
रायपुर, 22 सितम्बर 2026/ किसी के लिए व्हील चेयर महज एक सहायक उपकरण हो सकती है, लेकिन एक दिव्यांग विद्यार्थी के लिए यही साधन शिक्षा, आत्मनिर्भरता और अपने सपनों तक पहुंचने का रास्ता बन सकती है। शासन की जनकल्याणकारी पहल से लाभान्वित हुए योगेश कुमार नुरेटी की सेवा की कहानी इसी बदलाव की मिसाल है। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत सेवा, सुशासन और जनकल्याण की भावना से दिव्यांगजनों को शासन की योजनाओं का लाभ दिलाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों ने योगेश के जीवन में नई उम्मीद जगाई है।
मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के निवासी योगेश कुमार नुरेटी दिव्यांग हैं। शिक्षा प्राप्त करने के दौरान उन्हें विद्यालय आने-जाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। व्हील चेयर की सुविधा नहीं होने के कारण स्कूल तक पहुंचना और नियमित रूप से पढ़ाई जारी रखना उनके लिए चुनौती बना हुआ था। पढ़ने की इच्छा और आगे बढ़ने का सपना था, लेकिन शारीरिक कठिनाइयां उनकी राह में बाधा बन रही थीं।
इसी दौरान समाज कल्याण विभाग द्वारा दिव्यांगजनों को शासकीय योजनाओं से लाभान्वित करने के लिए संचालित प्रक्रिया के तहत योगेश का मेडिकल बोर्ड के माध्यम से यूडीआईडी कार्ड बनाया गया। इसके बाद विभाग की ओर से उन्हें व्हील चेयर प्रदान की गई। यह सहायता योगेश के लिए केवल एक उपकरण मिलने तक सीमित नहीं रही, बल्कि उनके जीवन में गतिशीलता और आत्मविश्वास लेकर आई।
व्हील चेयर मिलने के बाद योगेश के लिए विद्यालय तक आना-जाना पहले की तुलना में काफी आसान हो गया। अब वे अधिक आत्मविश्वास के साथ अपनी पढ़ाई जारी रख पा रहे हैं। रोजमर्रा की गतिविधियों में भी उन्हें सुविधा मिली है। शिक्षा के रास्ते में जो शारीरिक बाधा उनके सामने थी, उसे कम करने में शासन की इस सहायता ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। योगेश कहते हैं कि मेरे लिए यह व्हील चेयर केवल एक साधन नहीं है, बल्कि शिक्षा और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। पहले विद्यालय आने-जाने में काफी परेशानी होती थी, लेकिन अब मैं पहले की तुलना में अधिक आसानी और आत्मविश्वास के साथ अपनी पढ़ाई जारी रख पा रहा हूं। मुझे विश्वास है कि सही सहयोग और अवसर मिले तो दिव्यांगजन भी अपने सपनों को पूरा कर सकते हैं।
योगेश की कहानी यह दर्शाती है कि सुशासन का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि जरूरतमंद व्यक्ति तक सही समय पर सहायता पहुंचाकर उसके जीवन को आसान बनाना है। यूडीआईडी कार्ड के माध्यम से दिव्यांगजन की पहचान और पात्रता सुनिश्चित करने से लेकर आवश्यक सहायक उपकरण उपलब्ध कराने तक की प्रक्रिया उनके अधिकारों और सुविधाओं तक पहुंच को आसान बनाती है।









