
Nisha Bhagat Suicide Case : निशा भगत आत्महत्या मामले में उनके पिता ने सोशल मीडिया पर बेटी का चरित्र हनन करने और उसे बदनाम करने का आरोप लगाते हुए पिठोरिया थाना में लिखित शिकायत दी है. 6 नवंबर 2026 को दिये गये आवेदन में उन्होंने अजय तिर्की और ज्योत्स्ना केरकेट्टा समेत अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. पिता ने पुलिस से निशा के निधन से पहले सोशल मीडिया पर दिये गये उनके बयान में उठाये गये मुद्दों और उसमें उल्लेखित लोगों की भूमिका की जांच करने का आग्रह किया है.
बेटी को बनाया जा रहा था सोशल मीडिया पर निशाना
शिकायत में पिता ने आरोप लगाया है कि उनकी बेटी को सोशल मीडिया पर निशाना बनाया जा रहा था. उसके बारे में आपत्तिजनक टिप्पणियां कर छवि खराब करने की कोशिश की जा रही थी. उन्होंने इसे चरित्र हनन और मानसिक रूप से परेशान करने वाला कृत्य बताया है. हालांकि, शिकायत में लगाये गये आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
फेसबुक लाइव में ट्रोलिंग पर जतायी थी नाराजगी
निशा भगत की मौत से पहले का उनका सोशल मीडिया बयान भी इस मामले में चर्चा का विषय बना था. फेसबुक लाइव के दौरान उन्होंने सोशल मीडिया पर हो रही ट्रोलिंग और अपने खिलाफ इस्तेमाल किये जा रहे अपमानजनक शब्दों को लेकर नाराजगी जाहिर की थी. इसी पृष्ठभूमि में उनके पिता ने कथित चरित्र हनन और सोशल मीडिया पर प्रताड़ित किये जाने के आरोपों की जांच की मांग की है.
अंतिम बयान में उल्लेखित लोगों की भूमिका की जांच का आग्रह
पिता ने पुलिस से निशा के अंतिम सोशल मीडिया बयान को भी जांच का हिस्सा बनाने का आग्रह किया है. उनका कहना है कि उस बयान में जिन लोगों और घटनाओं का उल्लेख किया गया है, उनकी पड़ताल की जानी चाहिए. आवेदन में संबंधित लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गयी है.
क्या सोशल मीडिया ट्रोलिंग से बढ़ रहा था मानसिक दबाव?
पिता की शिकायत के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या सोशल मीडिया पर कथित ट्रोलिंग और चरित्र हनन के कारण निशा मानसिक दबाव का सामना कर रही थीं. हालांकि, फिलहाल सोशल मीडिया पर हुई कथित प्रताड़ना को उनकी आत्महत्या का कारण बताना उचित नहीं होगा. उनकी मौत की परिस्थितियों और सोशल मीडिया पर लगाये गये आरोपों के बीच संबंध की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी.
फिलहाल उपलब्ध दस्तावेज के अनुसार, पिता ने थाने में लिखित आवेदन दिया है. आवेदन पर प्राप्ति की मुहर लगी है, लेकिन इससे प्राथमिकी दर्ज होने की पुष्टि नहीं होती. पुलिस का आधिकारिक पक्ष और शिकायत में नामित लोगों की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी.






