
‘हमर गांव हमर शाला’ अभियान के तहत प्राथमिक शालाओं में लागू होगी सामुदायिक शैक्षणिक सहयोगी व्यवस्था
एनआरएलएम कैडर के माध्यम से विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति एवं शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने का प्रयास
धमतरी, 29 सितंबर 2026। सेवा संकल्प अभियान अंतर्गत जिले की प्राथमिक शालाओं में विद्यार्थियों के सीखने के स्तर को बेहतर बनाने, मूलभूत साक्षरता एवं संख्या ज्ञान को मजबूत करने तथा बच्चों को उनकी शैक्षणिक आवश्यकताओं के अनुरूप अतिरिक्त सहयोग उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ‘हमर गांव हमर शाला’ अभियान के अंतर्गत सामुदायिक शैक्षणिक सहयोगी व्यवस्था लागू करने की पहल की जा रही है। इसके तहत ऐसे प्राथमिक विद्यालयों को चिन्हांकित किया जाएगा, जहां विद्यार्थियों को अतिरिक्त शैक्षणिक सहयोग की आवश्यकता है। इन विद्यालयों में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध प्रशिक्षित मानव संसाधन के रूप में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के चयनित कैडर सदस्यों को सामुदायिक शैक्षणिक सहयोगी के रूप में जोड़ा जाएगा।
यह पहल प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन के शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार प्रस्ताव के तहत की जा रही है। सामुदायिक शैक्षणिक सहयोगियों को आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान कर प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों के साथ उनकी सीखने की आवश्यकताओं के अनुरूप कार्य कराया जाएगा। विशेष रूप से बच्चों में पढ़ने, लिखने, समझने और बुनियादी गणितीय कौशल को विकसित करने पर ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति, कक्षा में सहभागिता तथा सीखने के स्तर में सुधार के लिए भी सहयोगात्मक प्रयास किए जाएंगे।
स्थानीय समुदाय की भागीदारी से मजबूत होगी शिक्षा व्यवस्था
मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री जयंत नाहटा ने बताया कि ‘हमर गांव हमर शाला’ अभियान का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यालयी शिक्षा को समुदाय से जोड़ते हुए बच्चों के लिए बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार करना है। सामुदायिक शैक्षणिक सहयोगी व्यवस्था के माध्यम से स्थानीय स्तर पर उपलब्ध मानव संसाधनों की सहभागिता सुनिश्चित करते हुए विद्यार्थियों को अतिरिक्त शैक्षणिक सहयोग दिया जाएगा। इससे बच्चों को उनकी सीखने की गति और आवश्यकता के अनुरूप सहयोग मिलने के साथ विद्यालयों में सीखने के अनुकूल वातावरण विकसित करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि इस पहल की सफलता के लिए ग्राम पंचायत, शाला विकास एवं प्रबंधन समिति, शिक्षक, एनआरएलएम कैडर तथा स्थानीय समुदाय के बीच समन्वय महत्वपूर्ण होगा। समुदाय की सक्रिय भागीदारी से विद्यालयों के प्रति स्वामित्व की भावना मजबूत होगी और बच्चों की शिक्षा के प्रति अभिभावकों एवं ग्रामीणों की सहभागिता भी बढ़ेगी।
प्रशिक्षित सहयोगी शिक्षकों के साथ मिलकर करेंगे कार्य
इस व्यवस्था के अंतर्गत प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन के सहयोग से एनआरएलएम कैडर के चयनित सदस्यों को आवश्यक शैक्षणिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें बच्चों के सीखने के स्तर को समझने, आयु एवं कक्षा के अनुरूप शैक्षणिक गतिविधियां संचालित करने तथा बुनियादी भाषा एवं गणितीय दक्षताओं को विकसित करने से संबंधित आवश्यक मार्गदर्शन दिया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद ये सामुदायिक शैक्षणिक सहयोगी संबंधित प्राथमिक शालाओं में शिक्षकों के समन्वय से विद्यार्थियों को अतिरिक्त शैक्षणिक सहयोग प्रदान करेंगे।
इस व्यवस्था से विद्यालय के नियमित शिक्षण कार्य में सहयोग मिलने के साथ ऐसे विद्यार्थियों पर विशेष ध्यान देने में मदद मिलेगी, जिन्हें पढ़ने, लिखने अथवा गणित की बुनियादी अवधारणाओं को समझने में अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता है। बच्चों की प्रगति का निरंतर अवलोकन करते हुए आवश्यकतानुसार शैक्षणिक सहयोग को और प्रभावी बनाने का प्रयास किया जाएगा।
अस्थायी एवं गैर-नियमित स्वरूप की होगी व्यवस्था
यह सामुदायिक शैक्षणिक सहयोगी व्यवस्था पूर्णतः अस्थायी एवं गैर-नियमित स्वरूप की होगी। इसका उद्देश्य विद्यालयों में नियमित शिक्षकों के स्थान पर वैकल्पिक व्यवस्था करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के सीखने के स्तर में सुधार के लिए उन्हें अतिरिक्त शैक्षणिक सहयोग उपलब्ध कराना है। शिक्षक विद्यालय में नियमित शैक्षणिक गतिविधियों का संचालन करते हुए सामुदायिक शैक्षणिक सहयोगियों के साथ समन्वय करेंगे।
‘हमर गांव हमर शाला’ अभियान के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था में विद्यालय और समुदाय के बीच सहभागिता को मजबूत करने, बच्चों की सीखने की बुनियाद को सुदृढ़ करने तथा प्रत्येक बच्चे को उसकी क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ने का अवसर देने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।









