
बीजापुर में 13 हितग्राहियों को स्वस्थ डिम्ब समूह वितरण के साथ मिली आर्थिक सहायता*
रायपुर, 27 अक्टूबर 2026/ वनांचल क्षेत्रों में तसर रेशम (कोसा) पालन ग्रामीण परिवारों की आजीविका और स्वरोजगार का एक प्रमुख जरिया बनता जा रहा है। इस व्यवसाय से आदिवासियों और ग्रामीण महिलाओं को गांव में ही रोजगार मिल रहा है, जिससे उन्हें रोजगार के लिए भटकना नहीं पड़ता।
*गुणवत्तापूर्ण कोसा उत्पादन कर आय अर्जित करने का मिल रहा है अवसर*
बीजापुर जिले में तसर रेशम पालन से जुड़े ग्रामीण परिवारों की आमदनी बढ़ाने के लिए रेशम विभाग द्वारा आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इसी कड़ी में ग्राम कोत्तापल्ली के 13 तसर पालकों को स्वस्थ डिम्ब समूह वितरण योजना के तहत 3,700 स्वस्थ डिम्ब समूह उपलब्ध कराए गए हैं। इनकी कुल कीमत 59 हजार 200 रुपए है, जिसमें शासन ने 51 हजार 800 रुपए की सब्सिडी दी है। इससे तसर पालकों को कम लागत में गुणवत्तापूर्ण कोसा उत्पादन कर अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर मिलेगा।
*ग्रामीणों को वैज्ञानिक पद्धति से कृमिपालन करने में मिल रही है मदद*
ग्राम कोत्तापल्ली स्थित शासकीय कोसा बीज केंद्र से जुड़े तसर पालकों को केंद्रीय रेशम बोर्ड की इकाई बीएसएमटीसी, बस्तर से प्राप्त पालित प्रजाति के स्वस्थ डिम्ब समूह वितरित किए गए हैं। शासन की ओर से अधिकांश लागत वहन किए जाने के कारण हितग्राहियों को कुल 7 हजार 400 रुपए का ही अंशदान करना पड़ा। इस सहायता से तसर पालन की शुरुआती लागत कम होने के साथ ग्रामीणों को वैज्ञानिक पद्धति से कृमिपालन करने में भी मदद मिलेगी। योजना से लाभान्वित हितग्राहियों में 13 तसर पालक शामिल हैं। स्वस्थ डिम्ब समूहों के उपयोग से बेहतर गुणवत्ता के कोसा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे ग्रामीण परिवारों को अपनी आजीविका मजबूत करने में सहायता मिलेगी।









