
Rahul Gandhi SIR Petition: कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्ष के अन्य नेताओं की ओर से चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में कई कमियां सामने आई हैं. सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने इस याचिका पर 14 आपत्तियां दर्ज की हैं. इनमें जरूरी दस्तावेजों की कमी, कुछ पक्षकारों को लेकर स्पष्टीकरण और 220 रुपये की फीस कम जमा होने जैसे मामले शामिल हैं. सभी आपत्तियां याचिका दाखिल करने की प्रक्रिया से जुड़ी हैं.
12 अक्टूबर को दाखिल हुई थी याचिका
राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने सोमवार (12 अक्तूबर) को चुनाव आयोग के खिलाफ संयुक्त रिट याचिका दाखिल की थी. उसी दिन विपक्षी नेताओं ने दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च भी किया था. याचिका एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड एस. प्रसन्ना के माध्यम से दाखिल की गई है.
इस मामले को राहुल गांधी बनाम भारत निर्वाचन आयोग के नाम से दर्ज किया गया है. इसका डायरी नंबर 64196/2026 है. याचिका में भारत निर्वाचन आयोग (ECI), मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी को प्रतिवादी बनाया गया है.
राहुल गांधी की SIR याचिका में सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने बताईं ये 14 कमियां
राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं की ओर से चुनाव आयोग के खिलाफ दाखिल याचिका में की रजिस्ट्री ने 14 कमियां बताई हैं. इनमें जरूरी दस्तावेजों का नहीं होना, कुछ जानकारियों का गलत दर्ज होना और कोर्ट फीस में 220 रुपये की कमी शामिल है. लॉ चक्र के मुताबिक रजिस्ट्री ने सोमवार (12 अक्तूबर) को ये आपत्तियां दर्ज की हैं.
जानिए याचिका में कौन-कौन सी 14 कमियां मिलीं
- प्रतिवादी का नाम गलत: याचिका की लिस्टिंग के लिए दिए गए फॉर्म में प्रतिवादी का नाम ठीक करने को कहा गया है.
- पक्षकारों की जानकारी में गलती: याचिका के पेज नंबर 9 पर प्रतिवादियों की जानकारी सही नहीं है.
- निजी लोगों को पक्षकार बनाने पर सवाल: रजिस्ट्री ने पूछा है कि इस याचिका में निजी लोगों को प्रतिवादी क्यों बनाया गया है. इसका कारण स्पष्ट करना होगा.
- पहले की याचिका से जुड़ी जानकारी नहीं: याचिका में वह जरूरी पैराग्राफ नहीं है, जिसमें पहले दाखिल समान मामलों से संबंधित जानकारी दी जाती है.
- मांग वाले हिस्से में गलत नंबर: याचिका में अदालत से जो राहत मांगी गई है, उस हिस्से में प्रतिवादी का नंबर गलत है. इसे सुधारना होगा.
- पुराने फैसले की कॉपी नहीं: याचिका में 24 जून 2025 के जिस फैसले का जिक्र किया गया है, उसकी कॉपी संलग्न नहीं है.
- दस्तावेज की तारीख में अंतर: याचिका के साथ लगाए गए अनुबंध P2 की तारीख मेल नहीं खा रही है.
- दो पन्नों की रंगीन कॉपी जरूरी: पेज नंबर 57 और 64 की रंगीन प्रतियां जमा करने को कहा गया है.
- केस नंबर में गड़बड़ी: अनुबंध P5 में दर्ज मामले का नंबर संबंधित जानकारी से मेल नहीं खा रहा है.
- पेन ड्राइव जमा करनी होगी: अनुबंध P6 से जुड़ी सामग्री पेन ड्राइव में उपलब्ध कराने को कहा गया है.
- नौ याचिकाकर्ताओं के वकालतनामे नहीं: याचिकाकर्ता संख्या 3 से 11 तक के वकालतनामे जमा नहीं किए गए हैं. ये दस्तावेज वकील को अदालत में पैरवी करने की अनुमति देते हैं.
- मल्लिकार्जुन खरगे का पहचान पत्र स्पष्ट नहीं: याचिकाकर्ता संख्या 2 कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के पहचान पत्र की साफ कॉपी मांगी गई है.
- 220 रुपये की फीस कम: रजिस्ट्री ने बताया है कि निर्धारित कोर्ट फीस में 220 रुपये और जमा करने होंगे.
- दस्तावेजों की छपाई और पेज नंबर में कमियां: कुछ पन्नों की लिखावट हल्की है, कुछ का फॉन्ट छोटा है और कुछ दस्तावेज पढ़ने में स्पष्ट नहीं हैं.
SIR पर रोक लगाने की मांग
याचिका में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया गया है. विपक्षी नेता इन आरोपों को वोट चोरी का नाम दे रहे हैं. याचिकाकर्ताओं ने चुनाव आयोग से संबंधित रिकॉर्ड अदालत में पेश कराने की मांग की है. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक समिति बनाने का अनुरोध किया गया है, जो SIR के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए नामों की जांच करे. विपक्षी नेताओं ने सभी राज्यों में SIR की प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाने की मांग भी की है.
सुप्रीम कोर्ट में कब होगी सुनवाई?
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस याचिका की सुनवाई के लिए किसी पीठ का गठन नहीं किया गया है और न ही सुनवाई की तारीख तय हुई है. चुनाव आयोग और अन्य प्रतिवादियों का जवाब भी आना बाकी है.






