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सरकारी नियंत्रण से मुक्त हों मंदिर, चढ़ावे में से चवन्नी चुराने वाला अपने पूरे परिवार के नाश को आमंत्रित करता है, देवकीनंदन ठाकुर, मंदिरों का चढ़ावा विवाह भवन के लिये नहीं: सुप्रीम कोर्ट, वरिष्ठ पत्रकार जवाहर नागदेव की खरी… खरी…

पिछले माह राजधानी मे श्रीमद्भाग्वत कथा का आयोजन किया गया।

कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने विभन्न धार्मिक और सामाजिक मुद्दो पर खुलकर समाज का मार्गदर्शन किया। इस बार का आयोजन लीक से हटकर था और चर्चा के दौरान तिलक की अनिवार्यता पर जोर दिया। बिना तिलक के किसी को प्रवेश नहीं दिया गया।

उनके अनुसार मंदिरों में हर वर्ष दो लाख करोड़ चढ़ावा आता है इसे धार्मिक और सामाजिक कार्यों के लिये खर्च करना चाहिये, सरकार को मंदिरों को मुक्त कर देना चाहिये। श्री ठाकुर ने प्रधानमंत्री से सनातन बोर्ड के गठन और मंदिरों के सरकारी नियंत्रण से मुक्ति की उम्मीद जताई।

राममंदिर अयोध्या के चोरी के प्रकरण पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि भगवान के चढ़ावे में से चवन्नी भी चुराने वाला अपने पूरे परिवार के नाश को आमंत्रित करता है।

जवाहर नागदेव, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, चिन्तक, विश्लेषक मोबा. 9522170700
‘बिना छेड़छाड़ के लेख का प्रकाशन किया जा सकता है’

 

 

 

मंदिर के चढ़ावे से विवाह भवन निर्माण पर
सुप्रीम कोर्ट की रोक

कुछ माह पूर्व सुप्रीम कोर्ट ने एक सुखद निर्णय दिया।

दरअसल अब तक मंदिरों में चढ़ाये गये पैसे को सरकार मनमाने ढंग से खर्च करती रही थी। इसका बड़ा हिस्सा मंदिर की व्यवस्थाओं में अथवा धार्मिक कार्यों में खर्च न करके प्रशासनिक कार्यों में और अन्य धर्मावलंबियों के हित में खर्च करने का प्रचलन रहा है।

ऐसे ही एक मामले में तमिलनाडु सरकार ने राज्य के 5 मंदिरों के फण्ड से शादी के लिये हॉल बनाने की अनुमति दे दी। इस मामले में मद्रास हाईकोर्ट ने रोक लगा दी तो मामला सुप्रीम कोर्ट पहंुच गया।

माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने इस आदेश को यथावत रखते हुए कहा कि श्रद्धालु जो चढ़ावा चढ़ाते हैं वो मंदिर के विकास या अन्य धार्मिक कार्यों के लिये देते हैं, शादी का हॉल बनाने के लिये नहीं।

कोर्ट ने कहा कि मंदिरों के फण्ड को सरकारी या सार्वजनिक फण्ड नहीं माना जा सकता। इसे शिक्षा या स्वास्थ्य के काम मंे लगाया जा सकता है। कोर्ट के इस निर्णय का चहुंओर स्वागत किया गया।

 

 

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