Ro no D15139/23

( अम्बिकापुर समाचार ) मत्स्य पालन से संवर रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था, आत्मनिर्भरता के साथ रोजगार के नए अवसर

जलाशयों, आजीविका डबरियों, अमृत सरोवर और बायोफ्लॉक तकनीक से बढ़ रहा मछली उत्पादन, ग्रामीण परिवारों को मिल रहा आय का नया आधार
 

अम्बिकापुर 12 अक्टूबर 2026/  सरगुजा जिले में मत्स्य पालन ग्रामीण परिवारों की आजीविका मजबूत करने, स्वरोजगार बढ़ाने और महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का प्रभावी माध्यम बन रहा है। शासन की योजनाओं, विभागीय मार्गदर्शन और स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग से कहीं मछुआरे सामूहिक रूप से मछली उत्पादन कर रहे हैं, तो कहीं किसान डबरी में मछली पालन के साथ सिंचाई और सब्जी उत्पादन का लाभ ले रहे हैं। आधुनिक बायोफ्लॉक तकनीक भी ग्रामीणों के लिए व्यवसाय के नए अवसर खोल रही है।

घुनघुट्टा जलाशय से 381 मछुआरों को आजीविका
घुनघुट्टा जलाशय में आदिवासी मछुआ सहकारी समिति, कलगसा के 381 सदस्य मत्स्य पालन से अपने परिवारों का भरण-पोषण कर रहे हैं। समिति को जलाशय 10 वर्ष के लिए पट्टे पर मिला है। समिति अध्यक्ष श्री राम बिलोच राम के अनुसार, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मछली बीज के लिए 7 लाख 62 हजार रुपये की अनुदान सहायता मिलती है। यह उदाहरण दर्शाता है कि सामूहिक प्रयास और योजनागत सहयोग से बड़ी संख्या में परिवारों को आजीविका का आधार मिल सकता है।

आजीविका डबरी से मछली पालन और खेती को दोहरा लाभ
ग्रामीण रोजगार योजना के तहत निर्मित आजीविका डबरियां जल संरक्षण के साथ आय बढ़ाने में भी उपयोगी साबित हो रही हैं। लखनपुर विकासखंड के श्री शिवबालक ने डबरी में कतला, रोहू, मृगल और ग्रास कार्प का पालन कर लगभग दो क्विंटल मछली बेची, जिससे उन्हें 20 से 25 हजार रुपये की आमदनी हुई। डबरी के पानी का उपयोग वे सब्जी उत्पादन में भी करते हैं।
बतौली विकासखंड के श्री लक्ष्मी प्रसाद ने डबरी में मछली पालन से लगभग एक लाख रुपये की आय अर्जित की। करीब 20 क्विंटल उत्पादन का आकलन करते हुए वे डबरी के पानी से साग-सब्जी और गेहूं की सिंचाई भी कर रहे हैं।
इसी तरह अम्बिकापुर विकासखंड की श्रीमती जोशमनि एक्का के परिवार ने 2.99 लाख रुपये की लागत से निर्मित डबरी में मछली पालन शुरू किया है। वहीं, लखनपुर के कनी लाल बड़ा ने डबरी में 9 किलोग्राम मछली बीज डालकर मछली पालन के साथ सब्जी उत्पादन को जोड़ा है। ग्राम लोसगी के पहाड़ी कोरवा किसान ठिबुल राम ने 17 किलोग्राम मछली बीज डालने के साथ डबरी की मेड़ पर अरहर, आम, मुनगा और नींबू के पौधे लगाए हैं। इन प्रयासों से एक ही जलस्रोत का उपयोग मछली पालन, सिंचाई और खेती के लिए किया जा रहा है।

अमृत सरोवर से महिलाओं को मिला सामूहिक स्वरोजगार
बतौली विकासखंड के बिरीमकेला पंचायत के ज्योति स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने अमृत सरोवर में मछली पालन शुरू किया है। समूह की सदस्य श्रीमती रजनी चैहान के अनुसार, पहली बार लगभग 15 किलोग्राम मछली बेचकर समूह को आमदनी हुई। उत्साहित महिलाओं ने दोबारा मछली बीज डालकर इस गतिविधि को आगे बढ़ाया है। सामूहिक मत्स्य पालन से महिलाओं को आय अर्जित करने और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिला है।

बायोफ्लॉक तकनीक से खाली जमीन पर शुरू हुआ उत्पादन
आधुनिक बायोफ्लॉक तकनीक सीमित स्थान में वैज्ञानिक तरीके से मछली पालन का अवसर उपलब्ध करा रही है। श्रीमती चंपा मंडल ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 14 लाख रुपये की इकाई स्थापित की, जिसमें उन्हें 8 लाख 40 हजार रुपये का अनुदान मिला। लगभग चार माह से तालाब में पल रही मछलियों की बिक्री शुरू करने की तैयारी है। उन्हें लगभग 120 रुपये प्रति किलोग्राम थोक भाव मिलने की उम्मीद है।

इसी प्रकार श्री विप्लब हलदर ने भी मत्स्य विभाग के मार्गदर्शन से बायोफ्लॉक पद्धति अपनाई है। उनकी मछलियां अभी बढ़वार की अवस्था में हैं और लगभग तीन माह बाद बिक्री योग्य होने की उम्मीद है। दोनों हितग्राहियों के प्रयास बताते हैं कि खाली पड़ी जमीन का उपयोग व्यावसायिक मत्स्य पालन के लिए किया जा सकता है। हालांकि, वास्तविक लाभ उत्पादन, बाजार भाव और संचालन लागत पर निर्भर करेगा।

स्वरोजगार के साथ स्थानीय रोजगार के अवसर

मत्स्य पालन से मछली उत्पादन के अलावा बीज संचयन, आहार प्रबंधन, पकड़ने, छंटाई, परिवहन और बिक्री जैसे कार्यों में भी रोजगार की संभावनाएं बनती हैं। सहकारी समितियां और स्व-सहायता समूह सामूहिक रूप से काम करके उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग कर सकते हैं। वहीं, खेती के साथ मछली पालन अपनाने से ग्रामीण परिवारों को आय के अतिरिक्त स्रोत मिलते हैं।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत पात्र हितग्राहियों को निर्धारित प्रावधानों के अनुसार मिलने वाली अनुदान सहायता मछली पालन की इकाइयां स्थापित करने में सहायक है। इसके साथ तकनीकी प्रशिक्षण, गुणवत्तापूर्ण मछली बीज, पानी का उचित प्रबंधन और बाजार तक पहुंच भी आवश्यक है। मछली की बिक्री से प्राप्त राशि और वास्तविक मुनाफे में अंतर होता है, इसलिए लागत का सही आकलन करना महत्वपूर्ण है।

सरगुजा जिले की ये कहानियां बताती हैं कि जलाशयों, डबरियों, अमृत सरोवर और आधुनिक तकनीक का योजनाबद्ध उपयोग ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकता है। सरकारी सहायता और हितग्राहियों की मेहनत से मत्स्य पालन आजीविका, स्वरोजगार और स्थानीय रोजगार सृजन का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है। उचित प्रशिक्षण, बाजार व्यवस्था और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन से यह गतिविधि ग्रामीण परिवारों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने तथा आत्मनिर्भर गांवों के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।

सेवा की कहानी: पक्के आवास से संगीता पहाड़ी कोरवा को मिली सुरक्षित छत, बरसात में पानी टपकने की परेशानी से मिली राहत
खपरैल और कच्ची छत वाले मकान में रहने की मजबूरी हुई दूर, आवास योजना से संगीता के परिवार का पक्के घर का सपना हुआ पूरा
नवनिर्मित आवास में परिवार के साथ सुखपूर्वक रह रहीं संगीता, घर में नल से पानी की सुविधा भी उपलब्ध’

अम्बिकापुर 12 अक्टूबर 2026/  सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से जरूरतमंद परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को पक्की छत मिलने के साथ ही सुरक्षित और सुविधाजनक आवास का सपना भी साकार हो रहा है। इसी बदलाव की  कहानी अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत खाला के कोरवा पारा निवासी संगीता की है, जिन्हें पक्का आवास मिलने से कच्चे मकान में होने वाली परेशानियों से राहत मिली है।

संगीता ने बताया कि पहले उनका परिवार खपरैल और कच्ची छत वाले मकान में रहता था। बरसात के दिनों में छत से पानी टपकने के कारण काफी परेशानी होती थी। बारिश होने पर घर के भीतर पानी आने की समस्या बनी रहती थी। अब आवास योजना का लाभ मिलने से उनका पक्का मकान बनकर तैयार हो गया है और परिवार उसी में निवास कर रहा है। पक्की छत मिलने से बरसात के दौरान होने वाली परेशानियां दूर हो गई हैं।

पक्के मकान के साथ नल से पानी की सुविधा भी मिली
संगीता ने बताया कि उनके पति का नाम शनि लाल है। परिवार में सास-ससुर भी हैं, जो अलग रहते हैं। पहले कच्चे मकान में रहने के दौरान अनेक असुविधाओं का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब उनका अपना पक्का आवास बन जाने से रहने की व्यवस्था बेहतर हुई है। घर में नल से पानी की सुविधा भी उपलब्ध है, जिससे दैनिक घरेलू कार्यों में सहूलियत मिल रही है।

उन्होंने खुशी व्यक्त करते हुए बताया कि आवास का निर्माण पूरा हो चुका है और अब वे अपने परिवार के साथ उसी घर में रह रही हैं। पक्का मकान मिलने से उन्हें पहले जैसी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता। पीएम जनमन आवास योजना से मिली इस सुविधा को उन्होंने अपने परिवार के लिए बड़ी राहत बताया।

संगीता ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार
आवास योजना का लाभ मिलने पर संगीता ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, पहले हमारा खपरैल और कच्ची छत वाला घर था। बरसात में पानी टपकता था, जिससे बहुत परेशानी होती थी। अब आवास मिल गया है और घर भी पूरा बन गया है। हम उसी में रहते हैं, अब कोई परेशानी नहीं होती। घर में नल से पानी की सुविधा भी है। इसके लिए प्रधानमंत्री जी और विष्णु भइया को बहुत-बहुत धन्यवाद।

संगीता की यह कहानी दर्शाती है कि आवास जैसी बुनियादी सुविधा मिलने से ग्रामीण परिवारों के जीवन में किस प्रकार बदलाव आ रहा है। पक्के मकान ने उनके परिवार को सुरक्षित छत उपलब्ध कराने के साथ ही बरसात के दिनों में होने वाली परेशानियों से राहत दिलाई है। शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से आमजनों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहे हैं।

 
सेवा की कहानी: मातृ वंदना योजना से लीलावती को मिला आर्थिक संबल, पौष्टिक आहार और दवाइयों की जरूरतें हुईं पूरी
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत दो किस्तों में मिली 5 हजार रुपये की सहायता राशि, मां और शिशु के स्वास्थ्य की देखभाल में बनी मददगार
लीलावती ने पौष्टिक भोजन, दवाइयों और अन्य जरूरी सामग्री पर खर्च की राशि, योजना का लाभ मिलने पर जताई खुशी’

अम्बिकापुर 12 अक्टूबर 2026/  गर्भावस्था और मातृत्व के दौरान महिलाओं को मिलने वाली आर्थिक सहायता उनके स्वास्थ्य और पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना से मिली सहायता राशि अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम कृष्णापुर निवासी लीलावती के लिए उपयोगी साबित हुई है। योजना के अंतर्गत प्राप्त 5 हजार रुपये से उन्होंने पौष्टिक भोजन, दवाइयों और अन्य आवश्यक सामग्री की व्यवस्था की। लीलावती बताती हैं कि इस सहायता से उन्हें अपनी और बच्चे की सेहत का ध्यान रखने में मदद मिली और वर्तमान में दोनों स्वस्थ हैं।

सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत सामने आई लीलावती की यह कहानी मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं से हितग्राहियों को मिल रहे लाभ को दर्शाती है।

दो किस्तों में मिली सहायता से पूरी हुईं जरूरी आवश्यकताएं
लीलावती ने बताया कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत उन्हें कुल 5 हजार रुपये की सहायता राशि प्राप्त हुई। पहली किस्त में 3 हजार रुपये और दूसरी किस्त में 2 हजार रुपये मिले। इस राशि का उपयोग उन्होंने पौष्टिक आहार, आवश्यक दवाइयों और अपनी अन्य जरूरतों को पूरा करने में किया।

उन्होंने बताया कि मातृत्व के दौरान स्वास्थ्य और पोषण का विशेष ध्यान रखना जरूरी होता है। ऐसे समय में योजना से मिली आर्थिक सहायता उनके लिए काफी मददगार रही। इससे उन्हें अपने साथ बच्चे के स्वास्थ्य की देखभाल करने में भी सुविधा मिली।

दूसरी संतान बालिका होने पर 6 हजार रुपये की सहायता का प्रावधान
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के अंतर्गत पात्र महिलाओं को प्रथम संतान के लिए 5 हजार रुपये की सहायता राशि दो किस्तों में प्रदान की जाती है। वहीं दूसरी संतान बालिका होने पर पात्रता के अनुसार 6 हजार रुपये की राशि एकमुश्त प्रदान किए जाने का प्रावधान है। योजना का उद्देश्य गर्भवती एवं धात्री माताओं को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा पोषण को प्रोत्साहित करना है।

लीलावती ने योजना का लाभ मिलने पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय को धन्यवाद देते हुए कहा कि मातृत्व के समय मिली इस सहायता राशि से उन्हें अपनी और बच्चे की जरूरतों को पूरा करने में सहयोग मिला।

मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य की देखभाल में सहायक बनी योजना
लीलावती का अनुभव दर्शाता है कि मातृत्व के दौरान समय पर मिलने वाली आर्थिक सहायता महिलाओं की पोषण और स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में उपयोगी हो सकती है। ग्राम कृष्णापुर की लीलावती ने योजना से मिली राशि का उपयोग पौष्टिक आहार और दवाइयों के लिए कर इसका लाभ उठाया है। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत उनकी यह कहानी शासन की मातृ कल्याण योजना से जरूरतमंद महिलाओं को मिल रही सहायता का उदाहरण है।

  • Related Posts

    (अम्बिकापुर समाचार )अड़ची में तालाब निर्माण से बदली रोजगार की तस्वीर, 100 से अधिक ग्रामीणों को गांव में ही मिला काम

    वीबी-जी राम जी के तहत 6.33 लाख रुपये की लागत से बन रहा तालाब, जल संरक्षण के साथ खेती-किसानी को मिलेगा सहारा NMMS और फेस अटेंडेंस ऐप से श्रमिकों की उपस्थिति…

    Read more

    राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम शिविर में 48 मरीजों का चिन्हांकन, कालड़ा हॉस्पिटल रायपुर के विशेषज्ञ करेंगे निःशुल्क उपचार एवं सर्जरी

    चिरायु दलों द्वारा चिन्हांकित बच्चों की विशेषज्ञ चिकित्सकों ने की जाँच, बर्न, कटे-फटे होंठ, तालू और क्लब फुट के मरीजों को मिलेगा उपचार अम्बिकापुर 13 अक्टूबर 2026/   मुख्य चिकित्सा एवं…

    Read more

    NATIONAL

    सऊदी अरब, इजरायल, इरबिल… क्या मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सुरक्षा व्यवस्था बिखर रही है?

    सऊदी अरब, इजरायल, इरबिल… क्या मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सुरक्षा व्यवस्था बिखर रही है?

    14 खामियां, 220 रुपये फीस कम… सुप्रीम कोर्ट में क्यों अटकी राहुल गांधी की याचिका?

    14 खामियां, 220 रुपये फीस कम… सुप्रीम कोर्ट में क्यों अटकी राहुल गांधी की याचिका?

    CJP Protest: जंतर-मंतर पर दिल्ली पुलिस का एक्शन, हिरासत में सौरव दास और आशुतोष रांका

    CJP Protest: जंतर-मंतर पर दिल्ली पुलिस का एक्शन, हिरासत में सौरव दास और आशुतोष रांका

    अपनी ही सरकार पर भड़के शिवराज सिंह चौहान, आदिवासियों के घर उजाड़ने पर अफसरों को सख्त चेतावनी

    अपनी ही सरकार पर भड़के शिवराज सिंह चौहान, आदिवासियों के घर उजाड़ने पर अफसरों को सख्त चेतावनी

    नवरात्र के पहले दिन 68 आदिवासी परिवारों को मिला अपने घर का उपहार, अदाणी फाउंडेशन ने कराया गृह प्रवेश

    नवरात्र के पहले दिन 68 आदिवासी परिवारों को मिला अपने घर का उपहार, अदाणी फाउंडेशन ने कराया गृह प्रवेश

    भाजपा महिला मोर्चा का राजधानी में जोरदार प्रदर्शन, कांग्रेस सांसद डॉ. बिमोल अकोइजम पर यौन दुर्व्यवहार के आरोपों को लेकर राजीव भवन का किया घेराव

    भाजपा महिला मोर्चा का राजधानी में जोरदार प्रदर्शन, कांग्रेस सांसद डॉ. बिमोल अकोइजम पर यौन दुर्व्यवहार के आरोपों को लेकर राजीव भवन का किया घेराव