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आपरेशन सिपाही रक्षा सूत्र 0.4 अभियान के तहत सरगुजा की महिलाओं ने सैनिक भाइयों के लिए भेजा रक्षा सूत्र

सीमा पर तैनात जवानों तक पहुंचेगा छत्तीसगढ़ की बहनों का स्नेह, सम्मान और आशीर्वाद- महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े

 

अम्बिकापुर 16 अगस्त 2026/ रक्षाबंधन के पावन अवसर पर देश की सीमाओं की रक्षा में तैनात सैनिक भाइयों के प्रति सम्मान, स्नेह और आभार व्यक्त करने के उद्देश्य से ‘ऑपरेशन सिपाही रक्षा सूत्र 0.4’ अभियान के अंतर्गत सरगुजा संभाग की महिलाओं एवं स्काउट-गाइड द्वारा बड़ी संख्या में रक्षा सूत्र एकत्रित कर सैनिकों के लिए भेजे गए। अंबिकापुर के सर्किट हाउस में आयोजित कार्यक्रम में महिलाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए देश की रक्षा में समर्पित जवानों के लिए रक्षा सूत्र प्रदान किए।

 

कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। उन्होंने सैनिक भाइयों के लिए रक्षा सूत्र भेजते हुए कहा कि यह लगातार चैथा वर्ष है, जब छत्तीसगढ़ की महिलाओं की ओर से सरहद पर तैनात जवानों के लिए रक्षा सूत्र भेजे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है कि प्रदेश की महिलाएं देश की रक्षा में दिन-रात डटे सैनिक भाइयों के प्रति अपना स्नेह और सम्मान प्रकट कर रही हैं।

 

श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि त्योहारों के अवसर पर जब परिवार के सदस्य एक-दूसरे के साथ रहते हैं, उस समय हमारे सैनिक भाई देश की सीमाओं पर तैनात रहकर राष्ट्र की सुरक्षा का दायित्व निभाते हैं। वे अपने परिवार से दूर रहते हुए देशवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। ऐसे में बहनों द्वारा भेजा गया यह रक्षा सूत्र उनके लिए केवल राखी नहीं, बल्कि बहनों का प्यार, स्नेह, सम्मान और आशीर्वाद लेकर पहुंच रहा है।

 

उन्होंने कहा कि रक्षा सूत्र के माध्यम से सैनिक भाइयों को यह संदेश दिया जा रहा है कि देश की माताएं, बहनें और पूरा समाज उनके साथ खड़ा है। यह भावनात्मक जुड़ाव निश्चित रूप से सैनिकों के मनोबल को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

 

श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि सैनिकों और समाज के बीच भावनात्मक संबंध को मजबूत करने वाला अभियान है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की महिलाओं द्वारा अपने हाथों से तैयार एवं भेजे गए रक्षा सूत्र सैनिकों तक छत्तीसगढ़ की बहनों का स्नेह पहुंचाने का माध्यम बनेंगे।

 

चैथे वर्ष में पहुंचा ‘सिपाही रक्षा सूत्र’ अभियान

कार्यक्रम में अभियान के संयोजक एवं पूर्व सैनिक महासभा के अध्यक्ष श्री महेंद्र प्रताप सिंह राणा ने अभियान की जानकारी देते हुए बताया कि ‘सिपाही रक्षा सूत्र’ अभियान पिछले चार वर्षों से संचालित किया जा रहा है। इसकी शुरुआत छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से हुई थी। अभियान के माध्यम से प्रदेश की बहनों द्वारा देश की सीमाओं पर तैनात सैनिकों के लिए रक्षा सूत्र भेजे जा रहे हैं।

 

उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में अभियान के पहले वर्ष लगभग 6 लाख 71 हजार रक्षा सूत्र भेजे गए। वर्ष 2024 में लगभग 9 लाख तथा वर्ष 2025 में 12 लाख 21 हजार रक्षा सूत्र सैनिकों तक पहुंचाए गए। इस प्रकार पिछले तीन वर्षों में छत्तीसगढ़ की माटी से लगभग 27 लाख 92 हजार रक्षा सूत्र भारतीय सैनिकों के सम्मान में भेजे जा चुके हैं।

 

उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 में अभियान का चैथा चरण ‘आपरेशन सिपाही रक्षा सूत्र 0.4’ के रूप में संचालित किया जा रहा है। इस वर्ष छत्तीसगढ़ से बाहर निकलने तक लगभग 21 लाख रक्षा सूत्र एकत्रित होने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष विशेष रूप से देश की थल सेना, जल सेना और वायु सेना तीनों सेनाओं के सैनिकों तक छत्तीसगढ़ की माटी से रक्षा सूत्र पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

 

अंबिकापुर से जशपुर होते हुए रांची रवाना होगा अभियान

अंबिकापुर में आयोजित कार्यक्रम के बाद रक्षा सूत्रों को आगे निर्धारित मार्ग से भेजा जाएगा। अभियान के तहत रक्षा सूत्रों से भरी वाहन रैली अंबिकापुर से जशपुर होते हुए रांची की ओर रवाना होगी। इसके पश्चात विभिन्न माध्यमों से देश के अलग-अलग क्षेत्रों में तैनात सैनिकों तक रक्षा सूत्र पहुंचाए जाएंगे।

 

सैनिकों की भावनाओं का भी रखा जाता है विशेष ध्यान

अभियान के संयोजक श्री महेंद्र प्रताप सिंह राणा ने बताया कि सैन्य इकाइयों और बैरकों में अनेक सैनिक एक साथ रहते हैं। ऐसी स्थिति में यदि किसी एक सैनिक के पास राखी पहुंचती है और दूसरे सैनिक को राखी नहीं मिल पाती, तो उसके मन में स्वाभाविक रूप से भावनात्मक पीड़ा उत्पन्न हो सकती है।

 

उन्होंने बताया कि कई बार राखी प्राप्त करने वाला सैनिक भी अपने साथी की भावनाओं का सम्मान करते हुए अपनी राखी सार्वजनिक नहीं करता। वह उसे सुरक्षित रखकर मंदिर में जाकर बांध लेता है। उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल राखियां पहुंचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि सैनिकों की भावनाओं, आपसी भाईचारे और संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए संचालित किया जा रहा है।

 

रक्षा सूत्र के माध्यम से राष्ट्रसेवा को नमन

कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं एवं स्काउट-गाइड की सदस्यों ने देश की सीमाओं पर तैनात सैनिकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त की। सैनिक अपने परिवार से दूर रहकर राष्ट्र की सुरक्षा में समर्पित भाव से जुटे हुए हैं। उनके त्याग, समर्पण और राष्ट्रसेवा के प्रति सम्मान व्यक्त करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। रक्षा सूत्र भेजकर महिलाओं ने सैनिक भाइयों को यह संदेश दिया कि पूरा देश उनके साथ खड़ा है। महिलाओं द्वारा स्नेहपूर्वक भेजे गए रक्षा सूत्र जब देश की सीमाओं पर तैनात जवानों की कलाइयों पर बंधेंगे, तो उन्हें छत्तीसगढ़ की बहनों के प्रेम, सम्मान और आशीर्वाद का एहसास कराएंगे।

 

कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती निरूपा सिंह, श्री किसन सिंह, सचिव,भूतपूर्व सैनिक महासभा, पूर्व सांसद श्री कमल भान सिंह, श्री भारत सिंह सिसौदिया, श्री विनोद हर्ष, श्रीमती अरूणा सिंह सहित जन-प्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

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