
अम्बिकापुर 22 सितम्बर 2026/ सेवा संकल्प अभियान के तहत जनकल्याणकारी योजनाओं से ग्रामीण परिवारों के जीवन में आ रहे सकारात्मक बदलाव की कहानियां सामने आ रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण, सिंचाई की सुविधा और आजीविका के नए अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का लाभ हितग्राहियों को मिल रहा है। ऐसी ही सेवा की कहानी हितग्राही उमेश प्रसाद गुप्ता की है, जिनकी निजी भूमि पर डबरी निर्माण होने से खेती के लिए सिंचाई का साधन उपलब्ध हुआ है। इसके साथ ही मत्स्य बीज मिलने से उन्होंने मछली पालन भी शुरू किया है, जिससे भविष्य में अतिरिक्त आय की उम्मीद जगी है।
अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत बकिरमा के रहने वाले उमेश प्रसाद गुप्ता बताते हैं कि पहले उनकी भूमि पर सिंचाई का पर्याप्त साधन उपलब्ध नहीं था। पानी की व्यवस्था नहीं होने के कारण खेती के कार्य में परेशानी होती थी। ग्रामीण रोजगार योजना के तहत उनकी भूमि पर डबरी निर्माण के लिए 3 लाख रुपए की राशि स्वीकृत हुई और डबरी की खुदाई का कार्य पूरा किया गया। डबरी बनने से अब खेत में पानी की उपलब्धता बढ़ने के साथ सिंचाई के लिए भी एक स्थायी साधन मिला है।
डबरी में मछली पालन से आय बढ़ाने की तैयारी
डबरी निर्माण का लाभ केवल सिंचाई तक सीमित नहीं रहा। उमेश को मत्स्य पालन के लिए मत्स्य विभाग से मछली बीज भी उपलब्ध कराया गया है। उन्होंने डबरी में मत्स्य बीज डालकर मछली पालन की शुरुआत कर दी है। उनका कहना है कि मछलियां तैयार होने के बाद बिक्री से अतिरिक्त आमदनी प्राप्त होगी। इससे खेती के साथ परिवार के लिए आय का एक और माध्यम विकसित होगा।
उन्होंने बताया कि अपनी ही भूमि पर बनी डबरी से अब एक ओर सिंचाई की सुविधा मिली है, वहीं दूसरी ओर उसी जल संरचना का उपयोग मछली पालन के लिए किया जा रहा है। इससे उपलब्ध संसाधन का बेहतर उपयोग होने के साथ आजीविका के अवसर भी बढ़े हैं।
“सिंचाई का साधन मिला, मछली पालन से होगी अतिरिक्त आय”
हितग्राही उमेश प्रसाद गुप्ता ने योजना से मिले लाभ पर खुशी जाहिर करते हुए बताया कि पहले उनके पास सिंचाई का साधन नहीं था। अब डबरी का निर्माण पूरा हो चुका है और मछली पालन के लिए मत्स्य बीज भी प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि मछली पालन से आने वाले समय में लाभ मिलेगी और इससे परिवार को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
उमेश ने योजना का लाभ मिलने पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।
जल संरक्षण के साथ आजीविका को मिल रहा संबल
डबरी जैसी जल संरचनाएं ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षा जल के संरक्षण के साथ खेतों में सिंचाई की उपलब्धता बढ़ाने में उपयोगी साबित हो रही हैं। वहीं इन जल संरचनाओं में मत्स्य पालन जैसी आजीविका गतिविधियों को जोड़ने से हितग्राहियों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर भी तैयार हो रहे हैं। उमेश प्रसाद गुप्ता की कहानी बताती है कि जल संरक्षण, खेती और आजीविका को एक साथ जोड़कर ग्रामीण परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में योजनाओं का लाभ जमीन पर बदलाव का माध्यम बन रहा है।








