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बंगाल: फर्जी हस्ताक्षर मामले में नया अपडेट, न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने सुनवाई से खुद को किया अलग

Bengal News: राज्य में विधायको के फर्जी हस्ताक्षर मामले में सीआइडी की तलाशी से संबंधित केस की सुनवाई से कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने स्वयं को अलग कर लिया है. अदालत ने कहा कि डायमंड हार्बर से लाेकसभा सांसद व तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पहले ही फर्जी हस्ताक्षर प्रकरण में उच्च न्यायालय की दूसरी पीठ के समक्ष याचिका दायर कर चुके हैं. ऐसे में एक ही मामले की सुनवाई दो अलग-अलग पीठों में होने पर परस्पर विरोधी आदेश आने की संभावना बन सकती है. न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने टिप्पणी की कि इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति कौशिक चंद की पीठ के समक्ष ही होनी चाहिए. इसी आधार पर उन्होंने मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग करने का निर्णय लिया.

सीआइडी की कार्रवाई की वैधता पर उठा सवाल

फर्जी हस्ताक्षर मामले की जांच के दौरान सीआइडी की एक टीम पूर्व मुख्यमंत्री व तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी के कालीघाट आवास स्थित पार्टी कार्यालय पहुंची थी. हालांकि, शुरुआत में सीआइडी अधिकारियों को कार्यालय में प्रवेश नहीं करने दिया गया. लगभग एक घंटे तक वहां मौजूद तृणमूल नेताओं के साथ बहस के बाद जांच दल कार्यालय के भीतर प्रवेश कर सका. इसके बाद अधिकारियों ने करीब दो घंटे तक परिसर में तलाशी अभियान चलाया. तृणमूल कांग्रेस के अधिवक्ता किशोर दत्त ने उच्च न्यायालय में आरोप लगाया कि सीआइडी बिना किसी वैध तलाशी वारंट और जब्ती सूची दस्तावेज के बलपूर्वक कार्यालय में घुसी थी. पार्टी ने सीआइडी की कार्रवाई की वैधता पर सवाल उठाते हुए अदालत का रुख किया था.

एक ही मामले में दो-दो सुनवाई

इस सप्ताह मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति भट्टाचार्य की पीठ में होने की संभावना थी, लेकिन उन्होंने इससे अलग होने का फैसला किया. इसी फर्जी हस्ताक्षर मामले में अभिषेक बनर्जी ने भी राहत की मांग करते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी, जिसकी सुनवाई न्यायमूर्ति कौशिक चंद की पीठ में हुई. अदालत ने अंतरिम राहत देते हुए कहा था कि अगली सुनवाई तक सीआइडी उनके खिलाफ कोई कठोर कदम नहीं उठा सकती. साथ ही अदालत ने अभिषेक को जांच एजेंसी के साथ सहयोग करने का निर्देश भी दिया था. न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि जब फर्जी हस्ताक्षर मामले से संबंधित अभिषेक बनर्जी की याचिका पर पहले से सुनवाई चल रही है, तब उसी प्रकरण से जुड़े अन्य मामलों की सुनवाई किसी दूसरी पीठ द्वारा नहीं की जानी चाहिए.

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