Ro no D15139/23

बाल सक्षम नीति 2022 के तहत प्रदेशभर में विशेष अभियान तेज

*सड़क जैसी परिस्थितियों में जीवनयापन कर रहे बच्चों के संरक्षण, रेस्क्यू और पुनर्वास पर विशेष फोकस*

 

*1 जून से 30 जून तक चल रहे अभियान में जनजागरूकता के साथ बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा सेवाओं से जोड़ा जा रहा*

 

रायपुर, 16 जून 2026/ बाल सक्षम नीति 2022 के प्रभावी क्रियान्वयन के तहत प्रदेशभर में 1 जून से 30 जून 2026 तक सड़क जैसी परिस्थितियों में जीवनयापन कर रहे बच्चों के स्थायी रेस्क्यू एवं पुनर्वास के लिए विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व एवं महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण और पुनर्वास को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यह अभियान राज्यभर में व्यापक स्तर पर चलाया जा रहा है।

 

महिला एवं बाल विकास विभाग, जिला प्रशासन, पुलिस विभाग, श्रम विभाग, जिला बाल संरक्षण इकाइयों तथा चाइल्ड हेल्पलाइन की संयुक्त टीमों द्वारा विभिन्न जिलों में जनजागरूकता और रेस्क्यू गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। अभियान का उद्देश्य सड़क पर रहने, घूमने, भिक्षावृत्ति करने अथवा बाल श्रम में संलग्न बच्चों की पहचान कर उन्हें संरक्षण, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं पुनर्वास सेवाओं से जोड़ना है।

 

मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, सारंगढ़-बिलाईगढ़, बलरामपुर-रामानुजगंज तथा गौरेला-पेंड्रा-मरवाही सहित विभिन्न जिलों में बस स्टैंड, बाजार, चौक-चौराहों, होटल, ढाबों, कबाड़ी दुकानों, लॉज, पेट्रोल पंप, निर्माण स्थलों तथा अन्य सार्वजनिक स्थानों पर विशेष अभियान चलाया गया। इस दौरान आमजन को बाल सक्षम नीति 2022 के प्रावधानों तथा बाल संरक्षण संबंधी कानूनों की जानकारी दी गई।

 

अभियान के अंतर्गत पाम्पलेट वितरण, स्टीकर चस्पा करने एवं जनसंवाद कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया गया। साथ ही बाल विवाह निषेध, बाल अधिकारों और बाल सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण संदेश भी प्रसारित किए गए। नागरिकों को बताया गया कि यदि कोई 18 वर्ष से कम आयु का बालक या बालिका सड़क पर रहने, भिक्षावृत्ति करने, बाल श्रम में संलग्न होने अथवा किसी संकटपूर्ण स्थिति में दिखाई दे तो इसकी तत्काल सूचना चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 अथवा आपातकालीन सेवा 112 पर दें।

 

राज्य सरकार की इस पहल के माध्यम से बच्चों को जोखिमपूर्ण परिस्थितियों से बाहर निकालकर उन्हें सुरक्षित, सम्मानजनक और बेहतर भविष्य उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। अभियान के दौरान दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचकर भी जागरूकता और रेस्क्यू गतिविधियां संचालित की जा रही हैं, जिससे जरूरतमंद बच्चों को समय पर संरक्षण एवं पुनर्वास का लाभ मिल सके।

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