
अम्बिकापुर 27 अक्टूबर 2026/ मौसम विभाग से प्राप्त पूर्वानुमान के अनुसार 27 से 29 अक्टूबर तक छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों में आंधी-तूफान, तेज हवाओं, गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना है। कुछ स्थानों पर भारी वर्षा और आकाशीय बिजली गिरने की भी आशंका जताई गई है। इसे देखते हुए अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) सीतापुर ने अनुविभाग क्षेत्र के नागरिकों से सतर्कता बरतने और आवश्यक सावधानियां अपनाने की अपील की है।
गरज-चमक के दौरान खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे न रुकें
प्रशासन ने विशेष रूप से किसानों, ग्रामीणों, विद्यार्थियों, पशुपालकों और खुले स्थानों पर कार्य करने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी है। आंधी-तूफान और गरज-चमक के दौरान अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलने तथा पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों को जंगलों में नहीं जाने की अपील की गई है। नागरिकों को नदी-नालों के किनारे आवागमन से बचने और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका के दौरान पेड़ों के नीचे शरण नहीं लेने की सलाह दी गई है।
पशुपालकों से अपने पशुओं को पेड़ों के नीचे नहीं बांधने तथा सुरक्षित स्थानों पर रखने की अपील की गई है। साथ ही बिजली के खंभों, विद्युत तारों और कमजोर एवं जर्जर भवनों से दूर रहने को कहा गया है।
किसानों को फसल सुरक्षित रखने और जल निकासी की व्यवस्था करने की सलाह
भारी वर्षा की संभावना को देखते हुए किसानों को मौसम की स्थिति के अनुसार तैयार फसलों की कटाई शीघ्र पूरी करने तथा कटी हुई उपज को सुरक्षित स्थानों पर रखने की सलाह दी गई है। सब्जी एवं फल उत्पादक किसानों को खेतों में जलभराव रोकने के लिए जल निकासी की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।
अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) सीतापुर ने नागरिकों से अपील की है कि वे मौसम विभाग की चेतावनियों पर ध्यान दें और प्रशासन द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें, ताकि संभावित जन-धन हानि से बचा जा सके।
अम्बिकापुर 27 अक्टूबर 2026/ मौसम विज्ञान विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवाती तूफान के प्रभाव से सरगुजा जिले में आगामी दिनों (विशेषकर 27 से 29 अक्टूबर) में वर्षा एवं तेज हवाएं चलने की संभावना है। इसे ध्यान में रखते हुए उप संचालक कृषि द्वारा जिले के सभी किसान भाईयों और बहनों को अपनी फसलों और पशुओं की सुरक्षा के लिए आपातकालीन सुझाव दिए गए हैं।
खड़ी एवं कटी फसलों के लिए महत्वपूर्ण सलाह-
उन्होंने बताया कि कटाई कार्य तुरंत रोकें, यदि आपकी धान, दलहन या तिलहन की फसल पक चुकी है, तो आने वाले 2 से 4 दिनों तक फसलों की कटाई बिल्कुल न करें। कटी फसल को सुरक्षित करने के लिए जिन किसानों ने फसलों की कटाई कर ली है, वे कटी हुई फसल या खलिहान में रखी उपज को शीघ्र अतिशीघ्र तिरपाल से ढंककर किसी सुरक्षित व ऊंचे स्थान पर ले जाएं। जल निकासी की व्यवस्था के लिए भारी वर्षा की संभावना को देखते हुए अपने खेतों से अतिरिक्त पानी की निकासी के लिए नालियां तुरंत साफ कर लें ताकि खेतों में पानी न भरे। बुवाई का कार्य टालें तथा जो किसान उतेरा फसल के रूप में तिवरा या अलसी की बुवाई करना चाहते हैं, वे अभी कुछ दिनों के लिए इसे रोक दें। रबी फसलों की बुवाई नवंबर के प्रथम सप्ताह से मौसम साफ होने पर ही शुरू करें।
सब्जियों एवं फलदार पौधों का बचाव –
अनिवार्य तेज हवाओं के कारण लता वाली सब्जियों (जैसे करेला, लौकी, कद्दूवर्गीय फसलें) को नुकसान पहुंच सकता है, इसलिए इन्हें बांस या डंडों से सहारा दें। केले के जिन पौधों में फूल या फल आ चुके हैं, उन्हें तेज हवा से टूटने से बचाने के लिए बांस की खप्पचियों का सहारा दें। फूलगोभी, ब्रोकली, चुकन्दर, पछेती खीरा और पछेती करेला आदि रबी सब्जियों की बुवाई का कार्य नवंबर के प्रथम सप्ताह से ही शुरू करें।
पशुधन एवं स्वयं की सुरक्षा-
आने वाले दिनों में बारिश और तेज हवा को देखते हुए पशुओं को किसी खुले स्थान पर बांधने के बजाय सूखे, पक्के और सुरक्षित छांव वाले स्थान पर रखें। वज्रपात (आकाशीय बिजली) से बचाव के लिए मौसम खराब होने या बिजली चमकने के दौरान पशुओं को चराने बाहर न ले जाएं। ध्यान रखें कि स्वयं या पशु बिजली चमकते समय किसी बड़े पेड़ के नीचे आश्रय न लें।पशुओं के लिए अगले 3-4 दिनों के सूखे चारे और पीने के साफ पानी की व्यवस्था पहले से ही कर लें।
कीट एवं रोग नियंत्रण-
खेतों की लगातार निगरानी करते रहें। यदि फसलों में किसी कीट या बीमारी के लक्षण दिखाई देते हैं, तो अभी किसी भी दवा का छिड़काव न करें। मौसम पूरी तरह साफ होने पर ही अनुशंसित कीटनाशकों या कवकनाशकों का छिड़काव करें।









