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(अम्बिकापुर समाचार)पंखों को मिली रफ्तारः सरस्वती साइकिल योजना से बेटियों की राह हुई आसान

दूरस्थ गांवों की छात्राओं के लिए साइकिल बनी शिक्षा तक पहुंच का साधन, बढ़ा आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की राह

अम्बिकापुर 05 अक्टूबर 2026/  गांव की पगडंडियों से गुजरती बेटियों के लिए स्कूल तक पहुंचना कभी आसान नहीं था। घर से विद्यालय की दूरी, आने-जाने में लगने वाला समय, मौसम की चुनौतियां और कई बार परिवहन के साधनों का अभाव उनकी पढ़ाई के रास्ते में बाधा बनते थे। खासकर दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों की छात्राओं के लिए विद्यालय तक पहुंचना रोज की चुनौती थी। ऐसे में सरस्वती साइकिल वितरण योजना ने उनकी राह को आसान बनाने के साथ शिक्षा के प्रति उनके सपनों को भी नई गति दी है।

साइकिल नहीं, शिक्षा तक पहुंच का माध्यम है योजना

छत्तीसगढ़ शासन की निःशुल्क सरस्वती साइकिल योजना का मूल उद्देश्य बालिकाओं को विद्यालय आने-जाने में सुविधा प्रदान करना और उन्हें शिक्षा से जोड़े रखना है। शासन द्वारा कक्षा 9वीं में अध्ययनरत पात्र छात्राओं को स्कूल आवागमन की सुविधा तथा बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए इस योजना के द्वारा बालिकाओं को लाभान्वित किया जाता है।
योजना के अंतर्गत पात्र छात्राओं को निःशुल्क साइकिल उपलब्ध कराई जाती है। इसका विशेष महत्व उन छात्राओं के लिए है, जिनके गांव और विद्यालय के बीच पर्याप्त दूरी है और जिनके लिए प्रतिदिन पैदल आना-जाना समय और श्रम दोनों की दृष्टि से कठिन होता है।
इस योजना के पीछे केवल आवागमन की समस्या को दूर करने की सोच नहीं है, बल्कि इसका व्यापक उद्देश्य बालिकाओं को विद्यालय तक पहुंचाना, उनकी शिक्षा जारी रखने के लिए अनुकूल वातावरण बनाना और उन्हें भविष्य के बेहतर अवसरों से जोड़ना है।

दूरी कम हुई तो स्कूल पहुंचना हुआ आसान
दूरस्थ गांवों की अनेक छात्राओं को पहले कई किलोमीटर की दूरी पैदल तय करनी पड़ती थी। आने-जाने में लगने वाला अतिरिक्त समय उनकी पढ़ाई और घरेलू जिम्मेदारियों दोनों को प्रभावित करता था। गर्मी, बारिश और ठंड के मौसम में कठिनाई और बढ़ जाती थी।
साइकिल मिलने के बाद यही दूरी कम समय में तय करना संभव हुआ है। छात्राएं समय पर विद्यालय पहुंच पा रही हैं और स्कूल से घर लौटने में भी कम समय लग रहा है। इससे उनके लिए पढ़ाई के साथ अन्य जरूरी कार्यों के लिए भी समय बच रहा है।

बेटियों के आत्मविश्वास को मिली नई ताकत

साइकिल केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि आत्मविश्वास का माध्यम भी बन रही है। पहले जो छात्राएं पैदल या किसी परिजन के सहारे विद्यालय पहुंचती थीं, वे अब स्वयं साइकिल चलाकर स्कूल जा रही हैं। यह बदलाव बालिका सशक्तिकरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। अपने रोजमर्रा के आवागमन को स्वयं संभालना छात्राओं में आत्मविश्वास और निर्णय क्षमता को मजबूत करता है। उन्हें यह अनुभव होता है कि वे अपनी राह खुद तय कर सकती हैं और अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए आगे बढ़ सकती हैं।

’बालिका शिक्षा को मिल रहा मजबूत आधार’
किसी भी समाज की प्रगति में बालिका शिक्षा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। विद्यालय तक पहुंच आसान होने से बालिकाओं के लिए शिक्षा जारी रखना अधिक सुविधाजनक होता है।
सरस्वती साइकिल योजना इसी आवश्यकता को पूरा करती है। विशेषकर उन क्षेत्रों में, जहां स्कूल दूर हैं और सार्वजनिक परिवहन की सुविधा सीमित है, वहां साइकिल छात्राओं के लिए विद्यालय तक पहुंच का व्यक्तिगत साधन बन जाती है। इसका असर केवल एक शैक्षणिक वर्ष तक सीमित नहीं रहता। विद्यालय से जुड़ी रहने वाली बालिका आगे उच्च शिक्षा की ओर बढ़ सकती है और अपने लिए रोजगार एवं आत्मनिर्भरता के नए रास्ते खोल सकती है।

’एक शिक्षित बेटी, पूरे परिवार की ताकत’
एक बालिका की शिक्षा का प्रभाव उसके व्यक्तिगत जीवन से कहीं आगे तक जाता है। जब वही बालिका आगे चलकर शिक्षित महिला बनती है तो वह परिवार के स्वास्थ्य, बच्चों की शिक्षा, पोषण, स्वच्छता और आर्थिक निर्णयों को बेहतर ढंग से समझने और संभालने में सक्षम होती है। शिक्षित महिला अपने बच्चों की शिक्षा को लेकर अधिक जागरूक होती है। इस तरह एक बेटी को स्कूल तक पहुंचाने की पहल आने वाली पीढ़ियों को शिक्षित करने की मजबूत नींव बन सकती है। यानी आज साइकिल से स्कूल पहुंच रही बेटी, कल अपने परिवार की दिशा और दशा बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

’शिक्षा बढ़ेगी तो बाल विवाह जैसी कुरीतियां होंगी कमजोर’
बालिका शिक्षा का एक महत्वपूर्ण सामाजिक प्रभाव बाल विवाह जैसी कुरीतियों को रोकने में दिखाई देता है। जब बेटियां लगातार विद्यालय से जुड़ी रहती हैं और आगे की पढ़ाई के लक्ष्य निर्धारित करती हैं, तो उनके जीवन में शिक्षा और भविष्य की प्राथमिकता मजबूत होती है। शिक्षा बालिकाओं को उनके अधिकारों, अवसरों और कानूनी प्रावधानों के प्रति जागरूक करती है। इससे वे अपने जीवन से जुड़े निर्णयों में अधिक सक्षम बनती हैं। इस दृष्टि से विद्यालय तक पहुंच सुनिश्चित करना केवल शिक्षा का विषय नहीं, बल्कि बालिकाओं के सुरक्षित, सम्मानजनक और आत्मनिर्भर भविष्य से जुड़ा विषय है।

सरस्वती साइकिल योजना से लाभान्वित होने वाली
शासकीय हाई स्कूल सेदम, विकासखंड बतौली की छात्राएं रजनी एक्का, गायत्री यादव, सोनिया, रजनी साहू तथा नीतू यादव ने बताया कि सरस्वती साइकिल योजना से विद्यालय तक आने-जाने में उन्हें काफी सुविधा मिली है। पहले स्कूल आने के लिए पैदल चलना पड़ता था, जिससे अधिक समय और श्रम लगता था। खासकर गर्मी, बारिश और ठंड के मौसम में विद्यालय तक पहुंचना कठिन हो जाता था। साइकिल मिलने के बाद अब वे कम समय में स्कूल पहुंच पा रही हैं और किसी पर निर्भर रहने की जरूरत भी नहीं पड़ती। इससे विद्यालय में समय पर पहुंचने और नियमित रूप से पढ़ाई करने में मदद मिल रही है। छात्राओं ने बताया कि साइकिल से आने-जाने में समय की बचत होने के कारण पढ़ाई के लिए अतिरिक्त समय मिलता है तथा घर के जरूरी कामों और पढ़ाई के बीच बेहतर तालमेल बनाने में भी आसानी होती है।
छात्राओं ने कहा कि उनके लिए साइकिल केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि शिक्षा, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ने का माध्यम बन गई है। स्वयं साइकिल चलाकर विद्यालय आने से उनमें अपने फैसले खुद लेने और अपनी राह खुद तय करने का आत्मविश्वास बढ़ा है। उन्होंने कहा कि स्कूल तक पहुंच आसान होने से पढ़ाई जारी रखने का उत्साह बढ़ा है और वे आगे भी मन लगाकर पढ़ाई कर उच्च शिक्षा हासिल करना चाहती हैं। छात्राओं के अनुसार, सरस्वती साइकिल योजना ने ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों के लिए शिक्षा की राह को आसान बनाया है और उन्हें अपने भविष्य के सपनों को पूरा करने के लिए आगे बढ़ने का अवसर दिया है।

 

 
 
दो कमरों से शुरुआत, आज सूकर पालन से 11 लाख रुपये का शुद्ध लाभ
सरकारी योजना और विभागीय मार्गदर्शन से अनिल कुमार खेस ने बनाया सफल व्यवसाय

अम्बिकापुर 05 अक्टूबर 2026/  पशुधन विकास विभाग की सूकर प्रदाय योजना से मिले सहयोग और अपनी मेहनत के बल पर ग्राम शिवनाथपुर निवासी अनिल कुमार खेस्स ने सूकर पालन को सफल स्वरोजगार का माध्यम बना लिया है। वर्ष 2018 में योजना के तहत प्राप्त एक यूनिट से उन्होंने महज दो कमरों में सूकर पालन शुरू किया। शुरुआती वर्षों में चुनौतियों के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी और व्यवसाय से होने वाली आय को दोबारा निवेश कर फार्म का विस्तार किया। आज उनके फार्म में करीब 150 सूकर हैं और उन्होंने 10 अतिरिक्त कमरे भी बनाए हैं। अनिल बताते हैं कि पशुधन विकास विभाग के चिकित्सकों से उन्हें सूकरों के खान-पान, शेड प्रबंधन, प्रजनन, टीकाकरण और उपचार संबंधी लगातार मार्गदर्शन मिला। फार्म में प्रजनन के लिए अलग व्यवस्था के साथ बच्चों की वीनिंग और कमजोर बच्चों की विशेष देखभाल की जाती है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में उन्होंने लगभग 14.5 से 15 लाख रुपये की बिक्री की, जिसमें करीब 11 लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ।

अनिल कुमार खेस्स पशुधन विकास विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहते हैं कि विभाग से मिले सहयोग और चिकित्सकीय मार्गदर्शन ने उन्हें इस व्यवसाय को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण सहायता दी। उनकी सफलता ग्रामीण क्षेत्र के अन्य पशुपालकों के लिए भी प्रेरणा है कि सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर, विशेषज्ञों की सलाह अपनाकर और निरंतर मेहनत के साथ पशुपालन को सफल एवं लाभकारी स्वरोजगार में बदला जा सकता है।

 
स्वयं सहायता समूह से जुड़कर बदली सूरजपति की जिंदगी
समूह से ऋण लेकर शुरू किया किराना दुकान, सालाना लाखों में हो रही कमाई

अम्बिकापुर 05 अक्टूबर 2026/  राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़कर उनकी आजीविका और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। इसी कड़ी में आर्थिक कठिनाइयों और सीमित आय के बीच जीवन यापन करने वाली विकासखंड बतौली के ग्राम पंचायत तारागी की श्रीमती सूरजपति ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भरता की नई राह बनाई है। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आर्थिक सहयोग मिला, जिसका उपयोग उन्होंने किराना दुकान व्यवसाय शुरू करने में किया। आज उनके प्रयासों से परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है। सूरजपति बताती हैं कि समूह के माध्यम से उन्हें 60 हजार रुपए का ऋण प्राप्त हुआ। उन्होंने ऋण की राशि एवं स्वयं की कुछ पूंजी लगाकर आजीविका गतिविधि शुरू की। उन्होंने किराना दुकान का व्यवसाय प्रारंभ किया, मेहनत और निरंतर प्रयास से उनके व्यवसाय में धीरे-धीरे सुधार आया। वर्तमान में उन्हें प्रतिवर्ष लगभग 2 लाख तक कि आय हो रही है। उन्होंने बताया कि मेरी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ और आत्मविश्वास भी बढ़ गया है, अब मैं अपने परिवार की आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से पूरा करने में सक्षम हूं। मेरे लिए स्वयं सहायता समूह केवल आर्थिक सहयोग का माध्यम ही नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का महत्वपूर्ण जरिया साबित हुआ है।सूरजपति की सफलता ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है।

सेवा की कहानीः इलाज के खर्च की चिंता हुई कम, आयुष्मान कार्ड से विजय पंडो के परिवार को मिला स्वास्थ्य सुरक्षा का संबल
आर्थिक तंगी के कारण उपचार में आती थी परेशानी, अब पांच लाख रुपए तक निःशुल्क इलाज की सुविधा’
विजय के साथ बेटियों भारती और आरती का भी बना आयुष्मान कार्ड

अम्बिकापुर 05 अक्टूबर 2026/   बीमारी के समय उपचार के खर्च की चिंता आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बड़ी परेशानी बन जाती है। लखनपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत लोसंगी के पंडरीपानी निवासी विजय कुमार पंडो का परिवार भी पहले इसी समस्या का सामना कर रहा था। आयुष्मान कार्ड नहीं होने और आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण जरूरत के समय बेहतर उपचार कराने में कठिनाई होती थी। अब विजय कुमार पंडो के साथ उनकी बेटियों भारती पंडो और आरती पंडो का भी आयुष्मान कार्ड बन गया है, जिससे परिवार को पांच लाख रुपए तक निःशुल्क उपचार की सुविधा मिल सकेगी।

विजय कुमार पंडो बताते हैं कि पहले परिवार के पास आयुष्मान कार्ड नहीं था। परिवार में किसी सदस्य के बीमार होने पर अस्पताल में इलाज का खर्च स्वयं वहन करना पड़ता था। आर्थिक संसाधन सीमित होने के कारण उपचार कराने में परेशानी आती थी। कई बार पैसे की कमी बेहतर इलाज की राह में बाधा बनती थी।

’बेटियों को भी मिला स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ’
विजय के लिए यह सुविधा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उनके साथ उनकी दोनों बेटियों भारती और आरती का भी आयुष्मान कार्ड बनाया गया है। अब बीमारी अथवा उपचार की आवश्यकता होने पर परिवार को इलाज के खर्च को लेकर पहले जैसी चिंता नहीं रहेगी। आयुष्मान कार्ड के माध्यम से पात्रता अनुसार पांच लाख रुपए तक निःशुल्क उपचार की सुविधा परिवार के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा का आधार बनेगी।

आयुष्मान कार्ड मिलने पर खुशी जाहिर करते हुए विजय कुमार पंडो बताते हैं कि आर्थिक कमी के कारण पहले अस्पताल में ठीक ढंग से इलाज कराने में दिक्कत होती थी। अब कार्ड बनने से परिवार को उपचार में बड़ी सहायता मिलेगी।

विजय कुमार पंडो ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आयुष्मान कार्ड से परिवार को स्वास्थ्य सुरक्षा मिली है।

सेवा की कहानीः फौती नामांतरण के लिए नहीं लगाना पड़ा बार-बार चक्कर, शिविर में शैलेंद्र का काम हुआ पूरा
पिता के निधन के बाद फौती दर्ज कराने दिया था आवेदन, दरिमा में आयोजित शिविर में हुआ त्वरित निराकरण

अम्बिकापुर 05 अक्टूबर 2026/   आमजनों को राजस्व संबंधी सेवाएं सहज रूप से उपलब्ध कराने की दिशा में आयोजित शिविर ग्राम बरगई निवासी शैलेंद्र सिंह के लिए राहत लेकर आया। पिता के निधन के बाद फौती नामांतरण के लिए उन्होंने संबंधित पटवारी को आवेदन दिया था। सेवा संकल्प अभियान अंतर्गत दरिमा में आयोजित सेवा सेतु शिविर के माध्यम से उनका प्रकरण शीघ्र पूरा हो गया, जिससे उन्हें अनावश्यक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।

तहसील दरिमा अंतर्गत ग्राम बरगई निवासी शैलेंद्र सिंह बताते हैं कि पिता के निधन के बाद राजस्व अभिलेख में फौती दर्ज कराने के लिए उन्होंने पटवारी को आवश्यक दस्तावेज दिए थे। दरिमा में शिविर आयोजित होने पर उनके प्रकरण पर कार्रवाई करते हुए कार्य शीघ्र पूरा कर दिया गया।

शैलेंद्र ने बताया कि शिविर में ही कार्य हो जाने से उन्हें बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ी। प्रकरण के त्वरित निराकरण से समय और परेशानी दोनों की बचत हुई।

शैलेंद्र सिंह ने कहा, “पिताजी के निधन के बाद फौती उतरवाने के लिए पटवारी को दिया था। दरिमा में शिविर लगने से मेरा काम जल्दी पूरा हो गया और मुझे ज्यादा परेशानी नहीं हुई। मैं इस व्यवस्था से संतुष्ट हूं।”

शैलेंद्र सिंह ने प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शिविर के माध्यम से राजस्व संबंधी कार्य का शीघ्र निराकरण हुआ।

 
सेवा ज्योति यात्रा 07 अक्टूबर को
कार्यक्रम के सफल संचालन हेतु अधिकारियों को सौंपे गए दायित्व

अम्बिकापुर 05 अक्टूबर 2026/  जिले में 07 अक्टूबर 2026 को सेवा ज्योति यात्रा, विकसित भारत संकल्प सभा का आयोजन अम्बिकापुर के कला केन्द्र मैदान में किया जाना है। कार्यक्रम के सफलतापूर्वक संचालन हेतु जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी  सुश्री रोमा श्रीवास्तव को सम्पूर्ण कार्यक्रम के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। वहीं कार्यक्रम के सफल संचालन हेतु अधिकारियों को दायित्व सौंपे गए हैं।

जिसमें पुलिस अधीक्षक सरगुजा को कार्यक्रम स्थल एवं मार्ग पर समुचित सुरक्षा यातायात एवं पार्किंग व्यवस्था, वनमंडलाधिकारी को बेरिकेटिंग हेतु बांस बल्ली की व्यवस्था, जिला सत्कार अधिकारी को मंच में बैठक व्यवस्था, अरितक्त जिला दण्डाधिकारी को संपूर्ण कार्यक्रम हेतु कार्यपालिक मजिस्ट्रेट की ड्यूटी लगाना एवं अन्य आवश्यक समन्वय हेतु, आयुक्त नगर पालिक निगम अम्बिकापुर को कार्यक्रम स्थल की साफ-सफाई एवं अन्य आवश्यक व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसी प्रकार मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को सेवा ज्योति यात्रा के दौरान उपचार किट एवं एम्बुलेंस की व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कार्यपालन अभियंता लो.नि.वि. (भ/स), कार्यपालन अभियंता प्र.मं.ग्रा.स.यो., कार्यपालन अभियंता ग्रा.यां.सेवा. को मंच बैरकेटिंग एवं आंगतुकों के बैठक की सम्पूर्ण मंचीय व्यवस्था तथा अुनविभागीय अधिकारी लो.नि.वि. (वि/यां) को कार्यक्रम स्थल पर निर्बाध विद्युत हेतु डीजी सेट की व्यवस्था की जिम्मेदारी दी गई है। कार्यपालन अभियंता छ.ग.रा.वि.वि.क. लिमिटेड को कार्यक्रम स्थल पर बिजली माईक, साउण्ड, एलईडी स्क्रीन व वीसी हेतु कैमरे एवं इंटरनेट उपलब्ध कराने की संपूर्ण व्यवस्था का दायित्व सौंपा गया है।  कार्यपालन अभियंता लो स्वा.या. विभाग को सेवा संकल्प कार्यक्रम के प्रारंभ एवं समापन स्थल पर पेयजल की व्यवस्था, जिला शिक्षा अधिकारी को कार्यक्रम स्थल पर उद्बोधन की व्यवस्था, जिला नगर सेनानी एवं जिला अग्निशमन अधिकारी नगर सेना को सेवा ज्योति यात्रा के दौरान अग्निशमन वाहन एवं फायर सेफ्टी किट की व्यवस्था, खाद्य अधिकारी एवं आबकारी अधिकारी को कार्यक्रम स्थल पर अतिथियों के स्वल्पाहार की व्यवस्था, क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी को सेवा ज्योति यात्रा के दौरान वाहन एवं ज्योति की स्टैंडर्ड डिजाईन केन्द्रीय स्तर से प्राप्त होने पर उपयुक्त वाहन में नियमानुसार डिजाईन के अनुरूप हल्का मालयान, सहायक संचालक उद्यानिकी विभाग व सहायक संचालक मत्स्य विभाग को कार्यक्रम स्थल पर अतिथियों के स्वागत हेतु फूलों की व्यवस्था, सहायक संचालक जनसम्पर्क विभाग को सेवा  फोटो और वीडियो की व्यवस्था एवं समस्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत व मुख्य कार्यपालन अधिकारी नगर पंचायत सीतापुर/लखनपुर को स्थानीय स्तर पर सेवा ज्योति  यात्रा कार्यक्रम हेतु लोगों के जुडने के लिए समुचित व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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