
अम्बिकापुर 08 अक्टूबर 2026/ केंद्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं जरूरतमंद परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) के तहत संचालित आवास योजना विशेष पिछड़ी जनजाति के परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराकर उनके जीवन में सुरक्षा, स्थिरता और खुशहाली का नया अध्याय जोड़ रही है।
ऐसी ही सफलता की कहानी सरगुजा जिले के लुण्ड्रा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत ससौली के ग्राम चांगोरी निवासी पहाड़ी कोरवा जनजाति के हितग्राही श्री नोहर साय की है। उनका आवास वर्ष 2023-24 में स्वीकृत हुआ था। जिला मुख्यालय अंबिकापुर से लगभग 55 किलोमीटर दूर रहने वाले नोहर साय का परिवार पहले कच्चे मकान में रहता था। सीमित संसाधनों और कम आय के कारण पक्का मकान बनाना उनके लिए एक बड़ा सपना था।
पहले कच्चे मकान में रहते हुए परिवार को बारिश के दौरान छत से पानी टपकने और घर की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती थी। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण अपने खर्च पर पक्का मकान बनाना संभव नहीं हो पा रहा था। ऐसे में प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना उनके लिए उम्मीद की नई किरण बनकर आई।
योजना के अंतर्गत आवास स्वीकृत होने पर नोहर साय को अपने वर्षों पुराने सपने के साकार होने का भरोसा मिला। उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई से बचाई गई राशि और योजना से प्राप्त सहायता का उपयोग कर पक्के मकान का निर्माण पूरा किया। आज उनका परिवार अपने स्वयं के पक्के मकान में सुरक्षित और सुकून के साथ जीवन व्यतीत कर रहा है।
पक्का मकान मिलने से अब परिवार को बारिश में छत टपकने, घर ढहने और जहरीले जीव-जंतुओं से होने वाले खतरे की चिंता नहीं रहती। उनके जीवन में आए इस बदलाव ने न केवल आवास की समस्या दूर की है, बल्कि परिवार को बेहतर भविष्य के प्रति नया विश्वास भी दिया है।
श्री नोहर साय के लिए यह पक्का मकान केवल ईंट और सीमेंट से बना घर नहीं, बल्कि वर्षों से संजोए सपने के पूरे होने, सुरक्षित जीवन और सम्मान की नई पहचान है। प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना उनके परिवार के जीवन में खुशहाली लाने के साथ यह भी दर्शाती है कि शासन की योजनाओं का लाभ जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचने से उनके जीवन में वास्तविक परिवर्तन संभव है।
प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना से आज नोहर साय का परिवार पक्के घर में सुरक्षित जीवन जी रहा है। उनका यह बदलाव इस बात का प्रमाण है कि जनकल्याणकारी योजनाएं जरूरतमंदों के सपनों को साकार कर उन्हें बेहतर भविष्य की ओर आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करती हैं।
अम्बिकापुर 08 अक्टूबर 2026/ छत्तीसगढ़ शासन की राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन को बढ़ावा देने और हितग्राहियों को स्वरोजगार से जोड़ने में मददगार साबित हो रही है। योजना के तहत अनुदान प्राप्त कर लमगांव निवासी संध्या डेयरी व्यवसाय के माध्यम से अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं।
संध्या को वर्ष 2024 में राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना के तहत अनुदान प्राप्त हुआ। इससे उन्हें गायों के पालन-पोषण और डेयरी व्यवसाय को आगे बढ़ाने में सहायता मिली। वर्तमान में उन्हें प्रतिदिन लगभग 30 लीटर दूध प्राप्त होता है। दूध की बिक्री से रोजाना करीब 1,200 रुपये और महीने में लगभग 30 हजार रुपये की आय होती है। चारा-पानी एवं अन्य खर्चों को निकालने के बाद उन्हें प्रतिमाह लगभग 15 हजार रुपये की बचत हो रही है। इस प्रकार उनकी सालाना बचत करीब एक से डेढ़ लाख रुपये तक पहुंच रही है।
संध्या के लिए पशुपालन आय का स्थायी साधन बनने के साथ ही भविष्य में आर्थिक मजबूती का आधार भी बन रहा है। गायों से उन्हें तीन बछियां प्राप्त हुई हैं, जिन्हें वे भविष्य में प्रजनन के लिए तैयार कर रही हैं। इससे आने वाले समय में उनके पशुधन में वृद्धि होने और डेयरी व्यवसाय को और विस्तार देने की संभावनाएं हैं। संध्या ने योजना के तहत सहयोग प्रदान करने के लिए पशुपालन विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया।
अम्बिकापुर 08 अक्टूबर 2026/ राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के माध्यम से ग्रामीण महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। समूहों के माध्यम से बचत, ऋण और स्वरोजगार के अवसर मिलने से महिलाएं न केवल परिवार की आय बढ़ा रही हैं, बल्कि अपनी अलग पहचान भी बना रही हैं। सेवा संकल्प अभियान अंतर्गत ऐसी ही सेवा की कहानी है ग्राम पंचायत मेंड्रा खुर्द की श्रीमती पुष्पा राजवाड़े की है, जिन्होंने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर टेंट व्यवसाय शुरू किया और बाद में समूह से ऋण लेकर ट्रैक्टर खरीदा। आज वे खेती-किसानी के साथ ट्रैक्टर किराए पर देकर अतिरिक्त आमदनी अर्जित कर रही हैं और लखपति दीदी के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं।
समूह से जुड़कर बचत की शुरुआत, टेंट व्यवसाय से मिला स्वरोजगार का अवसर
श्रीमती पुष्पा राजवाड़े बताती हैं कि वे जय श्री शक्ति महिला स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं और समूह में लेखापाल का दायित्व निभा रही हैं। समूह से जुड़ने से पहले वे घरेलू कार्यों और खेती-किसानी तक सीमित थीं। बिहान से जुड़ने के बाद उन्होंने नियमित बचत शुरू की। बचत के साथ उनके मन में स्वयं का व्यवसाय शुरू करने का विचार आया। इसके बाद समूह के माध्यम से टेंट व्यवसाय की शुरुआत की। टेंट व्यवसाय से आमदनी होने लगी तो उनका आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने आजीविका के अन्य साधन विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाया।
समूह से ऋण लेकर खरीदा ट्रैक्टर, खेती में समय और मेहनत की बचत
पुष्पा बताती हैं कि पहले उनके परिवार में पारंपरिक तरीके से हल चलाकर खेती की जाती थी। इसमें अधिक समय और मेहनत लगती थी। कई बार कृषि कार्य समय पर पूरा करने में भी परेशानी होती थी। इस समस्या को दूर करने के लिए उन्होंने स्वयं सहायता समूह से ऋण लेकर ट्रैक्टर खरीदा।
ट्रैक्टर मिलने से अब उनके परिवार के लिए खेती करना आसान हो गया है। खेतों की जुताई सहित अन्य कृषि कार्य समय पर पूरे हो रहे हैं। इससे समय और श्रम दोनों की बचत हो रही है। इसके साथ ही ट्रैक्टर को किराए पर देकर भी परिवार अतिरिक्त आय अर्जित कर रहा है। उनके पति खेती-किसानी के साथ ट्रैक्टर चलाने का कार्य करते हैं।
पुष्पा का कहना है कि पहले खेती के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती थी, लेकिन अब ट्रैक्टर होने से कृषि कार्यों में सुविधा मिली है। साथ ही किराए से होने वाली कमाई परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मददगार बन रही है।
मछली पालन और बागवानी से भी जुड़ीं, आजीविका के बढ़े अवसर
पुष्पा राजवाड़े बताती हैं कि उनका स्वयं सहायता समूह मानसरोवर तालाब में मछली पालन और बागवानी का कार्य भी कर रहा है। समूह की महिलाएं इन गतिविधियों के माध्यम से आजीविका के नए अवसर विकसित कर रही हैं। टेंट व्यवसाय, कृषि कार्य, ट्रैक्टर से अतिरिक्त कमाई और समूह की अन्य आजीविका गतिविधियों ने पुष्पा को आर्थिक रूप से आगे बढ़ने का अवसर दिया है।
लखपति दीदी बनकर मिली नई पहचान, बच्चों की बेहतर परवरिश में मिल रहा सहयोग
पुष्पा राजवाड़े के परिवार में उनके पति और दो बच्चे हैं। वे बताती हैं कि समूह से जुड़ने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है। स्वरोजगार से होने वाली आमदनी से बच्चों के पालन-पोषण और परिवार की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल रही है।
वे गर्व के साथ कहती हैं, ‘‘मुझे खुशी है कि मैं बिहान समूह से जुड़कर लखपति दीदी बनी हूं। समूह से मुझे बहुत सहयोग मिला है। आज हम खेती-किसानी के साथ अन्य व्यवसाय भी कर रहे हैं और अपने बच्चों की अच्छी तरह देखभाल कर पा रहे हैं।’’
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार
पुष्पा राजवाड़े ने बिहान योजना के माध्यम से मिले सहयोग के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें बचत करने, ऋण प्राप्त करने और व्यवसाय शुरू करने का अवसर मिला। इससे वे आर्थिक रूप से आगे बढ़ सकीं।
पुष्पा राजवाड़े की सफलता बताती है कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण महिलाएं बचत और स्वरोजगार को अपनाकर अपनी आजीविका मजबूत कर रही हैं। बिहान से मिला सहयोग उन्हें आत्मनिर्भरता के साथ परिवार की आर्थिक प्रगति में भागीदार बना रहा है।
अम्बिकापुर 08 अक्टूबर 2026/ आर्थिक तंगी और सीमित संसाधनों के कारण पक्का मकान बनाना कई जरूरतमंद परिवारों के लिए मुश्किल होता है। ऐसे परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण सुरक्षित आशियाने का सपना पूरा करने में मददगार बन रही है। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत जनकल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों की ऐसी ही सेवा की कहानी है श्रीमती भुइरी बाई की। पति के निधन के बाद अकेले जीवन गुजार रहीं भुइरी बाई को पक्का आवास मिलने से कच्चे मकान की परेशानियों से राहत मिली है। साथ ही रसोई गैस की सुविधा से दैनिक जीवन भी आसान हुआ है।
कच्चे मकान में होती थी परेशानी, पति के नाम से स्वीकृत हुआ आवास
श्रीमती भुइरी बाई बताती हैं कि पहले वे अपने पति स्वर्गीय कांशीराम के साथ कच्चे मकान में रहती थीं। मकान की स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता था। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने से स्वयं के खर्च पर पक्का मकान बनवाना संभव नहीं था। इसी बीच उनके पति के नाम से प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत आवास स्वीकृत हुआ, जिससे पक्के घर की उम्मीद जगी।
भुइरी बाई बताती हैं कि आवास स्वीकृत होने के बाद उनके पति का निधन हो गया। पति के गुजर जाने से वे अकेली रह गईं। ऐसे कठिन समय में पक्का आवास उनके जीवन का बड़ा सहारा बना। अब वे अपने पक्के मकान में रह रही हैं और पहले की तुलना में बेहतर आवासीय सुविधा मिलने से संतुष्ट हैं।
रसोई गैस मिलने से खाना बनाना हुआ आसान
भुइरी बाई को आवास के साथ रसोई गैस की सुविधा भी मिली है। वे बताती हैं कि अब गैस चूल्हे पर भोजन तैयार करती हैं, जिससे रोजमर्रा के कामों में सुविधा हो रही है। अकेले रहने के कारण घरेलू कार्यों की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं पर है। ऐसे में पक्का मकान और रसोई गैस की सुविधा उनके दैनिक जीवन में मददगार साबित हो रही है।
अपने दम पर घर बनाना संभव नहीं था, सरकार ने पूरा किया सपना
भुइरी बाई भावुक होकर बताती हैं, ‘‘पहले कच्चे मकान में रहती थी, तब बहुत दिक्कत होती थी। मेरे पति के नाम से आवास निकला था, लेकिन बाद में उनका निधन हो गया। अब मैं अकेले रहती हूं। मेरी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि अपने पैसे से पक्का मकान बनवा सकूं। सरकार ने अच्छा घर बनाकर दिया है। अब घर में अच्छी सुविधा है और गैस पर खाना भी बनाती हूं।’
उन्होंने कहा कि गरीब परिवारों की जरूरतों को सरकार सुन रही है और योजनाओं के माध्यम से उन्हें सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। पक्का मकान मिलने से उनकी वर्षों पुरानी इच्छा पूरी हुई है।
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार
भुइरी बाई ने पक्का आवास और अन्य सुविधाएं मिलने पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी तथा मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पक्का मकान बनाकर हमारा सपना पूरा किया है।’
भुइरी बाई की कहानी दर्शाती है कि शासन की आवास एवं अन्य जनकल्याणकारी योजनाएं जरूरतमंद परिवारों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से ऐसे हितग्राहियों की कहानियां सामने आ रही हैं, जिनके जीवन में शासकीय योजनाओं से सकारात्मक बदलाव आया है।









