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’अभिसरण से बदली सलकापारा आंगनबाड़ी केंद्र की तस्वीर, नौनिहालों को मिला सुरक्षित और सुविधायुक्त भवन’

 

अम्बिकापुर 13 अगस्त 2026/   जिले के उदयपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत सलका स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में अब बच्चों को सुरक्षित, स्वच्छ और सुविधायुक्त वातावरण मिल रहा है। पहले किराए के जर्जर भवन और सीमित स्थान में संचालित होने वाला यह केंद्र अब अपने नवनिर्मित भवन में संचालित हो रहा है। महिला एवं बाल विकास विभाग के एकीकृत बाल विकास सेवा (आईसीडीएस) तथा विकसित भारत जी राम जी योजना के अभिसरण से निर्मित इस भवन ने आंगनबाड़ी केंद्र की कार्यप्रणाली को व्यवस्थित करने के साथ ही बच्चों, गर्भवती माताओं और किशोरी बालिकाओं के लिए उपलब्ध सेवाओं को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

’जर्जर भवन से नवनिर्मित भवन तक का सफर’
सलकापारा आंगनबाड़ी केंद्र पूर्व में किराए के जर्जर भवन में संचालित होता था। भवन में पर्याप्त जगह नहीं होने के कारण बच्चों को बैठाने से लेकर विभिन्न गतिविधियों के संचालन में परेशानी होती थी। आंगनबाड़ी केंद्र में आने वाले बच्चों के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध नहीं था। इसके साथ ही आवश्यक मूलभूत सुविधाओं के अभाव के कारण केंद्र के नियमित संचालन में भी कठिनाइयां आती थीं।

सीमित स्थान और सुविधाओं की कमी का असर बच्चों की उपस्थिति के साथ-साथ केंद्र के माध्यम से प्रदान की जाने वाली स्वास्थ्य, पोषण एवं प्रारंभिक शिक्षा संबंधी सेवाओं पर भी पड़ रहा था। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को भी प्रतिदिन बच्चों के लिए गतिविधियां संचालित करने और हितग्राहियों को सेवाएं उपलब्ध कराने में कई तरह की व्यावहारिक समस्याओं का सामना करना पड़ता था।

ऐसे में केंद्र के लिए स्थायी और सुविधायुक्त भवन की आवश्यकता महसूस की गई। समस्या के समाधान के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आईसीडीएस तथा विकसित भारत जी राम जी योजना के तहत अभिसरण के माध्यम से भवन निर्माण की पहल की गई।

’11.69 लाख रुपये की लागत से तैयार हुआ भवन’
सलकापारा आंगनबाड़ी केंद्र के भवन निर्माण के लिए वित्तीय वर्ष 2024-2025 में स्वीकृति प्रदान की गई। परियोजना की कुल लागत 11.69 लाख रुपये है। इसमें आईसीडीएस से 3.69 लाख रुपये तथा विकसित भारत जी राम जी योजना से 8.00 लाख रुपये का प्रावधान किया गया।

योजनाओं के अभिसरण से उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करते हुए गांव में आंगनबाड़ी केंद्र के लिए एक स्थायी एवं गुणवत्तापूर्ण भवन तैयार किया गया। भवन निर्माण कार्य के दौरान 494 मानव दिवस का रोजगार भी सृजित हुआ। इस प्रकार यह परियोजना बच्चों के लिए सुविधा उपलब्ध कराने के साथ ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार सृजन की दिशा में भी उपयोगी साबित हुई।

’बच्चों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया भवन’
नवनिर्मित आंगनबाड़ी भवन में बच्चों और केंद्र से जुड़े हितग्राहियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। भवन में बड़ा हॉल, रसोई, स्टोर, शौचालय, बाथरूम और पेयजल सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावा बच्चों के खेलने और विभिन्न गतिविधियों के लिए भी पर्याप्त स्थान उपलब्ध कराया गया है।

बड़ा हॉल होने से बच्चों को बैठने के लिए पर्याप्त जगह मिल रही है। यहां प्री-स्कूल शिक्षा से जुड़ी गतिविधियां, पोषण संबंधी गतिविधियां तथा बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक अन्य गतिविधियां व्यवस्थित रूप से संचालित की जा सकती हैं। रसोई एवं स्टोर की सुविधा से पोषण आहार के रख-रखाव और वितरण में भी सुविधा हुई है।

शौचालय, बाथरूम और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता से केंद्र में स्वच्छता और सुविधा का बेहतर वातावरण तैयार हुआ है। बच्चों के लिए खेलने हेतु पर्याप्त स्थान मिलने से उनकी नियमित गतिविधियों को भी व्यवस्थित ढंग से संचालित किया जा रहा है।

’35 बच्चों को मिल रहा प्री-स्कूल शिक्षा और पोषण का लाभ’
वर्तमान में सलकापारा आंगनबाड़ी केंद्र से 35 बच्चे नियमित रूप से लाभान्वित हो रहे हैं। बच्चों को प्री-स्कूल शिक्षा के साथ पोषण आहार उपलब्ध कराया जा रहा है। नए भवन में पर्याप्त स्थान मिलने से बच्चों को सहज एवं सुरक्षित वातावरण में सीखने और विभिन्न गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिल रहा है।

आंगनबाड़ी केंद्र प्रारंभिक बाल्यावस्था में बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा से जुड़ी सेवाओं का महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे में सुविधायुक्त भवन उपलब्ध होने से इन सेवाओं के संचालन में सुगमता आई है।

’गर्भवती माताओं और किशोरी बालिकाओं को भी मिल रहा लाभ’
सलकापारा आंगनबाड़ी केंद्र केवल बच्चों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां गर्भवती माताओं और किशोरी बालिकाओं को भी स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

वर्तमान में 5 गर्भवती माताएं केंद्र से नियमित स्वास्थ्य जांच एवं पोषण परामर्श का लाभ ले रही हैं। वहीं 17 किशोरी बालिकाएं पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा से लाभान्वित हो रही हैं।

नए भवन के उपलब्ध होने से इन हितग्राहियों को भी केंद्र में बेहतर वातावरण और आवश्यक सुविधाएं मिल रही हैं। इससे आंगनबाड़ी केंद्र की सेवाओं का लाभ लेने वाले हितग्राहियों की सुविधा में वृद्धि हुई है।

’भवन बनने के बाद बढ़ी बच्चों और महिलाओं की उपस्थिति’
नए भवन के निर्माण के बाद आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों और महिलाओं की उपस्थिति में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पहले जहां सीमित जगह और मूलभूत सुविधाओं की कमी के कारण केंद्र के संचालन में कठिनाइयां थीं, वहीं अब पर्याप्त स्थान और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होने से हितग्राही नियमित रूप से केंद्र की सेवाओं का लाभ ले रहे हैं।

सुरक्षित एवं आकर्षक वातावरण बच्चों को केंद्र से जोड़ने में सहायक बना है। पर्याप्त स्थान होने से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी बच्चों के लिए विभिन्न गतिविधियों को निर्धारित समय पर व्यवस्थित तरीके से संचालित कर पा रही हैं।

’आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने साझा किया अनुभव’
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता रजनी पैकरा ने बताया कि पहले केंद्र तंग जगह में संचालित होता था। बच्चों को बैठाने में काफी परेशानी होती थी और सभी गतिविधियां व्यवस्थित रूप से कराना मुश्किल था। अब नया भवन बनने से पर्याप्त जगह उपलब्ध हो गई है। बच्चे खुशी-खुशी केंद्र आते हैं और सभी गतिविधियां समय पर संचालित हो रही हैं।

उन्होंने बताया कि नए भवन में रसोई, स्टोर, शौचालय, बाथरूम और पेयजल जैसी सुविधाएं उपलब्ध होने से केंद्र के दैनिक संचालन में भी काफी सुविधा हुई है।

’योजनाओं के अभिसरण से ग्रामीण क्षेत्र में मजबूत हुई आधारभूत सुविधा’

सलकापारा आंगनबाड़ी केंद्र का नवनिर्मित भवन योजनाओं के प्रभावी अभिसरण का उदाहरण है। महिला एवं बाल विकास विभाग के आईसीडीएस तथा विकसित भारत जी राम जी योजना के संसाधनों को एक साथ उपयोग में लाकर गांव में ऐसी स्थायी परिसंपत्ति का निर्माण किया गया है, जिसका लाभ लंबे समय तक बच्चों और ग्रामीण समुदाय को मिलेगा।

इस पहल से एक ओर जहां बच्चों को सुरक्षित वातावरण में प्रारंभिक शिक्षा एवं पोषण की सुविधा प्राप्त हो रही है, वहीं गर्भवती माताओं को स्वास्थ्य एवं पोषण परामर्श और किशोरी बालिकाओं को स्वास्थ्य एवं पोषण शिक्षा मिल रही है। भवन निर्माण से 494 मानव दिवस का रोजगार भी सृजित हुआ है।

इस प्रकार सलकापारा का आंगनबाड़ी केंद्र केवल एक भवन का निर्माण नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र में बच्चों के बेहतर भविष्य, मातृ एवं किशोरी स्वास्थ्य, पोषण सेवाओं की पहुंच और स्थानीय स्तर पर आधारभूत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण की दिशा में की गई महत्वपूर्ण पहल का उदाहरण बन गया है। योजनाओं के अभिसरण से निर्मित यह सुविधा केंद्र आने वाली पीढ़ी के पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा को मजबूत आधार प्रदान कर रहा है।

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