Ro no D15139/23

सत्य की शक्ति मानव को असीमित शक्ति और अतुल्य बल प्रदान करती है. स्वामी विवेकानंद

परिवर्तन सृष्टि का अनवरत गतिसत्य एवं पुरुषार्थ से परिश्रम,
जीवन में सफलता का सम्यक पैमाना।मान नियम है; यही वह अक्षय शक्ति है जिसके प्रभाव से ब्रह्मांड से लेकर सूक्ष्मतम कण तक निरंतर रूपांतरण की प्रक्रिया से गुजरते हैं। समय की धारा में नवीन मूल्यों का उद्भव और जर्जर मूल्यों का विस्थापन एक शाश्वत सत्य की भाँति सदा से स्वीकार्य रहा है। मानव सभ्यता का सम्पूर्ण इतिहास इस तथ्य का साक्षी है कि उन्नति की हर सीढ़ी अदम्य जिज्ञासा, जिजीविषा, प्रबल उत्साह, निडर आशावादिता और अविरत पुरुषार्थ के बल पर ही संभव हुई है। स्वामी विवेकानंद के शब्द— “सत्य की शक्ति मानव को असीमित शक्ति और अतुल्य बल प्रदान करती है”— केवल उपदेश मात्र नहीं, बल्कि अनुभव-सिद्ध और आत्म-साक्षात्कार से उद्भूत दर्शन है। मानव जीवन में सत्य और धन—ये दोनों तत्व सदैव से निर्णायक कारक रहे हैं, किन्तु इनकी परस्पर भूमिका समय और परिस्थिति के अनुसार बदलती रही है। सत्य का मूल्य सार्वकालिक, अपरिवर्तनीय और दिव्य है, जबकि धन का महत्व व्यवहारिक जीवन की सुगमता और व्यवस्थित समाज-निर्माण तक सीमित है। धन की उपस्थिति विकास के लिए आवश्यक अवश्य है, परंतु उसका अतिरेक व्यक्ति, समाज और राष्ट्र की दिशा को दिग्भ्रमित कर सकता है। सत्य की भाँति स्थायी आधार पर धन का संतुलित प्रयोग ही विकास को सार्थक एवं मानवीय बनाता है। गलत मार्ग से अर्जित धन घोर अंधकार है, जबकि सत्य जीवन का शाश्वत प्रकाश—जिसकी आभा कभी मंद नहीं पड़ती। भारतीय दर्शन यही प्रतिपादित करता है कि धनबल सब कुछ नहीं; सत्य के अभाव में धन निरर्थक, अधूरा तथा अंततः विनाशकारी है। सत्य सिद्धांत के बिना धन की मीमांसा अधूरी है, ठीक वैसे ही जैसे शरीर प्राण के बिना। प्राचीन भारतीय परम्परा में धन जीवन के साधन रूप में प्रतिष्ठित हुआ, परंतु सत्य जीवन के परम उद्देश्य और चरम साधना के रूप में आदर प्राप्त करता आया है। निवृत्ति, संयम, त्याग, तप, संतोष और विवेक—इन मूल्यों की तुलना में भोगवाद को किसी भी समय वरीयता नहीं दी गई, अतः सत्य का गौरव कभी दमन नहीं हुआ। वेदों तथा पुराणों में कहा गया है कि “सत्य का सुख स्वर्ण-पात्र में आच्छादित है; जब धन मुखर होता है तब सत्य नेपथ्य में चला जाता है, पर धन का अतिरेक होते ही सत्य पुनः उद्भासित हो उठता है”। सत्य सनातन शक्ति है, धन मिथ्या; धन क्षणभंगुर, सत्य अनादि-अनन्त। भारतीय संस्कृति ने सत्य को मन, वचन और कर्म की त्रिवेणी में अद्वैत के रूप में प्रतिष्ठित किया है। ‘साँच को आंच नहीं’, ‘सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात्’, ‘नैति सत्यं’ जैसी कहावतें और मुंडक उपनिषद का दिव्य वाक्य “सत्यमेव जयते” भारतीय चित्त और चरित्र की सर्वोच्च पहचान हैं। यही मंत्र आज भारतीय गणतंत्र का आदर्श वाक्य है—जो केवल संविधान की शोभा नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की आत्मा की ध्वनि है। वैदिक दर्शन से लेकर जैन, बौद्ध, सिख, ईसाई और इस्लामी चिंतन तक सभी ने सत्य को सर्वोपरि माना है। परंतु औद्योगिक क्रांति के पश्चात पश्चिम में भोगवाद और पूँजीवाद के विस्तार ने आर्थिक तत्व को प्रमुख जीवन-निर्धारक सिद्धांत बना दिया। वैश्वीकरण, उदारीकरण और पूँजी-केन्द्रित विकास की नयी दुनिया में राजनीति, समाज, धर्म, अध्यात्म, न्याय, शिक्षा, मीडिया, पर्यावरण, यहाँ तक कि पारिवारिक संबंध भी अर्थ-बल के नियमों पर संचालित होने लगे। आज स्थिति यह है कि धन के बल पर शक्ति, प्रतिष्ठा, मान-सम्मान, सत्ता, निर्णय और प्रभाव खरीदा जाने लगा है। निर्धन का सत्य, चाहे वह कितना ही पवित्र अथवा तार्किक क्यों न हो, अक्सर महत्वहीन समझ लिया जाता है। इसके विपरीत धनवान का असत्य भी सम्मानित होकर आदर्श का रूप ले लेता है। न्यायपालिका, विधायिका तथा कार्यपालिका में सत्य के दमन के अनगिनत उदाहरण प्रतिदिन सामने आते हैं। न्याय अब गरीब का अधिकार न रहकर धनी वर्ग की मुट्ठी में बंद तिजोरी बन गया है—जहाँ निर्णय की कीमत तौल में मापी जाती है। चुनावों में धनबल का प्रभाव, मतदाताओं की खरीद-फरोख्त, मीडिया का दमन या प्रबंधन, व्यावसायिक और राजनीतिक भ्रष्टाचार—ये सब सत्य पर प्रश्नचिह्न बनकर उपस्थित हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे पर सम्पन्न देशों की दादागिरी सत्य को दबा देती है, और विकासशील देशों को बलि का बकरा बनाकर खड़ा कर दिया जाता है। जलवायु सम्मेलन असफल इसलिए होते हैं क्योंकि धन की आवाज सत्य की पुकार को परास्त कर देती है। आज मनुष्य व्यक्तिगत स्तर पर भी दिन में अनेक बार धनबल, भय, स्वार्थ या सुविधा के लिए अपने अंतःकरण का दमन करता है और सत्य को मौन कर देता है। आधुनिक युग की यही विडंबना है—“जब धन बोलता है तो सत्य मौन रहता है”—पर यह केवल आभासी सत्य है, दार्शनिक या आध्यात्मिक नहीं। क्योंकि सत्य जितना दबाया जाता है उतना ही प्रचंड हो उठता है। किंतु इसके बावजूद सत्य का वैश्विक महत्व, उसकी सार्वभौमिकता और उसकी अदम्य शक्ति को कोई नकार नहीं सकता। स्वामी विवेकानंद ने कहा— “सत्य में वह सामर्थ्य है जो मनुष्य को असीम शक्ति और अतुल्य बल प्रदान कर सकती है। यदि तुम अखंड सत्य का पालन करो तो विश्व की कोई शक्ति तुम्हें रोक नहीं सकती।” यही सत्यमेव जयते का वास्तविक संदेश है—सत्य की विजय अवश्यम्भावी है। सत्य ही जीवन का शाश्वत प्रकाश है, सत्य ही मनुष्य का सर्वोच्च धर्म है, सत्य ही प्रकृति का मूलाधार है, और सत्य ही मानवता की अंतिम आशा।
संजीव ठाकुर, स्तंभकार • चिंतक • लेखक, वरिष्ठ पत्रकार,
रायपुर, छत्तीसगढ़
9009 415 415,

 

  • Related Posts

    बदलाव की बयार: ‘सेवा के संकल्प’ से संवरता बस्तर

    *”सेवा_संकल्प_अभियान”*   *मुख्यधारा में कदम ताल करता युवा,अभाव से उम्मीद की ओर बढ़ता बस्तर*   *विष्णु प्रसाद वर्मा* *सहायक संचालक*   रायपुर, 27 सितंबर 2026/   कभी अपनी भौगोलिक विषमताओं,…

    Read more

    बिहार भाजपा कोर कमिटी की बैठक प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े रहे मौजूद

      आगामी कार्ययोजना पर हुआ मंथन ‎ ‎सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनसेवा के संकल्प को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का हो रहा…

    Read more

    NATIONAL

    बिहार भाजपा कोर कमिटी की बैठक प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े रहे मौजूद

    बिहार भाजपा कोर कमिटी की बैठक  प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े रहे मौजूद

    चुनाव विभाग कार्यालय विवाद पर जयराम का हमला बोले, आरोपियों पर हो सख्त कार्रवाई, संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखने की मांग नेरचौक मेडिकल कॉलेज में रेडियोलॉजिस्ट की कमी का मुद्दा उठाया, खिलाड़ियों को घोषित पुरस्कार राशि देने को कहा

    चुनाव विभाग कार्यालय विवाद पर जयराम का हमला  बोले, आरोपियों पर हो सख्त कार्रवाई, संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखने की मांग  नेरचौक मेडिकल कॉलेज में रेडियोलॉजिस्ट की कमी का मुद्दा उठाया, खिलाड़ियों को घोषित पुरस्कार राशि देने को कहा

    शिमला प्रदर्शन पर बिंदल का सरकार पर हमला हिमाचल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल बोले, कानून सबके लिए समान हो कांग्रेस प्रदर्शन में सरकारी संपत्ति नुकसान का आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग

    शिमला प्रदर्शन पर बिंदल का सरकार पर हमला  हिमाचल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल बोले, कानून सबके लिए समान हो  कांग्रेस प्रदर्शन में सरकारी संपत्ति नुकसान का आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग

    केएनएच में नहीं बनेंगे विधायकों के आवास, हाईकोर्ट में सरकार ने दिया बयान खाली होने वाले परिसर का इस्तेमाल अस्पताल सेवाओं के विस्तार के लिए ही होगा

    केएनएच में नहीं बनेंगे विधायकों के आवास, हाईकोर्ट में सरकार ने दिया बयान  खाली होने वाले परिसर का इस्तेमाल अस्पताल सेवाओं के विस्तार के लिए ही होगा

    हिमाचल के कर्मचारियों को दिवाली से पहले डीए सीएम सुक्खू ने डीए भुगतान का किया एलान

    हिमाचल के कर्मचारियों को दिवाली से पहले डीए  सीएम सुक्खू ने डीए भुगतान का किया एलान

    बंगाल में लागू होगा समान नागरिक संहिता, लव जिहाद पर सीएम शुभेंदु अधिकारी ने बताया सरकार का बड़ा प्लान

    बंगाल में लागू होगा समान नागरिक संहिता, लव जिहाद पर सीएम शुभेंदु अधिकारी ने बताया सरकार का बड़ा प्लान