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तेंदूपत्ता संग्राहकों को मिल रहा 5500 रुपये प्रति मानक बोरा का दाम

ग्रामीणों की अतिरिक्त आमदनी का सशक्त माध्यम बना तेंदूपत्ता संग्रहण
तेंदूपत्ता संकलन में सरगुजा जिला आगे, अब तक 97.28% लक्ष्य प्राप्त
अम्बिकापुर । छत्तीसगढ़ के सरगुजा अंचल में ‘तेंदू पान’ के नाम से विख्यात तेंदूपत्ता का संग्रहण ग्रामीण क्षेत्र में कृषि के बाद लघु वनोपज संग्रहण ग्रामीणों के लिए अतिरिक्त आय का एक पूरक स्रोत है। राज्य के लाखों ग्रामीण प्रतिवर्ष तेंदूपत्ता संग्रहण में करते हैं, जिससे उन्हें खेती के अलावा अतिरिक्त आमदनी का जरिया मिलता है।
सरकार की पहल बनी ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय द्वारा तेंदूपत्ता दर में की गई 1500 रुपये प्रति बोरा वृद्धि ने संग्राहकों को आर्थिक मजबूती दी है। पहले जहां प्रति मानक बोरा की दर 4000 रुपए मिलता था, अब इसे बढ़ाकर 5500 रुपए कर दिया गया है। इस 1500 रुपए की वृद्धि से संग्राहकों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। इससे वन क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी और ग्रामीण परिवारों को खेती के अतिरिक्त आमदनी का सशक्त स्रोत मिला है।
तेंदूपत्ता संकलन में सरगुजा जिला आगे, अब तक 97.28% लक्ष्य प्राप्त
जिले में तेंदूपत्ता संग्रगण का कार्य तीव्र गति से जारी है। मिली रिपोर्ट के अनुसार, जिले में कुल 36,200 मानक बोरा के लक्ष्य में से अब तक 35,217.129 मानक बोरा तेंदूपत्ता का संकलन किया जा चुका है, जो कि कुल लक्ष्य का 97.28% है।
दरिमा क्षेत्र के बरगवां समिति में तेंदूपत्ता बेचने आईं श्रीमती फूलेश्वरी ने बताया कि वे 2019 से तेंदूपत्ता संग्रहण कर रही हैं। उनका पूरा परिवार इस कार्य में सहभागी है। खेती-किसानी के साथ-साथ तेंदूपत्ता संग्रहण से उन्हें अच्छी आमदनी हो जाती है। श्रीमती फूलेश्वरी कहती हैं कि पहले की तुलना में अब काफी बेहतर मूल्य मिल रहा है, जिससे बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और अन्य जरूरतों में आर्थिक सहायता मिल जाती है।
तेंदूपत्ता संग्राहकों की मेहनत और सरकार की ओर से मिलने वाली प्रोत्साहन राशि न केवल ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बना रही है, बल्कि राज्य की वानिकी अर्थव्यवस्था को भी गति दे रही है। तेंदूपत्ता संग्रहण का कार्य हर साल गर्मी के मौसम में होता है और इस दौरान हजारों ग्रामीण, विशेषकर महिलाएं, जंगलों से तेंदू पत्तों का संग्रहण कर समितियों को बेचती हैं।
राज्य सरकार द्वारा तय की गई 5500 रुपए की नई दर ने न केवल तेंदूपत्ता संग्राहकों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाया है, बल्कि उनके मनोबल को भी बढ़ाया है। तेंदूपत्ता जैसी लघु वनोपज को उचित मूल्य मिलने से वन क्षेत्र से जुड़े लोग आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे हैं।

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