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दलपत सागर बना अदम्य साहस का साक्षी खाली बोतलों के सहारे तैरना और विद्यार्थियों ने किया सीपीआर का प्रदर्शन बस्तर में सुरक्षाबलों ने पेश की आपदा प्रबंधन की मॉक ड्रिल

बस्तर की ऐतिहासिक धरोहर दलपत सागर की लहरें मंगलवार को केवल शांत खूबसूरती की गवाह नहीं थीं, बल्कि वे गवाह बनीं अदम्य साहस, प्रशासनिक मुस्तैदी और आपदा प्रबंधन की एक शानदार पाठशाला की। आगामी मानसून और बाढ़ की संभावित विभीषिका से निपटने के उद्देश्य से राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, राज्य आपदा मोचन बल और नगर सेना ने एक संयुक्त अभ्यास को अंजाम दिया। इस पूर्वाभ्यास ने न केवल प्रशासन की तैयारियों को परखा, बल्कि बस्तरवासियों को यह विश्वास भी दिलाया कि संकट के समय देसी तकनीक और सूझबूझ का सही  तालमेल कैसे जीवन रक्षक बन सकता है।

अभ्यास की शुरुआत होते ही दलपत सागर का पूरा तट मोटर बोट्स की गर्जना से गूंज उठा। एक काल्पनिक बाढ़ की स्थिति निर्मित की गई, जिसमें पानी में फंसे लोगों को बचाने की चुनौती सामने थी। पलक झपकते ही राष्ट्रीय आपदा मोचन बल के जवान हरकत में आए और गहरे पानी में उतरकर युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। इस दौरान जवानों ने डूबते हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने का जीवंत प्रदर्शन किया। इसके साथ ही नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की तकनीकों का भी अद्भुत प्रदर्शन किया।
इस पूरे अभियान में सबसे रोचक और शिक्षाप्रद पहलू आपदा में आविष्कार की भावना रही। जहाँ एक ओर लाइफ बॉय और लाइफ जैकेट जैसे मानक उपकरणों का उपयोग किया गया, वहीं दूसरी ओर जवानों ने यह भी सिखाया कि यदि बाढ़ के वक्त प्रोफेशनल उपकरण न हों, तो कैसे घर में पड़ी पानी की खाली बोतलों और तेल के खाली कनस्तरों को रस्सी से बांधकर तत्काल जीवनरक्षक उपकरण तैयार किए जा सकते हैं। इन घरेलू जुगाड़ के सहारे जवानों ने बिना किसी बाधा के पानी में तैरकर दिखाया, जिससे वहां मौजूद हर शख्स चकित रह गया और यह संदेश गया कि सूझबूझ से सीमित संसाधनों में भी जान बचाई जा सकती है।
रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद जीवन बचाने की यह मुहिम तट पर भी जारी रही, जहाँ पानी से बाहर निकाले गए व्यक्ति की जान बचाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया सीपीआर देने का वैज्ञानिक तरीका समझाया गया। इस प्रशिक्षण को और अधिक व्यावहारिक बनाने के लिए वहां मौजूद एक स्थानीय विद्यार्थी को आगे बुलाया गया, जिसने जवानों के मार्गदर्शन में डमी पर सीपीआर का सटीक प्रदर्शन कर यह साबित किया कि अब नई पीढ़ी भी आपदा से निपटने के लिए तैयार हो रही है। इस अवसर पर कटक स्थित एनडीआरएफ की तीसरी बटालियन के डिप्टी कमांडेंट श्री पवन जोशी, डिप्टी कलेक्टर श्री सतेंद्र बंजारे और नगर सेनानी श्री संतोष मार्बल सहित बड़ी संख्या में शिक्षकगण व विद्यार्थी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि आपदा कभी बताकर नहीं आती, इसलिए तैयारी में कोई कमी नहीं होनी चाहिए। दलपत सागर में हुए इस सफल आयोजन ने नागरिकों के मन में यह गहरा विश्वास जगाया है कि कुदरत की किसी भी चुनौती से निपटने के लिए उनके प्रहरी पूरी तरह सजग और सक्षम हैं।

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