
दार्जिलिंग में जन्मी एक लड़की ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि एक दिन पूरी दुनिया उसकी अदाकारी की दीवानी हो जाएगी. हॉलीवुड में कदम रखते ही विवियन ली ने ऐसी पहचान बनाई कि उनकी एक फिल्म ने उन्हें रातोंरात सुपरस्टार बना दिया. दो ऑस्कर जीतने वाली इस एक्ट्रेस को शोहरत और दौलत तो खूब मिली, लेकिन निजी जिंदगी में प्यार कभी उनका साथ नहीं दे पाया. दो शादियां टूटीं, मानसिक बीमारी और टीबी ने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया. जिस एक्ट्रेस ने अपनी खूबसूरती और एक्टिंग से करोड़ों दिलों पर राज किया, उसकी जिंदगी का अंत इतना दर्दनाक क्यों हुआ? 53 साल की उम्र में उनके साथ आखिर क्या हुआ था?
भारत के दार्जिलिंग में हुआ था जन्म, नाम था विवियन मैरी हार्टले
आज हॉलीवुड की इस दिग्गज एक्ट्रेस का नाम लिया जाता है, तो शायद ही किसी को यकीन हो कि उनका जन्म भारत में हुआ था. विवियन ली का जन्म 5 नवंबर 1913 को दार्जिलिंग में हुआ था. उनका असली नाम विवियन मैरी हार्टले था. उनके पिता अर्नेस्ट हार्टले और मां गर्ट्रूड हार्टले ब्रिटिश मूल के थे. विवियन ने अपने बचपन के शुरुआती साल भारत में बिताए. बाद में उनका परिवार इंग्लैंड चला गया, जहां उन्होंने पढ़ाई की और एक्टिंग की दुनिया में कदम रखने का सपना देखा. बचपन में देखा गया यही सपना आगे चलकर उन्हें दुनिया की सबसे चर्चित एक्ट्रेस में शामिल करने वाला था.
एक फिल्म ने बना दिया रातोंरात दुनिया का सितारा
विवियन ली की किस्मत साल 1939 में रिलीज हुई फिल्म ‘Gone with the Wind’ ने बदल दी. इस फिल्म में उन्होंने स्कारलेट ओ’हारा का रोल निभाया था, जो उनके करियर का सबसे यादगार किरदार बन गया. फिल्म में उनकी खूबसूरती और दमदार एक्टिंग को दर्शकों ने खूब पसंद किया. दिलचस्प बात यह है कि इस रोल के लिए कई एक्ट्रेस के नाम पर विचार किया गया था, लेकिन विवियन ने अपनी एक्टिंग से सबका दिल जीत लिया. फिल्म सुपरहिट रही और विवियन रातोंरात दुनिया भर में मशहूर हो गईं. इस रोल के लिए उन्हें 1940 में बेस्ट एक्ट्रेस का पहला ऑस्कर भी मिला. इसके बाद हॉलीवुड में उनकी पहचान एक बड़ी स्टार के तौर पर बन गई.
दूसरी फिल्म में भी जीता ऑस्कर, साबित किया एक्टिंग का दम
विवियन ली ने सिर्फ एक नहीं, बल्कि दो बार ऑस्कर जीतकर अपनी एक्टिंग से सबको प्रभावित किया. साल 1951 में रिलीज हुई फिल्म ‘A Streetcar Named Desire’ में उन्होंने ब्लैंच डुबॉइस का रोल निभाया था. यह किरदार उनकी पिछली फिल्म ‘Gone with the Wind’ के स्कारलेट ओ’हारा से बिल्कुल अलग था. फिल्म में उन्होंने एक ऐसी महिला का किरदार निभाया, जो अपने टूटे सपनों और जिंदगी के मुश्किल दौर से जूझ रही थी. विवियन की एक्टिंग को दर्शकों के साथ फिल्म समीक्षकों ने भी खूब पसंद किया. इस रोल के लिए उन्हें 1952 में बेस्ट एक्ट्रेस का दूसरा ऑस्कर मिला. इस तरह उन्होंने साबित कर दिया कि उनकी पहचान सिर्फ खूबसूरती से नहीं, बल्कि शानदार एक्टिंग से भी थी.
पहले पति को छोड़ लॉरेंस ओलिवियर से की शादी, फिर यह रिश्ता भी टूट गया
विवियन ली की असल जिंदगी की प्रेम कहानी भी किसी फिल्म से कम नहीं थी. उनकी पहली शादी साल 1932 में वकील हर्बर्ट ली होलमैन से हुई थी. इस शादी से उनकी एक बेटी सुजैन भी हुई. लेकिन कुछ साल बाद उनकी मुलाकात ब्रिटिश एक्टर लॉरेंस ओलिवियर से हुई. दोनों की नजदीकियां बढ़ीं और प्यार हो गया. उस वक्त दोनों पहले से शादीशुदा थे, लेकिन बाद में अपने-अपने जीवनसाथियों से तलाक लेकर साल 1940 में शादी कर ली. दोनों की जोड़ी को दर्शकों ने खूब पसंद किया और उन्होंने साथ में कई प्रोजेक्ट्स पर भी काम किया. एक वक्त था जब दोनों एक-दूसरे के काफी करीब थे, लेकिन धीरे-धीरे उनके रिश्ते में दूरियां आने लगीं. आखिरकार शादी के 20 साल बाद 1960 में दोनों का तलाक हो गया. इस तरह विवियन की दूसरी शादी भी ज्यादा समय तक नहीं चल सकी.
शोहरत के बीच अकेलेपन और मानसिक बीमारी से जूझती रहीं
विवियन ली की जिंदगी में शोहरत और कामयाबी के साथ कई मुश्किलें भी थीं. वह लंबे समय तक मानसिक बीमारी से जूझती रहीं. उस दौर में उनकी बीमारी को मैनिक डिप्रेशन कहा जाता था. इसका असर उनके व्यवहार और निजी रिश्तों पर भी पड़ा. कई बार उन्हें लंबे समय तक इलाज और आराम करना पड़ता था. पर्दे पर हमेशा आत्मविश्वास से भरी नजर आने वाली विवियन असल जिंदगी में काफी मुश्किल दौर से गुजर रही थीं. हालांकि, इन सबके बावजूद उन्होंने फिल्मों और थिएटर में काम करना जारी रखा. एक्टिंग के प्रति उनका जुनून आखिरी समय तक बना रहा.
ट्यूबरकुलोसिस ने छीन ली सेहत, फिर भी मंच से नहीं तोड़ा रिश्ता
मानसिक बीमारी के साथ-साथ विवियन ली को शारीरिक परेशानियों का भी सामना करना पड़ा. साल 1940 के दशक में उन्हें ट्यूबरकुलोसिस यानी टीबी होने का पता चला था. इस बीमारी के कारण उनकी सेहत बार-बार बिगड़ती रही. कई बार उन्हें काम से ब्रेक लेना पड़ा, लेकिन ठीक होने के बाद वह फिर फिल्मों और थिएटर में लौट आती थीं. साल 1960 में लॉरेंस ओलिवियर से तलाक के बाद उनकी जिंदगी में एक्टर जैक मेरिवेल आए. दोनों साथ रहने लगे और जैक ने उनके मुश्किल समय में उनका साथ दिया. जैक उनके आखिरी समय तक उनके साथ रहे, लेकिन दोनों ने शादी नहीं की थी. विवियन ने बीमारी के बावजूद काम करना जारी रखा. साल 1965 में रिलीज हुई फिल्म ‘Ship of Fools’ में भी वह नजर आई थीं. हालांकि, धीरे-धीरे उनकी सेहत बिगड़ती जा रही थी.
रात को सोने गईं, आधे घंटे बाद कमरे में फर्श पर मिलीं, 53 की उम्र में हुई मौत
विवियन ली की जिंदगी का अंत बेहद दर्दनाक रहा. मई 1967 में उनकी टीबी की बीमारी फिर से गंभीर हो गई थी. डॉक्टरों ने उन्हें आराम करने की सलाह दी थी. उस वक्त वह लंदन स्थित अपने घर में थीं और उनके साथ एक्टर जैक मेरिवेल रहते थे. 7 जुलाई 1967 की रात जैक एक नाटक में काम करने के लिए घर से निकले थे. देर रात जब वह वापस लौटे, तो विवियन अपने कमरे में सो रही थीं. उन्होंने उन्हें आराम करने दिया, लेकिन करीब आधे घंटे बाद जब दोबारा कमरे में पहुंचे, तो विवियन फर्श पर गिरी हुई थीं.
जैक ने उन्हें उठाने और बचाने की पूरी कोशिश की. यहां तक कि मुंह से सांस देने की कोशिश भी की, लेकिन तब तक विवियन की मौत हो चुकी थी. टीबी से जुड़ी गंभीर परेशानियों के कारण उनकी सांसें थम गई थीं. उस वक्त उनकी उम्र महज 53 साल थी. 8 जुलाई 1967 को उनकी मौत की खबर सामने आई. उनके निधन से फिल्म और थिएटर की दुनिया में शोक छा गया. उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए लंदन के वेस्ट एंड इलाके के थिएटरों की लाइटें एक घंटे के लिए बंद कर दी गई थीं.









