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आर्थिक तंगी से आत्मनिर्भरता तक पहुंचा मोहन सिंह का परिवार

शुकरत्रयी इकाई योजना ने दिखाई नई राह, रूपये 40 हजार की आय बढ़कर हुई 3 लाख रूपये सालाना
कोरबा 24 सितम्बर 2026/
कभी परिवार की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए मजदूरी और पारंपरिक स्वरोजगार पर निर्भर रहने वाले पाली विकासखंड के ग्राम हरनमुड़ी निवासी मोहन सिंह सरोतिया के जीवन में अब आत्मनिर्भरता और आर्थिक मजबूती ने जगह बना ली है। दस सदस्यों के परिवार की जिम्मेदारी संभालने वाले मोहन सिंह के लिए पशुपालन का व्यवसाय आज उनकी आय का मजबूत जरिया बन चुका है। शासन की शुकरत्रयी इकाई योजना और पशुधन विकास विभाग के मार्गदर्शन ने उनकी मेहनत को नई दिशा दी और आर्थिक तंगी से बाहर निकलने का अवसर दिया।

जब कमाई सीमित थी और जिम्मेदारियां बड़ी

50 वर्षीय मोहन सिंह बताते हैं कि कुछ वर्ष पहले परिवार की जिम्मेदारियां तो बड़ी थीं, लेकिन आय के साधन सीमित थे। मजदूरी और पारंपरिक स्वरोजगार से सालभर में करीब 40 हजार रुपये की आय हो पाती थी। इतनी कम आमदनी में दस सदस्यों वाले परिवार का भरण-पोषण, बच्चों की जरूरतें और रोजमर्रा के खर्च पूरे करना उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं था।
पशुपालन एवं सुकर पालन को व्यवसाय के रूप में आगे बढ़ाने की इच्छा थी, लेकिन पर्याप्त संसाधन और तकनीकी जानकारी का अभाव उनके सामने बड़ी बाधा था। सामाजिक झिझक और अन्य कठिनाइयों के बीच भी उन्होंने अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने की उम्मीद नहीं छोड़ी।

सरकारी योजना ने दिया आत्मनिर्भरता का अवसर

पशुधन विकास विभाग द्वारा गांवों में किए जा रहे मैदानी संपर्क और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से मोहन सिंह को शुकरत्रयी इकाई योजना की जानकारी मिली। योजना उनके लिए उम्मीद की नई किरण बनकर आई। उन्होंने योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन किया और वर्ष 2017-18 में उन्हें शुकरत्रयी इकाई स्वीकृत हुई।
योजना के तहत उन्हें 75 हजार रुपये की सहायता के साथ संतुलित आहार उपलब्ध कराया गया। इसके साथ ही पशुधन विकास विभाग के अधिकारियों ने उन्हें सुकर पालन के वैज्ञानिक प्रबंधन, उचित आहार, देखभाल और टीकाकरण संबंधी जानकारी भी दी। शासकीय सहयोग और विभागीय मार्गदर्शन से मोहन सिंह ने सुकर पालन को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाना शुरू किया।

मेहनत और मार्गदर्शन ने बदल दी तस्वीर
योजना से मिली सहायता को मोहन सिंह ने केवल आर्थिक सहयोग के रूप में नहीं देखा, बल्कि इसे अपने व्यवसाय को खड़ा करने का अवसर बनाया। उन्होंने पशुओं की बेहतर देखभाल, संतुलित आहार और समय पर टीकाकरण पर विशेष ध्यान दिया। धीरे-धीरे सुकर पालन का व्यवसाय बढ़ता गया और इससे होने वाली आमदनी भी बढ़ने लगी।
जिस परिवार की वार्षिक आय कभी 40 हजार रुपये के आसपास थी, आज वही आय बढ़कर करीब 3 लाख रुपये प्रतिवर्ष हो गई है। आय में इस वृद्धि ने परिवार के जीवन में बड़ा बदलाव ला दिया है। अब मोहन सिंह अपने परिवार की जरूरतें पहले की तुलना में बेहतर ढंग से पूरी कर पा रहे हैं और बच्चों की शिक्षा एवं भविष्य को लेकर भी उनका भरोसा मजबूत हुआ है।

आर्थिक मजबूती के साथ बढ़ा सम्मान

आर्थिक स्थिति सुधरने के साथ मोहन सिंह के परिवार की जीवनशैली में भी सकारात्मक बदलाव आया है। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि जो काम कभी मजबूरी और सीमित साधनों के बीच किया जाता था, वही आज आत्मनिर्भरता और सम्मान का माध्यम बन गया है।
आज गांव में मोहन सिंह को एक सफल पशुपालक के रूप में पहचान मिल रही है। उनके अनुभव ने यह साबित किया है कि यदि मेहनत के साथ सही मार्गदर्शन और शासकीय योजना का सहयोग मिल जाए, तो ग्रामीण परिवार अपने पारंपरिक रोजगार को भी सफल व्यवसाय में बदल सकते हैं।

मोहन सिंह बोले-योजना ने बदल दी जिंदगी

मोहन सिंह सरोतिया कहते हैं, “जब परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा था, उस समय पशुधन विकास विभाग की शुकरत्रयी योजना मेरे लिए बहुत बड़ा सहारा बनी। योजना से मिली सहायता और विभाग के मार्गदर्शन से मैंने सुकर पालन को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाया। आज मेरी आय पहले की तुलना में कई गुना बढ़ गई है और परिवार की जरूरतें बेहतर तरीके से पूरी हो रही हैं। इस योजना ने मेरी और मेरे परिवार की आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति बदल दी है। मैं शासन और पशुधन विकास विभाग का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं।”
मोहन सिंह की सफलता की यह कहानी बताती है कि शासकीय योजनाओं का लाभ जब मेहनत और सही मार्गदर्शन के साथ जुड़ता है, तो आर्थिक तंगी के बीच भी आत्मनिर्भरता की राह तैयार होती है। शुकरत्रयी इकाई योजना ने मोहन सिंह को केवल आजीविका का साधन नहीं दिया, बल्कि अपने परिवार के बेहतर भविष्य का भरोसा भी दिया है।

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