
धान के बाद खाली खेतों में दलहन-तिलहन की खेती करने की अपील*
*- पीएम-आशा के तहत समर्थन मूल्य पर खरीदी की सुविधा से किसानों को मिलेगा लाभ*
*- किसान रबी में द्वि-फसली खेती अपनाकर बढ़ाएं आमदनी*
राजनांदगांव 09 अक्टूबर 2026। केन्द्र सरकार द्वारा रबी विपणन सीजन 2027-28 के लिए रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में वृद्धि किए जाने से किसानों को दलहन एवं तिलहन फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। विशेष रूप से सरसों, मसूर एवं अन्य रबी फसलों के समर्थन मूल्य में वृद्धि से किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ की उम्मीद है। जिले में कृषि विभाग द्वारा किसानों को धान की खेती के बाद खाली रहने वाले खेतों में रबी फसलें लेने तथा एक ही खेत से वर्ष में दो फसलें प्राप्त कर अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
राजनांदगांव जिले में लगभग 1 लाख 72 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती की जाती है, लेकिन इसके बाद पूरे क्षेत्र में रबी फसलों की खेती नहीं हो पाती। वर्तमान में लगभग 83 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में ही रबी फसलें ली जाती हैं। इस प्रकार धान की कटाई के बाद बड़ी मात्रा में कृषि भूमि रबी मौसम में खाली रह जाती है। यदि इस खाली भूमि पर उपलब्ध नमी, सिंचाई सुविधाओं एवं स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार उपयुक्त रबी फसलों की खेती की करने से जिले के द्वि-फसली क्षेत्र में वृद्धि के साथ कृषकों की वार्षिक आय बढ़ाने की भी अच्छी संभावना है।
*सरसों एवं मसूर के समर्थन मूल्य में उल्लेखनीय वृद्धि*
केन्द्र सरकार द्वारा रबी विपणन सीजन 2027-28 के लिए घोषित एमएसपी के अनुसार सरसों का समर्थन मूल्य 6200 रूपए से बढ़ाकर 6613 रूपए प्रति क्विंटल तथा मसूर का समर्थन मूल्य 7000 रूपए से बढ़ाकर 7390 रूपए प्रति क्विंटल किया गया है। इस प्रकार सरसों के समर्थन मूल्य में 413 रूपए तथा मसूर में 390 रूपए प्रति क्विंटल की वृद्धि हुई है। इसके अतिरिक्त कुसुम, चना, जौ एवं गेहूं के समर्थन मूल्य में भी वृद्धि की गई है। समर्थन मूल्य में इस वृद्धि से किसानों को दलहन एवं तिलहन फसलों की खेती के लिए बेहतर मूल्य मिलने की संभावना है। साथ ही समर्थन मूल्य पर उपज की खरीदी की व्यवस्था से किसानों को अपनी फसल के विपणन की योजना बनाने में सहायता मिलेगी।
*पीएम-आशा के तहत खरीदी की सुविधा, किसानों को मिलेगा बाजार का भरोसा*
दलहन एवं तिलहन फसलों के उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए पीएम-आशा योजना के अंतर्गत निर्धारित प्रावधानों के अनुसार पात्र उपज की समर्थन मूल्य पर खरीदी की व्यवस्था की जा रही है। जिले के सभी विकासखंडों में चना, मसूर, सरसों एवं अरहर जैसी फसलों की खरीदी के लिए उपार्जन केंद्र स्थापित किए गए हैं। किसानों को इन केंद्रों के माध्यम से निर्धारित पात्रता, पंजीयन, गुणवत्ता मानकों एवं खरीदी संबंधी दिशा-निर्देशों के अनुसार अपनी उपज समर्थन मूल्य पर बेचने की सुविधा मिलेगी। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार खरीदी गई उपज का भुगतान 15 दिवस के भीतर किए जाने की व्यवस्था है। इससे किसानों को उपज बेचने के बाद भुगतान प्राप्त करने में सुविधा होगी तथा बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव की स्थिति में समर्थन मूल्य पर खरीदी एक महत्वपूर्ण सहारा बन सकती है।
*धान के बाद खेत खाली न छोड़ें, अपनाएं रबी फसलें*
कृषि विभाग द्वारा जिले के किसानों से धान की कटाई के बाद अपने खेतों को खाली छोडऩे के बजाय उपलब्ध संसाधनों एवं खेत की परिस्थितियों के अनुरूप रबी फसलों की खेती अपनाने की अपील की है। किसान तिवड़ा, चना, मसूर, सरसों, अलसी, गेहूं एवं अन्य उपयुक्त रबी फसलों का चयन कर सकते हैं। फसल का चयन मिट्टी, उपलब्ध नमी, सिंचाई सुविधा, बीज की उपलब्धता एवं स्थानीय कृषि परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। रबी मौसम में कम अवधि वाली तथा उपलब्ध नमी के अनुकूल फसलों को अपनाकर भी खेत का बेहतर उपयोग किया जा सकता है। दलहन एवं तिलहन फसलों को फसल प्रणाली में शामिल करने से कृषि विविधीकरण को बढ़ावा मिलेगा और केवल धान पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। किसानों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि समर्थन मूल्य पर खरीदी का लाभ प्राप्त करने के लिए संबंधित फसल की पात्रता, निर्धारित पंजीयन प्रक्रिया, खरीदी की अवधि एवं अन्य लागू शर्तों की जानकारी पहले से प्राप्त कर लें।
*फसल विविधीकरण से बढ़ेगी किसानों की आमदनी*
जिले में किसान धान के स्थान पर वैकल्पिक फसलों को अपनाकर फसल विविधीकरण की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। विकासखंड छुरिया के ग्राम गेरूघाट निवासी कृषक श्री लखन सुकालु गोंड द्वारा 2 हेक्टेयर क्षेत्र में सरसों की खेती की जा रही है। उन्होंने बताया कि सरसों के समर्थन मूल्य में वृद्धि होने से उनका उत्साह बढ़ा है और तिलहन फसल की खेती के प्रति भरोसा मजबूत हुआ है। इसी प्रकार ग्राम कान्हारपुरी के कृषक श्री गणेश जोशी द्वारा धान के स्थान पर 1 हेक्टेयर क्षेत्र में सरसों की खेती की जा रही है। उन्होंने भी समर्थन मूल्य में वृद्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए शासन के प्रति आभार जताया है। इन किसानों के प्रयास यह दर्शाते हैं कि उपयुक्त वैकल्पिक फसलों का चयन कर धान के बाद खेतों का उपयोग किया जा सकता है। उचित फसल चयन, समय पर बीज की उपलब्धता, कृषि विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन एवं समर्थन मूल्य पर खरीदी की सुविधा से किसानों को अपनी खेती की योजना बनाने में मदद मिल सकती है।
*कृषि विभाग ने किसानों से की अपील*
उप संचालक कृषि द्वारा किसानों से रबी मौसम में अपने खेतों को परती न छोड़ते हुए तथा चना, मसूर, सरसों, तिवड़ा, अलसी एवं गेहूं जैसी उपयुक्त फसलों की खेती को प्राथमिकता देने की अपील की गई है। किसान अपनी भूमि एवं उपलब्ध संसाधनों के अनुसार रबी फसलों का चयन कर द्वि-फसली खेती को बढ़ावा दें। धान के बाद खाली रहने वाले खेतों में रबी फसलें लेने से उपलब्ध कृषि भूमि का बेहतर उपयोग होगा, दलहन-तिलहन उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा तथा किसानों की वार्षिक आमदनी में वृद्धि की संभावना बनेगी। कृषि विभाग द्वारा किसानों को फसल चक्र परिवर्तन, बीज चयन, उत्पादन तकनीक एवं योजनाओं से संबंधित आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।









