
बिजनापुरी की बुनकर सहकारी समिति के पारंपरिक वस्त्रों ने दिखाई धमतरी की समृद्ध हस्तकरघा परंपरा, सहकारिता से स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता को मिल रहा प्रोत्साहन
धमतरी, 2 नवंबर 2026। छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस एवं जिला स्तरीय राज्योत्सव 2026 के अवसर पर धमतरी में आयोजित प्रदर्शनी में सहकारिता विभाग द्वारा सहकारिता के माध्यम से आर्थिक स्वावलंबन, स्वरोजगार और ग्रामीण विकास की संभावनाओं को प्रदर्शित किया गया है। प्रदर्शनी में विशेष रूप से बुनकर सहकारी समिति मर्यादित, बिजनापुरी के पारंपरिक वस्त्र उत्पाद आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। यहां प्रदर्शित हस्तनिर्मित वस्त्र धमतरी जिले की पारंपरिक बुनकरी कला, स्थानीय हुनर और श्रम-साधना की समृद्ध विरासत को सामने ला रहे हैं।
बुनकर सहकारी समिति मर्यादित, बिजनापुरी, पंजीयन क्रमांक 241 द्वारा विभिन्न प्रकार के वस्त्रों का उत्पादन एवं थोक विक्रय किया जाता है। समिति से जुड़े बुनकर अपने पारंपरिक कौशल और अनुभव के माध्यम से वस्त्र निर्माण की कला को जीवंत बनाए हुए हैं। हथकरघा पर तैयार होने वाले इन वस्त्रों में स्थानीय कारीगरों की मेहनत, बारीकी और रचनात्मकता की झलक दिखाई देती है। प्रदर्शनी के माध्यम से आम नागरिकों को स्थानीय उत्पादों की गुणवत्ता, विविधता और उनकी निर्माण प्रक्रिया से परिचित होने का अवसर मिल रहा है।
बुनकर सहकारी समितियां ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ पारंपरिक कौशल के संरक्षण और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। सहकारिता के माध्यम से बुनकरों को संगठित मंच मिलता है, जिससे उत्पादन, विपणन और अपने उत्पादों को व्यापक बाजार तक पहुंचाने की संभावनाएं बढ़ती हैं। इससे पारंपरिक हस्तकरघा कला को नई पहचान मिलने के साथ कारीगरों की आजीविका को भी संबल मिलता है।
प्रदर्शनी में सहकारिता के अन्य आयामों के तहत कृषि ऋण, समर्थन मूल्य पर कृषि उपज उपार्जन, उर्वरक उपलब्धता, पंजीयन, आधुनिक ड्रोन तकनीक तथा महिला दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों की गतिविधियों की जानकारी भी प्रदर्शित की गई है। छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ मर्यादित, रायपुर से संबंधित गतिविधियों के माध्यम से दुग्ध उत्पादन और ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को भी रेखांकित किया गया है।
राज्योत्सव की यह प्रदर्शनी ‘सहकार से समृद्धि’ की भावना को साकार करते हुए स्थानीय उत्पादों, पारंपरिक हुनर और सामूहिक आर्थिक सशक्तीकरण का संदेश दे रही है। विशेषकर बिजनापुरी के बुनकरों की कला यह दर्शाती है कि परंपरा और आधुनिक बाजार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर स्थानीय हुनर को नई पहचान और आजीविका को नए अवसर प्रदान किए जा सकते हैं।









