
Navratri 2026 Day 2: शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है. इस वर्ष 12 अक्टूबर, सोमवार को मां ब्रह्मचारिणी की आराधना की जाएगी. मां ब्रह्मचारिणी को तपस्या, संयम और त्याग का प्रतीक माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि उनकी पूजा करने से भक्तों को धैर्य, आत्मबल और संयम की प्राप्ति होती है.
मां ब्रह्मचारिणी मां दुर्गा का दूसरा स्वरूप हैं. इनके दाहिने हाथ में जप की माला और बाएं हाथ में कमंडल रहता है. माता का यह स्वरूप तपस्या, साधना और संयम का संदेश देता है. मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप तपस्या, पवित्रता, ज्ञान और वैराग्य का प्रतीक माना जाता है. ब्रह्मचारिणी’ शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है. ‘ब्रह्म’ का अर्थ तपस्या या परम ज्ञान और ‘चारिणी’ का अर्थ आचरण करने वाली होता है. इस तरह मां ब्रह्मचारिणी का नाम तपस्या और साधना के मार्ग पर चलने वाली देवी को दर्शाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी की आराधना करने से भक्तों को कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलती है और मन में धैर्य बना रहता है.
मां ब्रह्मचारिणी की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी का जन्म पर्वतराज हिमालय और मैना देवी के घर हुआ था. देवर्षि नारद के मार्गदर्शन में उन्होंने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या करने का संकल्प लिया.
कहा जाता है कि मां ब्रह्मचारिणी ने हजारों वर्षों तक फल और कंदमूल खाकर तपस्या की. इसके बाद उन्होंने केवल शाक यानी सब्जियां खाकर समय बिताया. धीरे-धीरे उन्होंने भोजन करना भी छोड़ दिया और भगवान शिव की आराधना में लीन रहीं.
मान्यता है कि मां ने कई वर्षों तक केवल सूखे पत्ते खाकर तपस्या की. बाद में उन्होंने पत्ते खाना भी छोड़ दिया और निराहार रहकर भगवान शिव की आराधना करती रहीं. पत्तों का सेवन तक छोड़ देने के कारण उन्हें ‘अपर्णा’ नाम से जाना गया.
मां की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी प्रकट हुए. उन्होंने मां को आशीर्वाद दिया कि उनकी तपस्या सफल होगी और भगवान शिव उन्हें पति रूप में प्राप्त होंगे. इसके बाद उन्होंने मां से तपस्या समाप्त कर घर लौटने को कहा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव को पाने के लिए कठोर तपस्या करने के कारण ही मां के इस स्वरूप को ‘ब्रह्मचारिणी’ कहा जाता है.
मां ब्रह्मचारिणी का प्रिय रंग
नवरात्रि के दूसरे दिन सफेद रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सफेद रंग मां ब्रह्मचारिणी को प्रिय है. यह रंग शांति, पवित्रता और संयम का प्रतीक माना जाता है.
मां ब्रह्मचारिणी को कौन से फूल अर्पित करें?
मां ब्रह्मचारिणी को सफेद रंग के फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है. इसके अलावा, पूजा में पीले रंग के फूल भी चढ़ा सकते हैं. आप मां को चमेली, कमल और पीले गुड़हल के फूल अर्पित कर सकते हैं.
मां ब्रह्मचारिणी को किस चीज का भोग लगाएं?
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा में मिश्री और शक्कर का भोग लगाना शुभ माना जाता है. इसके अलावा, आप सफेद बर्फी, दूध से बनी मिठाइयां या खीर का भोग भी अर्पित कर सकते हैं.
मां ब्रह्मचारिणी के मंत्र
बीज मंत्र: ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥
ध्यान मंत्र: दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥
देवी स्तुति मंत्र: या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि
- द्वितीया तिथि के दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें. इस दिन पीले या सफेद रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है.
- पूजा स्थल पर जाकर सबसे पहले कलश और मां दुर्गा को प्रणाम करें. इसके बाद हाथ में जल और अक्षत लेकर व्रत या पूजा का संकल्प लें.
- मां ब्रह्मचारिणी की प्रतिमा या तस्वीर के सामने घी का दीपक और धूप जलाएं. पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़ककर उसे पवित्र करें.
- मां ब्रह्मचारिणी को कुमकुम, चंदन, अक्षत, हल्दी और सुगंधित इत्र अर्पित करें.
- मां ब्रह्मचारिणी की पूजा में सफेद और पीले रंग के फूल अर्पित कर सकते हैं. इसके लिए चमेली, कमल या गेंदे के फूलों का इस्तेमाल करें.
- पूजा के दौरान मां ब्रह्मचारिणी के मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जाप करें. चाहें तो 108 बार मंत्र जाप कर सकते हैं.
- पूजा के अंत में मां ब्रह्मचारिणी की आरती करें. इसके बाद अनजाने में हुई गलतियों के लिए मां से क्षमा मांगें.









