
Rohini Vrat 2026: जैन धर्म में रोहिणी व्रत का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है. यह व्रत रोहिणी नक्षत्र के दौरान रखा जाता है. वर्ष 2026 में अक्टूबर महीने में दो बार रोहिणी व्रत रखा जाएगा. पहला व्रत 1 अक्टूबर और दूसरा 28 अक्टूबर को रखा जाएगा. इस पावन दिन जैन धर्म के 12वें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य की आराधना और व्रत किया जाता है. इस दिन महिलाएं मुख्य रूप से पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना से यह व्रत रखती हैं. आइए जानते हैं दोनों व्रत की तिथि, नक्षत्र का समय, पारण और धार्मिक महत्व.
अक्टूबर 2026 में रोहिणी व्रत कब-कब है?
अक्टूबर 2026 में रोहिणी व्रत दो बार रखा जाएगा. इसकी तारीख और नक्षत्र का समय इस प्रकार है-
पहला रोहिणी व्रत- 1 अक्टूबर 2026
- रोहिणी नक्षत्र प्रारंभ: 1 अक्टूबर 2026, सुबह 6:02 बजे
- रोहिणी नक्षत्र समाप्त: 2 अक्टूबर 2026, सुबह 4:27 बजे
दूसरा रोहिणी व्रत- 28 अक्टूबर 2026
- रोहिणी नक्षत्र प्रारंभ: 28 अक्टूबर 2026, दोपहर 1:26 बजे
- रोहिणी नक्षत्र समाप्त: 29 अक्टूबर 2026, सुबह 11:11 बजे
रोहिणी व्रत का धार्मिक महत्व
रोहिणी व्रत को तप, संयम और आत्मशुद्धि से जुड़ा माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत के पालन से व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति मिलती है. यह व्रत विशेष रूप से महिलाएं पति की दीर्घायु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से रखती हैं.
रोहिणी व्रत पूजा विधि
- सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर घर की साफ-सफाई करें. इसके बाद स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें.
- घर के पूजा स्थल को साफ करें. वहां भगवान वासुपूज्य की पंचधातु, तांबे या स्वर्ण की प्रतिमा स्थापित करें.
- प्रतिमा का जल से अभिषेक करें. इसके बाद चंदन, पुष्प, धूप और दीप अर्पित कर पूजा करें.
- इसके बाद रोहिणी व्रत की कथा का पाठ करें या श्रद्धापूर्वक सुनें.
- पूजा के बाद जरूरतमंदों को दान करें और भगवान वासुपूज्य से सुख-शांति की प्रार्थना करें.









