिछले एक वर्ष में कम से कम 90 दिन निर्माण कार्य किया जाना पात्रता की प्रमुख शर्तों में शामिल है। विवेक की कहानी यह बताती है कि शासन की संवेदनशील योजनाएं जब जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचती हैं, तो आर्थिक कठिनाइयों के बीच भी शिक्षा के सपनों को मजबूती मिलती है।









