
अम्बिकापुर 03 अक्टूबर 2026/ कलेक्टर श्री अजीत वसंत ने शनिवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में नगर निगम अंबिकापुर के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन एवं स्वच्छता कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने नगर की स्वच्छता व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, कचरे के पृथक्करण, नियमित सफाई तथा यूजर चार्ज वसूली पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। बैठक में नगर निगम आयुक्त श्री विनय कुमार अग्रवाल, संबंधित अधिकारी, सफाई ठेकेदार तथा स्वच्छता दीदियां उपस्थित रहीं।
बैठक में नगर निगम आयुक्त श्री विनय कुमार अग्रवाल ने डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, कचरा प्रोसेसिंग एवं नगरीय सफाई व्यवस्था, सार्वजनिक एवं सामुदायिक शौचालय तथा गौधाम के संचालन के संबंध में विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने कचरा संग्रहण से लेकर उसके अंतिम निपटान तक की पूरी प्रक्रिया, उपलब्ध मानव संसाधन तथा कार्यों में आ रही समस्याओं की जानकारी दी।
बड़े बकायादारों से एक माह के भीतर करें यूजर चार्ज की वसूली
कलेक्टर श्री वसंत ने यूजर चार्ज संग्रहण की समीक्षा करते हुए संपत्ति कर, समेकित कर एवं यूजर चार्ज के बड़े बकायादारों तथा निर्धारित दर से कम यूजर चार्ज का भुगतान करने वाले व्यावसायिक संस्थानों से एक माह के भीतर बकाया राशि की वसूली सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं करने वालों के विरुद्ध नियमानुसार आवश्यक सेवाएं जैसे नल कनेक्शन आदि बंद करने कार्रवाई करने को कहा। वहीं एकमुश्त बकाया राशि का भुगतान करने वाले संस्थानों को सम्मान पत्र प्रदान करने के निर्देश दिए।
चार श्रेणियों में कचरा पृथक्करण के लिए चलाएं जागरूकता अभियान
कलेक्टर ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रावधानों के अनुरूप नागरिकों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों एवं अन्य संस्थाओं द्वारा चार श्रेणियों में कचरे का पृथक्करण कर स्वच्छता दीदियों को दिए जाने की व्यवस्था का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने कहा। इसके लिए नियमित निगरानी, समझाइश एवं जन-जागरूकता गतिविधियां संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में विद्यार्थियों को सोर्स सेग्रीगेशन के प्रति जागरूक करने तथा सभी स्वच्छता वाहनों के माध्यम से नियमित मुनादी कराने के निर्देश दिए।
सफाई कार्य में पर्याप्त श्रमिक और वाहन लगाना सुनिश्चित करें
नगर सफाई व्यवस्था की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने सफाई ठेकेदारों को अपने प्रभावित क्षेत्रों में निर्धारित संख्या में सफाई श्रमिकों की तैनाती सुनिश्चित करने तथा प्रतिदिन कचरा उठाव के लिए कम से कम दो वाहन लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने एसएलआरएम केंद्रों से गीले कचरे का प्रतिदिन नियमित रूप से परिवहन सुनिश्चित करने कहा।
कलेक्टर ने सार्वजनिक एवं सामुदायिक शौचालयों के नियमित संचालन और साफ-सफाई की सतत निगरानी करने के निर्देश दिए। व्यवस्था में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित शौचालय संचालन एजेंसी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने तथा शौचालयों की व्यवस्था को और सुदृढ़ करने कहा।
ठेला-गुमटी एवं स्ट्रीट वेंडरों के लिए भी सुनिश्चित हो कचरा प्रबंधन व्यवस्था
कलेक्टर ने शहर के ठेला-गुमटी एवं अस्थायी स्ट्रीट वेंडरों को चिन्हांकित कर उनके यहां डस्टबिन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही उनसे निर्धारित यूजर चार्ज का भुगतान कराने तथा कचरे को पृथक-पृथक कर स्वच्छता दीदियों को देने की व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू करने कहा।
उन्होंने गौधाम में अतिरिक्त शेड निर्माण एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं के विस्तार के लिए प्राक्कलन तैयार कर स्वीकृति हेतु प्रस्तुत करने के निर्देश भी संबंधित अधिकारियों को दिए।
रिंग रोड की नियमित सफाई के लिए कार्ययोजना तैयार करें
कलेक्टर श्री वसंत ने शहर के रिंग रोड की नियमित सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने नगर निगम को रिंग रोड क्षेत्र में बेहतर सफाई व्यवस्था के लिए कार्ययोजना तैयार कर प्रस्तुत करने कहा।
अम्बिकापुर 03 अक्टूबर 2026 / आसान होता है आमजनों का जीवन , जब शासकीय योजनाएं कागज से निकलकर जीवन का हिस्सा बनती हैं। यही जनसेवा की सबसे सार्थक तस्वीर है। विकास का अर्थ केवल बड़े निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं है। विकास तब व्यापक बनता है जब उसका लाभ गांव, गरीब, किसान, महिला, बच्चा, युवा, पशुपालन और दूरस्थ क्षेत्र में रहने वाले परिवार तक पहुंचे। सरकार और नागरिक के बीच विश्वास तभी मजबूत होता है जब नागरिक को यह अनुभव हो कि उसकी जरूरत को समझा जा रहा है, उसकी समस्या सुनी जा रही है और उसके जीवन को बेहतर बनाने के लिए व्यवस्था काम कर रही है।यह तभी संभव होता है जब शासन सिर्फ शासन नहीं बल्कि सुशासन हो।
सुशासन की वास्तविक पहचान केवल योजनाओं की संख्या से नहीं होती, बल्कि इस बात से होती है कि उन योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक कितनी सहजता से पहुंच रहा है और उसके जीवन में कितना सार्थक बदलाव ला रहा है। छत्तीसगढ़ में शासन की जनकल्याणकारी पहलों को इसी दृष्टि से देखा जा सकता है, जहां विकास का केंद्र नागरिक है और योजनाओं का उद्देश्य केवल सहायता देना नहीं, बल्कि लोगों को सुरक्षित, सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आगे बढ़ाना है।
एक गरीब परिवार को पक्का घर मिलना, किसी महिला को अपनी आय का साधन मिलना, किसी किसान के खेत तक सिंचाई पहुंचना, किसी बच्चे को कुपोषण से बाहर निकालना, किसी विद्यार्थी की दस्तावेज संबंधी समस्या का समाधान होना या किसी नागरिक को अपनी शिकायत के लिए उचित मंच मिलनाकृये अलग-अलग घटनाएं दिखाई दे सकती हैं, लेकिन इनके पीछे जनसेवा की एक ही भावना काम करती है।
यही भावना ‘सेवा से सुशासन’ और ‘सुशासन से जनकल्याण’ की उस यात्रा को रेखांकित करती है, जिसमें शासन नागरिक के जीवन को आसान बनाने के लिए योजनाओं, तकनीक, प्रशासनिक व्यवस्था और मैदानी सेवाओं को एक-दूसरे से जोड़ रहा है।
कच्ची दीवारों से पक्के सपनों तक पहुंचता आवास
किसी परिवार के लिए अपना पक्का घर केवल ईंट, सीमेंट और छत का निर्माण नहीं होता। यह सुरक्षा, सम्मान और स्थायित्व का आधार होता है।
सरगुजा के पहाड़ी कोरवा परिवारों की जिंदगी में पीएम जनमन के माध्यम से आवास की सुविधा पहुंचने से इस बदलाव की तस्वीर दिखाई देती है। मोहन राम जैसे परिवार, जो लंबे समय तक कच्चे मकान में रहते हुए बारिश में टपकती छत और परिवार की सुरक्षा की चिंता से जूझते रहे, आज पक्के आवास के सहारे सुरक्षित जीवन की ओर बढ़ रहे हैं।
मोटू राम के लिए भी पक्का मकान बार-बार होने वाली लिपाई-पुताई और मरम्मत के खर्च से राहत का माध्यम बना है। उदयपुर क्षेत्र के हुडकू राम, बिरझु, रतन साय और छन्दू जैसे परिवारों के गृह प्रवेश में दिखाई देने वाली खुशी बताती है कि आवास किसी योजना की कागजी उपलब्धि नहीं, बल्कि परिवार के जीवन में प्रत्यक्ष बदलाव है।
एक सुरक्षित घर बच्चों को पढ़ने का वातावरण देता है, महिलाओं को अधिक सुरक्षित और निजी स्थान देता है तथा परिवार को मौसम की कठिन परिस्थितियों से बचाव का आधार देता है। इस तरह आवास योजना का प्रभाव चार दीवारों से कहीं आगे जाकर परिवार के जीवन की गुणवत्ता से जुड़ता है।
छत्तीसगढ़ राज्य, जहां शासन की सेवाएं नागरिक के द्वार तक पहुंच रही हैं
आज शासन और नागरिक के बीच दूरी कम करने में डिजिटल तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। छत्तीसगढ़ का ‘सेवा सेतु’ इसी दिशा में विकसित किया जा रहा नागरिक-केंद्रित डिजिटल मंच है। इसका उद्देश्य विशेष रूप से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों सहित नागरिकों तक सरकारी सेवाओं और योजनाओं की पहुंच आसान बनाना है। ऑनलाइन आवेदन, आवेदन की स्थिति की ट्रैकिंग, डिजिटल प्रमाणपत्र, फत् आधारित सत्यापन तथा डिजिटल माध्यम से सूचना उपलब्ध कराने जैसी सुविधाएं इस प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाने में सहायक हैं।
अम्बिकापुर की डॉली गंधर का उदाहरण बताता है कि दस्तावेज में एक छोटी-सी त्रुटि भी बैंकिंग और छात्रवृत्ति जैसी आवश्यक सुविधाओं तक पहुंच में बाधा बन सकती है। सेवा सेतु के माध्यम से समस्या का निराकरण होने पर उनके लिए आगे की प्रक्रिया आसान हुई।
इसका महत्व केवल एक दस्तावेज सुधार तक सीमित नहीं है। यह उस सोच को सामने लाता है जिसमें नागरिक को समाधान के लिए बार-बार अलग-अलग कार्यालयों में भटकने के बजाय एक व्यवस्थित सेवा तंत्र उपलब्ध कराया जा रहा है।
इसी तरह सीएम हेल्पलाइन 1076 जैसी व्यवस्था नागरिकों को अपनी समस्या शासन-प्रशासन तक पहुंचाने का माध्यम देती है। सरगुजा की छात्रा आराधना सिंह के आधार कार्ड में जन्मतिथि सुधार का मामला इसका उदाहरण है। दस्तावेज संबंधी समस्या दूर होने से उनके लिए उच्च शिक्षा और भविष्य की प्रक्रियाओं का मार्ग सुगम हुआ।
इस तरह डिजिटल सेवा और शिकायत समाधान की व्यवस्थाएं केवल तकनीकी व्यवस्था नहीं हैं वे नागरिक और शासन के बीच संवाद को मजबूत करने का माध्यम बन रही हैं।
महिला के हाथ में आर्थिक सहयोग, परिवार के भविष्य में नई उम्मीद
महिला सशक्तिकरण किसी भी समाज के समग्र विकास का महत्वपूर्ण आधार है। छत्तीसगढ़ में महतारी वंदन योजना के माध्यम से पात्र महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। हर माह मिलने वाली सहायता से महिलाएं अपनी और परिवार की प्राथमिक जरूरतों में सहयोग कर सकती हैं। बच्चों की शैक्षणिक सामग्री, पोषण, घरेलू आवश्यकताओं या छोटे स्वरोजगार से जुड़ी जरूरतों में यह सहायता उपयोगी हो सकती है।
सरगुजा की राखी की कहानी इस मानवीय पक्ष को सामने लाती है। कठिन पारिवारिक परिस्थिति के बाद दो छोटे बच्चों की जिम्मेदारी संभालते हुए वे खेती के साथ सिलाई का काम कर रही हैं और योजना से मिलने वाली सहायता का उपयोग बच्चों के पोषण तथा सिलाई सामग्री के लिए करती हैं।
यहां योजना की राशि से अधिक महत्वपूर्ण वह आर्थिक निर्णय लेने का अवसर है, जो महिला को अपने परिवार की जरूरतों के संबंध में मिलता है।
बिहान से आत्मनिर्भरता और ‘लखपति दीदी’ तक का सफर
महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता को स्थायी आधार देने में स्व-सहायता समूहों की भूमिका महत्वपूर्ण है। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के माध्यम से महिलाएं बचत, ऋण, प्रशिक्षण और विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जुड़ रही हैं।
अम्बिकापुर की कल्पना सिंह ने कृषि के लिए ऋण लेकर खीरा, बैंगन, टमाटर, तरबूज और अन्य फसलों की खेती को आगे बढ़ाया। खेती के साथ उनके भीतर बैंक, बाजार और आर्थिक गतिविधियों को लेकर आत्मविश्वास भी बढ़ा।
उदयपुर की मति बाई ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर मुर्गी पालन को व्यवसाय बनाया। कभी मजदूरी पर निर्भर रहने वाला परिवार आज अपनी आय के एक अतिरिक्त साधन के साथ आगे बढ़ रहा है।
सरगुजा में ‘छेरी बैंक’ जैसे नवाचार भी महिलाओं को पशुपालन आधारित आजीविका से जोड़ने की दिशा में प्रयास हैं, जिसमें नकद ऋण के स्थान पर बकरियां उपलब्ध कराकर मेमनों के रूप में वापसी की व्यवस्था की गई है।
‘लखपति दीदी’ की कहानियां इस बात को रेखांकित करती हैं कि जब महिला को संगठन, प्रशिक्षण, वित्तीय सहयोग और बाजार से जुड़ने का अवसर मिलता है तो वह परिवार की आय में योगदान देने के साथ स्वयं निर्णय लेने का आत्मविश्वास भी विकसित करती है। सरगुजा की मति बाई और अन्य महिलाओं की सफलता इसी बदलाव की स्थानीय तस्वीर प्रस्तुत करती है।
कुपोषण से सुपोषण तक-बचपन को वापस लाने की कोशिश
जनकल्याण का सबसे संवेदनशील पक्ष बच्चों का स्वास्थ्य है। सरगुजा के शासकीय रघुनाथ जिला चिकित्सालय, अम्बिकापुर में संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों के उपचार और पोषण पुनर्वास की दिशा में काम कर रहा है।
शिवाशी, रश्मि, प्रतीक और युवराज जैसे बच्चों के उपचार के दौरान दर्ज वजन में वृद्धि केवल आंकड़ा नहीं है। यह उपचार, पोषण और देखभाल के माध्यम से स्वास्थ्य की दिशा में आगे बढ़ने का संकेत है। हालांकि किसी बच्चे के संपूर्ण स्वास्थ्य का आकलन केवल वजन से नहीं किया जा सकता, लेकिन नियमित निगरानी और उपचार से सुधार की संभावना का यह महत्वपूर्ण संकेत जरूर है।
कुपोषण से लड़ाई अस्पताल तक सीमित नहीं रहती। बच्चे के उपचार के साथ परिवार को उचित पोषण, स्वच्छता, स्तनपान, पूरक आहार और नियमित वृद्धि निगरानी की जानकारी देना भी जरूरी है। इसलिए स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, आंगनबाड़ी और परिवार के बीच समन्वय इस प्रयास को अधिक प्रभावी बनाता है।
एक स्वस्थ बच्चा केवल बीमारी से मुक्त बच्चा नहीं होता। वह खेल सकता है, सीख सकता है, स्कूल जा सकता है और अपने सपनों को आकार देने की क्षमता विकसित कर सकता है। इसलिए सुपोषण में निवेश वास्तव में आने वाली पीढ़ी के भविष्य में निवेश है।
पशुधन से ग्रामीण परिवारों की आय को मिला आधार
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुपालन आज भी बड़ी संख्या में परिवारों की आजीविका का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जब पारंपरिक पशुपालन को वैज्ञानिक तकनीक, नस्ल सुधार, स्वास्थ्य सेवाओं और शासकीय योजनाओं का सहयोग मिलता है तो इसकी आर्थिक क्षमता बढ़ सकती है।
सीतापुर विकासखंड के दयासागर ने पशुपालन विभाग की सलाह से कृत्रिम गर्भाधान और नस्ल सुधार को अपनाया। बेहतर नस्ल, पशु पोषण और देखभाल पर ध्यान देने से उनके यहां दुग्ध उत्पादन बढ़ा और पशुपालन से नियमित आय की संभावना मजबूत हुई।
लुंड्रा के जयनाथ राम को राष्ट्रीय पशुधन मिशन के अंतर्गत बकरियां और बकरा उपलब्ध कराया गया। उन्होंने बकरी पालन को आगे बढ़ाकर इसे आय का साधन बनाया।
इस प्रकार सरकारी सहायता तभी स्थायी परिणाम का आधार बनती है जब उसके साथ हितग्राही की मेहनत, तकनीकी मार्गदर्शन और उचित प्रबंधन जुड़ता है।
अन्नदाता के खेत से समृद्धि की नई राह
ग्रामीण विकास की तस्वीर कृषि के बिना पूरी नहीं हो सकती। किसान की आय और खेती की उत्पादकता बढ़ाने के लिए सिंचाई, जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य, कृषि विविधीकरण और बाजार व्यवस्था का मजबूत होना आवश्यक है।
सरगुजा में सौर सुजला योजना के माध्यम से हजारों किसानों को सौर सिंचाई पंप का लाभ मिला है। इससे वर्षभर सिंचाई और द्विफसली तथा बहुफसली खेती की संभावनाएं बढ़ी हैं।
लबेद सिंह जैसे किसान सौर सिंचाई के आधार पर धान के साथ दलहन, तिलहन, सब्जियां, फलदार पौधे, फूल और मछली पालन जैसी गतिविधियों को जोड़ रहे हैं। यह कृषि विविधीकरण ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आय के वैकल्पिक रास्ते तैयार करने की संभावना दिखाता है।
इसी तरह मृदा परीक्षण के माध्यम से खेत की वास्तविक पोषण जरूरत समझकर उर्वरकों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देना, जल संरक्षण संरचनाओं के माध्यम से सिंचाई का आधार मजबूत करना और डबरी के जरिए खेती के साथ मछली पालन जोड़नाकृये सभी प्रयास खेती को अधिक वैज्ञानिक और विविध बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।
समाचार क्रमांक 39/2026/विशाल
अम्बिकापुर 03 अक्टूबर 2026/ कलेक्टर श्री अजीत वसंत के निर्देश पर जिले के निजी अस्पतालों में संचालित गतिविधियों लार्ज लैब के पंजीयन, लाइसेंस एवं निर्धारित व्यवस्थाओं की जांच के लिए चार सदस्यीय दल का गठन किया गया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जे.एस. सरूता के मार्गदर्शन में गठित दल द्वारा गायत्री अस्पताल, महावीर अस्पताल एवं लाइफ लाइन अस्पताल का निरीक्षण किया गया।
निरीक्षण के दौरान दल ने अस्पतालों में संचालित लार्ज लैब के लाइसेंस एवं पंजीयन संबंधी दस्तावेजों के साथ उपलब्ध व्यवस्थाओं की जांच की। महावीर अस्पताल के निरीक्षण में लार्ज लैब का लाइसेंस नहीं पाया गया। अस्पताल के पास केवल स्माल लैब संचालन का लाइसेंस उपलब्ध था। इस पर लार्ज लैब में उपयोग की जा रही मशीन को तत्काल प्रभाव से सील किया गया। अस्पताल प्रबंधन को लार्ज लैब के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन कर अनुज्ञा पत्र प्राप्त करने के निर्देश दिए गए। निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही लार्ज लैब का संचालन किया जा सकेगा।
गायत्री अस्पताल में लार्ज लैब के निरीक्षण के दौरान दस्तावेजों एवं उपलब्ध व्यवस्थाओं की जांच की गई। वहीं लाइफ लाइन अस्पताल के पास लार्ज लैब का लाइसेंस उपलब्ध पाया गया ।
कलेक्टर श्री अजीत वसंत ने जिले के निजी अस्पतालों में संचालित लार्ज लैब का निर्धारित प्रावधानों के अनुसार पंजीयन एवं लाइसेंस सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि लार्ज लैब के संचालन के लिए आवश्यक पंजीयन एवं अनुज्ञा पत्र की प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित कराया जाए तथा बिना निर्धारित अनुमति के लैब संचालन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
निरीक्षण दल में नर्सिंग होम एक्ट के नोडल अधिकारी डॉ. पी.के. सिन्हा, डॉ. दीपक गुप्ता पैथोलॉजिस्ट, श्री शिवेंद्र सिंह सदस्य तथा नर्सिंग होम एक्ट कार्यालय के शाखा प्रभारी श्री संजय पांडे शामिल रहे।









