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दो दिवसीय छत्तीसगढ़ ग्रीन समिट 2026 का समापन, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास पर हुआ व्यापक मंथन

रायपुर, 16 मार्च 2026। Chhattisgarh Green Summit 2026 – Sustainable Synergy: Traditionally Futuristic के दो दिवसीय आयोजन का समापन समारोह पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के सभागार में गरिमामयी वातावरण में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों के बीच व्यापक चर्चा हुई।

समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में छत्तीसगढ़ शासन के वन मंत्री केदार कश्यप, मेघालय लोकायुक्त के चेयरमैन सी.पी. मारक, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (हेड ऑफ फॉरेस्ट) वी. श्रीनिवास राव, मैक कॉलेज की सचिव श्रीमती सरिता अग्रवाल, पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सच्चिदानंद शुक्ला तथा कुलसचिव शैलेन्द्र पटेल सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। इस अवसर पर बड़ी संख्या में प्राध्यापक, शोधार्थी, छात्र-छात्राएँ और कला-संस्कृति से जुड़े लोग भी शामिल हुए।

कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगीत के सामूहिक गायन से हुआ। स्वागत उद्बोधन में वी. श्रीनिवास राव ने कहा कि यह ग्रीन समिट जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण के विषय में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिससे विशेषज्ञों और विद्यार्थियों को पर्यावरणीय चुनौतियों पर विचार-विमर्श करने तथा सतत विकास के लिए नए समाधान तलाशने का अवसर मिला है।

कुलपति प्रो. सच्चिदानंद शुक्ला ने अपने उद्बोधन में कहा कि पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के लिए ज्ञान, शोध और नवाचार की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। विश्वविद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र ही नहीं, बल्कि समाज और पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाने का सशक्त माध्यम भी है। ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों और शोधार्थियों को अपने अनुभव और शोध साझा करने का अवसर मिलता है।

वन मंत्री केदार कश्यप ने अपने संबोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ अपनी समृद्ध वन संपदा, आदिवासी संस्कृति और प्राकृतिक संसाधनों के लिए विशेष पहचान रखता है। पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के लिए सरकार, समाज और युवाओं को मिलकर कार्य करना होगा।

मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव ने कहा कि तेजी से हो रहे तकनीकी विकास के बीच जलवायु परिवर्तन विश्व की सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक बन गया है। ग्रीन हाउस गैसों के बढ़ते उत्सर्जन से वैश्विक तापमान में वृद्धि, हिमनदों का पिघलना और समुद्र के जलस्तर में वृद्धि जैसी समस्याएँ सामने आ रही हैं। ऐसे समय में पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक के समन्वय के साथ सतत विकास को अपनाना आवश्यक है। उन्होंने भारत की प्राचीन दर्शन परंपरा “वसुधैव कुटुम्बकम्” का उल्लेख करते हुए मानव और प्रकृति के बीच सामंजस्य की आवश्यकता पर बल दिया।

समिट के दौरान देश के विभिन्न राज्यों से आए शोधार्थियों ने प्रकृति, जैव विविधता, ग्रीन टेक्नोलॉजी सहित अनेक विषयों पर अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। साथ ही विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन, रोजगार, संस्कृति और लोककला जैसे विषयों पर अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम में पद्मश्री सम्मानित विभूतियों ने भी सहभागिता की, जिनमें पद्मश्री पांडीराम मांडवी, पद्मश्री अजय मांडवी (कांकेर), पद्मश्री उषा बारले (भिलाई), पद्मश्री चैतराम पवार (धुले, महाराष्ट्र) और पद्मश्री फुलबासन यादव (राजनांदगांव) प्रमुख रूप से शामिल रहे। इसके अलावा दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और पश्चिम बंगाल सहित विभिन्न राज्यों से आए विशेषज्ञों ने विशेष सत्रों में भाग लिया।

इस अवसर पर पर्यावरण संरक्षण, जल, जंगल और जमीन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने के लिए मान सिंह बघेल, श्रीमती शशिकला सिन्हा, बलदेव मंडावी और सुश्री मीतू गुप्ता को “ग्रीन पुरस्कार” से सम्मानित किया गया। साथ ही पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता में जनजातीय कला और संस्कृति पर आधारित उत्कृष्ट चित्रकारी के लिए परम चक्रधारी, एल. वेंकट रम्मा राव, एकता दीवान, श्रेया भारद्वाज और अर्शी फरीदी को विजेता घोषित किया गया।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न स्थानों से आए कलाकारों ने छत्तीसगढ़ी लोकनृत्य, जनजातीय नृत्य और संगीत की प्रस्तुति दी, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। इसके अलावा हाथकरघा, पारंपरिक वेशभूषा, भित्ति चित्र, छत्तीसगढ़ी आभूषण और हस्तशिल्प की प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र रही। भारतीय सेना द्वारा लगाए गए स्टॉल में रक्षा, जागरूकता और सेवाभाव से जुड़ी जानकारी भी दी गई।

अंत में सी.पी. मारक ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पर्यावरण से जुड़े ऐसे आयोजन देश के जैविक और भौगोलिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं तथा राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक सार्थक पहल हैं। सभी की सहभागिता से दो दिवसीय ग्रीन समिट सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।

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