
हादसे में गंवाया पैर, अब कृत्रिम पैर के सहारे आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ेंगे ईश्वर नेताम
मजदूर माता-पिता के बेटे के सपनों को मिला सहारा, पढ़ाई पूरी कर परिवार का संबल बनने की है चाह
धमतरी, 12 अक्टूबर/ सड़क हादसे में एक पैर गंवाने के बाद जिंदगी की राह कठिन हो गई, लेकिन आगे बढ़ने का हौसला कम नहीं हुआ। सीमित आर्थिक संसाधनों के बीच पढ़ाई जारी रखकर अपने सपनों को पूरा करने की कोशिश कर रहे ग्राम झुरातराई निवासी ईश्वर नेताम के लिए सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित ‘निदान-03’ शिविर उम्मीद की नई किरण बनकर आया है। सेवा संकल्प अभियान अंतर्गत जिला प्रशासन, समाज कल्याण विभाग और भगवान महावीर दिव्यांग सेवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित शिविर में ईश्वर को कृत्रिम पैर उपलब्ध कराया गया। यह सहायता उनके लिए महज एक उपकरण नहीं, बल्कि आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
ईश्वर के माता-पिता मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति सीमित है, लेकिन बेटे को पढ़ाने और उसे अपने पैरों पर खड़ा देखने का सपना उन्होंने कभी नहीं छोड़ा। ईश्वर ने भी विपरीत परिस्थितियों के आगे हार मानने के बजाय अपनी पढ़ाई जारी रखी। उनकी इच्छा है कि शिक्षा पूरी कर अपने भविष्य को संवारें और परिवार का सहारा बनें।
सड़क दुर्घटना में एक पैर गंवाने के बाद उनके सामने रोजमर्रा के काम करने से लेकर पढ़ाई के लिए आने-जाने तक कई चुनौतियां खड़ी हो गई थीं। आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि परिवार आसानी से महंगे कृत्रिम पैर की व्यवस्था कर सके। ऐसे में शारीरिक परेशानी के साथ आर्थिक मजबूरी भी उनके आगे बढ़ने की राह में बाधा बन रही थी।
**‘निदान-03’ बना उम्मीद का सहारा**
इसी मुश्किल घड़ी में ‘निदान-03’ शिविर ने ईश्वर के जीवन में बदलाव की नई संभावना पैदा की। शिविर में कृत्रिम पैर मिलने से अब उनके लिए चलना-फिरना आसान होने की उम्मीद है। इससे उन्हें अपनी पढ़ाई जारी रखने, दैनिक गतिविधियों में अधिक सहजता हासिल करने और भविष्य के सपनों की ओर आत्मविश्वास के साथ बढ़ने में मदद मिलेगी।
ईश्वर ने इस सहयोग के लिए जिला प्रशासन, समाज कल्याण विभाग और भगवान महावीर दिव्यांग सेवा समिति के प्रति आभार व्यक्त किया। उनके लिए यह सहायता उस भरोसे की तरह है, जो कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की ताकत देता है।
ईश्वर की कहानी यह संदेश देती है कि दिव्यांगजन को समय पर सहायक उपकरण और जरूरी सहयोग मिल जाए, तो मुश्किलों के बीच भी आत्मनिर्भरता की राह खुल सकती है। ‘निदान-03’ शिविर के माध्यम से मिली सहायता ने ईश्वर के जीवन में उम्मीद का नया अध्याय जोड़ा है। अब उनकी नजरें उन सपनों पर हैं, जिन्हें पूरा कर वे न केवल अपना भविष्य संवारना चाहते हैं, बल्कि अपने माता-पिता के संघर्ष को भी सार्थक बनाना चाहते हैं।









