
अम्बिकापुर 06 अक्टूबर 2026/ पिता के निधन के बाद राजस्व अभिलेखों में फौती नामांतरण के लिए आवेदन करने वाले श्री मनमोहन सिंह की समस्या का समाधान सेवा सेतु शिविर में हो गया। दरिमा तहसील में आयोजित शिविर में उनके आवेदन का निराकरण करते हुए फौती नामांतरण की प्रक्रिया पूरी की गई। काम पूरा होने पर मनमोहन सिंह ने संतुष्टि जताई।
मनमोहन सिंह ने बताया कि उनके पिता के निधन के बाद उन्होंने फौती नामांतरण के लिए आवेदन किया था। दरिमा तहसील में सेवा सेतु शिविर आयोजित होने पर उनके प्रकरण पर कार्रवाई हुई और नामांतरण का काम पूरा हो गया।
मनमोहन सिंह ने खुशी जाहिर करते हुए कहा, मेरे पिताजी का निधन हो गया था, जिसके बाद मैंने फौती नामांतरण के लिए आवेदन लगाया था। शिविर में मेरा फौती नामांतरण हो गया है। मैं संतुष्ट हूं।
’लंबित राजस्व कार्य के निराकरण से मिली राहत’
सेवा संकल्प अभियान अंतर्गत मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देशन में जिले में जनपद एवं तहसील स्तर पर सेवा सेतु शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। जिसमें ग्रामीणों की समस्या का समाधान मौके पर करने का प्रयास किया जा रहा है। फौती नामांतरण की प्रक्रिया पूरी होने से मनमोहन सिंह की राजस्व संबंधी समस्या का समाधान हुआ। सेवा सेतु शिविर के माध्यम से आवेदन के निराकरण की सुविधा मिलने पर उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की।
मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति धन्यवाद व्यक्त करते हुए कहा कि सेवा सेतु शिविर के माध्यम से लोगों की समस्या का निराकरण हो रहा है।
अम्बिकापुर 06 अक्टूबर 2026/ घुनघुट्टा जलाशय से जुड़कर ग्राम कलगसा के मछुआ परिवारों को आजीविका का साधन मिला है। आदिवासी मछुआ सहकारी समिति कलगसा के 381 सदस्य जलाशय में मत्स्य पालन एवं मछली पकड़कर अपना जीवन-यापन कर रहे हैं। समिति को घुनघुट्टा जलाशय 10 वर्ष के लिए पट्टे पर मिला है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत मछली बीज के लिए मिलने वाली अनुदान सहायता से समिति को मत्स्य उत्पादन में भी सहयोग मिल रहा है।
आदिवासी मछुआ सहकारी समिति कलगसा के अध्यक्ष श्री राम बिलोच राम बताते हैं कि समिति में कुल 381 सदस्य जुड़े हुए हैं। समिति को घुनघुट्टा जलाशय में मत्स्य पालन के लिए 10 वर्ष का पट्टा मिला है। जलाशय से जुड़ने के बाद समिति के सदस्यों को स्थानीय स्तर पर ही आजीविका का साधन उपलब्ध हुआ है। सदस्य यहां मछली पकड़कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं।
’मछली बीज के लिए मिल रही अनुदान सहायता’
श्री राम बिलोच राम ने बताया कि मत्स्य पालन के लिए समिति को मछली बीज हेतु शासन से अनुदान सहायता मिलती है। उन्होंने बताया कि मछली बीज के लिए 7 लाख 62 हजार रुपये की सहायता अनुदान के माध्यम से प्राप्त होती है। इससे जलाशय में मछली बीज डालकर मत्स्य पालन गतिविधियों को आगे बढ़ाने में सहयोग मिल रहा है।
जलाशय में मत्स्य पालन से समिति के सदस्यों के लिए पूरे वर्ष आजीविका की गतिविधि बनी रहती है। इससे होने वाली आय परिवार की दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायक बन रही है।
’मत्स्य पालन से बढ़ी आमदनी’
समिति अध्यक्ष के बताते हैं कि मत्स्य पालन से जुड़ने के बाद सदस्यों को अच्छी आमदनी हो रही है। खर्चों के बाद लगभग 50 हजार रुपये से एक लाख रुपये तक की राशि बचने की बात उन्होंने कही। इससे मछुआ परिवारों को आजीविका का स्थायी आधार मिला है।
श्री राम बिलोच राम ने कहा कि घुनघुट्टा जलाशय का पट्टा मिलने और मत्स्य पालन के लिए सहायता मिलने से समिति के सदस्यों को रोजगार एवं आय का साधन मिला है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के माध्यम से मत्स्य पालन से जुड़े समूहों को प्रोत्साहन मिलने से जल संसाधनों का उपयोग आजीविका संवर्धन के लिए हो रहा है। घुनघुट्टा जलाशय से जुड़े आदिवासी मछुआ सहकारी समिति कलगसा के 381 सदस्यों के लिए मत्स्य पालन परिवार की आय और जीवन-यापन का महत्वपूर्ण आधार बना है।









