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(अम्बिकापुर समाचार) राष्ट्रीय इनोवेशन चैलेंज के प्रति विद्यार्थियों को किया गया जागरूक शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज डिगमा में आयोजित हुआ जागरूकता कार्यक्रम, 200 से 250 छात्र-छात्राओं ने लिया भाग

 

अम्बिकापुर 13 अक्टूबर 2026/ सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत राष्ट्रीय इनोवेशन चैलेंज के प्रचार-प्रसार एवं युवाओं को नवाचार के प्रति प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र, सरगुजा द्वारा शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज, डिगमा, अम्बिकापुर में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों को राष्ट्रीय इनोवेशन चैलेंज के उद्देश्यों एवं महत्व की जानकारी देते हुए नवीन विचारों, रचनात्मक सोच और उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया गया। अधिकारियों ने विद्यार्थियों को इस चैलेंज में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने तथा ऑनलाइन आवेदन करने के लिए प्रोत्साहित किया। साथ ही महाविद्यालय स्तर पर योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करने का आग्रह किया गया, ताकि अधिकाधिक युवाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिल सके।
इस अवसर पर आयोजित उद्यमिता जागरूकता कार्यशाला में जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र के प्रबंधक श्री अश्विनी शुक्ला एवं सहायक प्रबंधक श्री सूर्योदय कुमार साहू ने विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। इसमें प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पीएमएफएमई), प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी), औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के अंतर्गत मिलने वाले अनुदान, छूट एवं रियायतों, स्टार्टअप और राष्ट्रीय इनोवेशन चैलेंज के संबंध में विद्यार्थियों को अवगत कराया गया। उन्होंने युवाओं को उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाकर स्वरोजगार एवं उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज, डिगमा के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) राम नारायण खरे, एमबीए विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. रॉबिन थॉमस, सेवा संकल्प अभियान के समन्वयक डॉ. हरिशंकर चंद्रा तथा इनोवेशन सेल के प्रभारी डॉ. मोहन राव उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के लगभग 200 से 250 छात्र-छात्राओं के साथ प्राध्यापक एवं अन्य कर्मचारी शामिल हुए।

एक-दो बकरियों से शुरू हुआ सफर, आज बकरी पालन से सालाना पांच लाख रुपये से अधिक की आय
पशुपालन विभाग के मार्गदर्शन और उन्नत तकनीकों से संतोष चैहान ने बदली अपनी आर्थिक स्थिति
क्षेत्र के किसानों के लिए बने प्रेरणास्रोत

अम्बिकापुर 13 अक्टूबर 2026/ छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के बतौली विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत कपाट बहरी निवासी श्री संतोष चौहान की सफलता की कहानी मेहनत, लगन और आधुनिक पशुपालन तकनीकों को अपनाने का प्रेरक उदाहरण है। कभी एक-दो बकरियों से पारंपरिक तरीके से बकरी पालन शुरू करने वाले संतोष आज इस व्यवसाय से सालाना लगभग पांच लाख रुपये तक की आय अर्जित कर रहे हैं।

सीमित संसाधनों से की शुरुआत
कुछ वर्ष पहले संतोष चौहान ने सीमित संसाधनों के बीच एक-दो बकरियों के साथ बकरी पालन शुरू किया था। शुरुआत में आमदनी कम होने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और इसे व्यवस्थित व्यवसाय के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया। इसी दौरान उन्होंने पशुपालन विभाग से संपर्क कर बकरियों के वैज्ञानिक रखरखाव, संतुलित आहार, आवास व्यवस्था, टीकाकरण और नस्ल सुधार से संबंधित मार्गदर्शन एवं सुविधाओं का लाभ लिया।
वर्ष 2022-23 में उन्होंने कृत्रिम गर्भाधान सहित उन्नत पशुपालन तकनीकों को अपनाते हुए बकरियों की नस्ल सुधार पर विशेष ध्यान दिया। इससे पशुओं के स्वास्थ्य, वजन वृद्धि और उत्पादन क्षमता में सुधार लाने में मदद मिली।

उन्नत तकनीकों से बढ़ा व्यवसाय
नियमित देखभाल, वैज्ञानिक प्रबंधन और पशुपालन विभाग के सहयोग से संतोष का बकरी पालन व्यवसाय धीरे-धीरे आगे बढ़ा। एक-दो बकरियों से शुरू हुआ उनका सफर आज 10 से 15 उन्नत नस्ल की बकरियों तक पहुंच गया है। बेहतर खान-पान, समय पर टीकाकरण और पशुओं के उचित रखरखाव को उन्होंने अपने व्यवसाय का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया।
इन प्रयासों के परिणामस्वरूप आज संतोष चौहान बकरी पालन से सालाना लगभग पांच लाख रुपये तक की आय अर्जित कर रहे हैं। इस व्यवसाय ने उनके परिवार को आर्थिक संबल प्रदान किया है और घरेलू आवश्यकताओं एवं जिम्मेदारियों को पूरा करने में मदद की है।

आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
बकरी पालन से प्राप्त आर्थिक मजबूती ने संतोष के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। अब वे अपने व्यवसाय को और अधिक विस्तारित करने तथा आधुनिक तरीके से संचालित करने की योजना बना रहे हैं। उनकी सफलता यह दर्शाती है कि उचित मार्गदर्शन, नियमित देखभाल, वैज्ञानिक तकनीकों और मेहनत के माध्यम से पशुपालन को आजीविका का एक बेहतर साधन बनाया जा सकता है।

जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने में दो साल से अधिक की देरी पर प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश जरूरी
जन्म-मृत्यु के पुराने मामलों के पंजीयन के लिए नए नियम लागू करने के निर्देश जारी

अम्बिकापुर 13 अक्टूबर 2026/ जन्म एवं मृत्यु का पंजीयन कराने में देरी होने पर अब निर्धारित नियमों के अनुसार प्रक्रिया पूरी करनी होगी। भारत सरकार द्वारा जन्म एवं मृत्यु पंजीयन अधिनियम, 1969 में संशोधन के बाद विलंब से प्राप्त होने वाली सूचनाओं के पंजीयन के लिए नए प्रावधान लागू किए गए हैं। इस संबंध में आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय, छत्तीसगढ़ के निर्देशानुसार कलेक्टर एवं अतिरिक्त मुख्य रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु), जिला सरगुजा द्वारा आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए हैं।

एक वर्ष से अधिक की देरी पर निर्धारित प्रक्रिया का करना होगा पालन
संशोधित प्रावधानों के अनुसार, जन्म या मृत्यु की घटना के एक वर्ष बाद, लेकिन दो वर्ष के भीतर पंजीयन के लिए सूचना दिए जाने पर डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट अथवा डिवीजनल मजिस्ट्रेट या डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के द्वारा प्राधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट के आदेश पर घटित स्थानों के रजिस्ट्रार (जन्म मृत्यु ) के द्वारा पंजीयन किया जाएगा। वहीं, जन्म या मृत्यु की घटना के दो वर्ष से अधिक समय बाद सूचना दिए जाने पर पंजीयन के लिए प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर उस स्थान के रजिस्ट्रार द्वारा किया जा सकेगा।
उल्लेखनीय है कि उक्त नियमों के लिए भारत सरकार द्वारा जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1969 (संशोधित 2023) में संशोधन करते हुए रजिस्ट्रेशन ऑफ बर्थ एंड डेथ (संशोधन) अधिनियम 2026 अधिनियमित किया गया है। इस अधिनियम की धारा 13 में संशोधन करते हुए उपधारा (3) के स्थान पर नई उपधारा (3) तथा उपधारा (3ए) प्रतिस्थापित की गई हैं। इन संशोधनों का उद्देश्य विलंब से प्राप्त होने वाली जन्म-मृत्यु संबंधी सूचनाओं के पंजीयन की प्रक्रिया को निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप संचालित करना है।
इन संशोधित नियमों को लेकर कलेक्टर कार्यालय द्वारा सभी संशोधित प्रावधानों का तत्काल प्रभाव से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

सरस्वती महाविद्यालय में मतदाता जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
युवाओं को मताधिकार के प्रति जागरूक करने एवं लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ बनाने पर दिया गया जोर

अम्बिकापुर 13 अक्टूबर 2026/ सरस्वती महाविद्यालय, अम्बिकापुर द्वारा मतदाता जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को मतदान के महत्व, मताधिकार एवं लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति जागरूक करना तथा युवाओं में जिम्मेदार नागरिकता की भावना विकसित करना था।
कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदान की महत्वपूर्ण भूमिका से अवगत कराया गया। साथ ही निष्पक्ष, स्वतंत्र एवं प्रलोभनमुक्त मतदान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया गया।
इस अवसर पर मतदाता जागरूकता के माध्यम से लोकतंत्र को सशक्त बनाने, पात्र नागरिकों का नाम मतदाता सूची में दर्ज कराने तथा निर्वाचन प्रक्रिया के संबंध में आवश्यक जानकारी प्राप्त करने के महत्व पर विशेष जोर दिया गया।
सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में सामाजिक उत्तरदायित्व, राष्ट्रसेवा एवं लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं को जिम्मेदार नागरिक बनकर लोकतांत्रिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में अपनी भूमिका निभाने का संदेश दिया गया।

सेवा की कहानीः कभी व्यवसाय के लिए नहीं थी पूंजी, आज होटल संचालन से आत्मनिर्भर बनीं लखपति दीदी सूरज यादव
बिहान योजना ने खोली स्वरोजगार की राह, शिव शक्ति स्व-सहायता समूह से ऋण लेकर खड़ा किया अपना व्यवसाय
35 हजार रुपये के ऋण से शुरू हुआ सफर, अब ढाई लाख रुपये का ऋण लेकर होटल व्यवसाय को दे रहीं विस्तार
होटल संचालन के साथ आयोजनों में भोजन तैयार करने के मिल रहे ऑर्डर, परिवार की आजीविका को मिली मजबूती

अम्बिकापुर 13 अक्टूबर 2026/ आर्थिक संसाधनों की कमी कभी स्वरोजगार की राह में बड़ी बाधा थी, लेकिन स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद सूरज यादव ने अपनी मेहनत और लगन से इस चुनौती को अवसर में बदल दिया। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के अंतर्गत शिव शक्ति स्व-सहायता समूह से मिली ऋण सुविधा ने उन्हें अपना व्यवसाय आगे बढ़ाने का आधार दिया। आज वे होटल का संचालन कर रही हैं और पति के साथ मिलकर भोजन के ऑर्डर तथा विभिन्न आयोजनों में खानपान की व्यवस्था का कार्य भी कर रही हैं। सेवा संकल्प अभियान-2026 के अंतर्गत उनकी यह कहानी दर्शाती है कि शासन की योजनाओं से मिलने वाली आर्थिक सहायता किस तरह महिलाओं को स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर प्रदान कर लखपति दीदी बना रही है।

35 हजार से ढाई लाख रुपये तक पहुंचा ऋण का सफर
अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत दरिमा की रहने वाली सूरज यादव बताती हैं कि पहले उनके पास व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त पूंजी नहीं थी। शिव शक्ति स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें ऋण की सुविधा मिलने लगी। उन्होंने सबसे पहले 35 हजार रुपये का ऋण लिया। इसके बाद व्यवसाय की आवश्यकताओं के अनुसार 20 हजार और 30 हजार रुपये का ऋण प्राप्त किया। धीरे-धीरे काम आगे बढ़ने पर इस बार उन्होंने ढाई लाख रुपये का ऋण लिया है।

उन्होंने बताया कि समूह से समय-समय पर मिली आर्थिक सहायता से व्यवसाय को निरंतर आगे बढ़ाने में मदद मिली। पहले जहां पूंजी के अभाव में काम बढ़ाना कठिन था, वहीं अब वे अपने व्यवसाय के विस्तार के लिए प्रयास कर रही हैं।

पति-पत्नी मिलकर संभाल रहे होटल व्यवसाय
सूरज यादव का होटल अब परिवार की आजीविका का प्रमुख आधार बन गया है। उनके पति भी होटल संचालन में सहयोग करते हैं। इसके अतिरिक्त विभिन्न आयोजनों में भोजन बनाने की बुकिंग मिलने पर दोनों मिलकर काम करते हैं। ग्राहकों की मांग के अनुसार भोजन के ऑर्डर भी तैयार करते हैं।

दो बच्चों की मां सूरज यादव बताती हैं कि व्यवसाय से जुड़ने के बाद उन्हें परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में योगदान देने का अवसर मिला है। समूह से मिली सहायता ने उन्हें घर से बाहर निकलकर आर्थिक गतिविधियों से जुड़ने और अपनी पहचान बनाने का आत्मविश्वास दिया है।

ऋण के साथ प्रशिक्षण और मार्गदर्शन भी बना सहारा
बिहान योजना के अंतर्गत स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद सूरज यादव को आर्थिक सहायता के साथ प्रशिक्षण और मार्गदर्शन का भी लाभ मिल रहा है। उन्होंने बताया कि समूह की नियमित बैठकों में आजीविका से जुड़े विषयों पर चर्चा होती है। समय-समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं, जिससे सदस्यों को अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने में सहायता मिलती है।

सूरज यादव कहती हैं, पहले हमारे पास कुछ नहीं था। समूह से जुड़ने के बाद लोन लेकर ही हम आगे बढ़े हैं। आज हमारा होटल है और हम ऑर्डर पर खाना बनाने का काम भी करते हैं। समूह के माध्यम से मुझे आगे बढ़ने का अवसर मिला है। यहां प्रशिक्षण और आजीविका को लेकर बैठकें भी होती रहती हैं।ष्

बिहान से मिली नई पहचान, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार
अपनी उपलब्धि से उत्साहित सूरज यादव ने कहा कि बिहान योजना ने उन्हें स्वरोजगार से जुड़कर आगे बढ़ने का अवसर दिया है। उन्होंने बताया कि समूह का सहयोग नहीं मिलता तो उनके लिए इस स्तर तक व्यवसाय को आगे बढ़ाना कठिन होता।
उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु भैया के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन की योजनाओं से मिली सहायता के कारण वे आज आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

स्व-सहायता समूह से आर्थिक सशक्तिकरण की मिसाल
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के माध्यम से महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर ऋण, प्रशिक्षण और आजीविका संवर्धन के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे महिलाएं छोटे व्यवसाय शुरू करने के साथ उन्हें आगे बढ़ाने में भी सक्षम हो रही हैं।

सूरज यादव की कहानी इसी बदलाव का उदाहरण है। सीमित संसाधनों से शुरू हुआ उनका स्वरोजगार आज परिवार की आजीविका का सहारा बन रहा है। समूह से मिली आर्थिक सहायता, नियमित प्रशिक्षण और स्वयं की मेहनत से उन्होंने होटल व्यवसाय को आगे बढ़ाकर महिला आत्मनिर्भरता की दिशा में सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत किया है।
सेवा की कहानीः धान की पारंपरिक खेती छोड़ नवाचार की राह पर बढ़े किसान मुकंदर सिंह, अदरक और अरहर की खेती से संवर रही आजीविका
कृषक उन्नति योजना से फसल विविधीकरण को मिला प्रोत्साहन, डेढ़ एकड़ में अदरक की खेती के साथ मेड़ों पर लगाई अरहर
कृषि विभाग के मार्गदर्शन से बदला खेती का तरीका, धान के स्थान पर वैकल्पिक फसल अपनाकर बेहतर उत्पादन की दिशा में बढ़ाए कदम

अम्बिकापुर 13 अक्टूबर 2026/ खेती में नवाचार और फसल विविधीकरण अपनाकर किसान अपनी आजीविका को बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। सेवा संकल्प अभियान-2026 के अंतर्गत ग्राम दरिमा के किसान मुकंदर सिंह की कहानी इसी बदलाव का उदाहरण है। वर्षों से धान की खेती करने वाले मुकंदर सिंह ने इस खरीफ सीजन में कृषि विभाग के मार्गदर्शन से खेती का तरीका बदला है। उन्होंने धान के स्थान पर लगभग डेढ़ एकड़ में अदरक की खेती की है और खेतों की मेड़ों पर अरहर लगाई है। वर्तमान में उनकी फसल अच्छी स्थिति में है, जिससे वे उत्साहित हैं। कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत फसल विविधीकरण के लिए मिलने वाली प्रोत्साहन राशि की जानकारी ने भी उन्हें वैकल्पिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया।

कृषि विभाग की सलाह से बदला खेती का तरीका-
ग्राम दरिमा निवासी किसान मुकंदर सिंह, पिता श्री बरातु सिंह ने बताया कि खरीफ फसल की बुआई से पहले वे दरिमा समिति पहुंचे थे। वहां उपस्थित कृषि विभाग के अधिकारियों ने उन्हें धान के स्थान पर अन्य फसलों की खेती करने के फायदे बताए। अधिकारियों ने अरहर, तिलहन सहित वैकल्पिक फसलों की खेती और फसल विविधीकरण के लिए शासन द्वारा कृषक उन्नति योजना दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि की जानकारी दी।

मुकंदर सिंह ने बताया कि अधिकारियों से मिली जानकारी और मार्गदर्शन के बाद उन्होंने अपने खेत में इस वर्ष कुछ अलग करने का निर्णय लिया। पिछले वर्ष जिस भूमि पर धान की खेती की थी, वहां इस बार अदरक की फसल लगाई। इसके साथ ही खेतों की मेड़ों का उपयोग अरहर की खेती के लिए किया, जिससे उपलब्ध कृषि भूमि का बेहतर उपयोग हो सके।

डेढ़ एकड़ में अदरक की खेती, मेड़ों पर अरहर से अतिरिक्त उत्पादन की उम्मीद
मुकंदर सिंह ने लगभग डेढ़ एकड़ रकबे में अदरक की खेती की है। इसके साथ खेतों की मेड़ों पर कृषि विभाग से प्राप्त अरहर के बीज लगाए हैं। इस तरह उन्होंने एक ही खेत में मुख्य फसल के साथ मेड़ों पर दूसरी फसल उगाने की पहल की है।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में अदरक और अरहर की फसल अच्छी स्थिति में है। खेत में फसलों की बढ़वार देखकर उन्हें संतोष हो रहा है। पहले वे इस रकबे में धान की खेती करते थे, लेकिन इस वर्ष वैकल्पिक फसल अपनाकर खेती में नया प्रयोग किया है। उन्हें उम्मीद है कि अदरक के उत्पादन के साथ मेड़ों पर लगी अरहर से भी अतिरिक्त उपज प्राप्त होगी।

प्रति एकड़ 15 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलने की उम्मीद
मुकंदर सिंह ने बताया कि दरिमा समिति में कृषि विभाग के अधिकारियों ने उन्हें कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत धान के स्थान पर निर्धारित वैकल्पिक फसलों की खेती करने पर प्रति एकड़ 15 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलने की जानकारी दी थी। इसी जानकारी से प्रेरित होकर उन्होंने फसल विविधीकरण अपनाया है। उन्होंने कहा कि शासन की ओर से मिलने वाली आर्थिक सहायता किसानों को पारंपरिक खेती के साथ अन्य फसलों की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करती है।

अच्छी फसल देखकर खुश हैं मुकंदर सिंह
अपना अनुभव साझा करते हुए मुकंदर सिंह ने बताया, ष्मैं ग्राम दरिमा का किसान हूं। पिछले वर्ष इस खेत में धान लगाया था। इस वर्ष कृषि विभाग के अधिकारियों की सलाह पर लगभग डेढ़ एकड़ में अदरक की खेती की है और मेड़ों पर अरहर लगाई है। अरहर के बीज भी कृषि विभाग से मिले हैं। अभी मेरी फसल बहुत अच्छी है। अधिकारियों ने बताया था कि धान के बदले दूसरी फसल लगाने पर प्रति एकड़ 15 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलेगी। मैं अपनी खेती से बहुत खुश हूं।ष्

मुकंदर सिंह ने खेती में बदलाव के लिए मिले मार्गदर्शन और योजना के अंतर्गत प्रोत्साहन राशि की जानकारी पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार जताया।

फसल विविधीकरण से खेती में नए अवसर
कृषि विभाग द्वारा किसानों को धान के अतिरिक्त दलहन, तिलहन एवं अन्य वैकल्पिक फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। फसल विविधीकरण से किसानों को अपनी भूमि और उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप विभिन्न फसलों का उत्पादन करने के अवसर मिलते हैं। साथ ही एक ही फसल पर निर्भरता कम करने और आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित करने की संभावनाएं बढ़ती हैं।
ग्राम दरिमा के किसान मुकंदर सिंह ने कृषि विभाग की सलाह पर अदरक और अरहर की खेती अपनाकर उन्नत कृषक की दिशा में पहल की है।

सेवा संकल्प अभियान के तहत सायर जलाशय में वृहद स्वच्छता अभियान, सामूहिक श्रमदान से दिया जल संरक्षण का संदेश
जनभागीदारी से जल संरक्षण एवं स्वच्छता को बढ़ावा देने पर विशेष जोर

अम्बिकापुर 13 अक्टूबर 2026/ सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत जल संसाधन विभाग, संभाग क्रमांक-1, अम्बिकापुर द्वारा मंगलवार को सायर जलाशय में वृहद श्रमदान एवं स्वच्छता अभियान का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विभागीय अधिकारी-कर्मचारियों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाते हुए जलाशय परिसर की साफ-सफाई की तथा जलस्रोतों के संरक्षण एवं संवर्धन का संदेश दिया।
अभियान के दौरान सामूहिक श्रमदान कर जलाशय परिसर में स्वच्छता गतिविधियां संचालित की गईं। इस अवसर पर ग्रामीणों को जल संरक्षण, जलस्रोतों की नियमित साफ-सफाई तथा प्राकृतिक जल संपदा के संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया। साथ ही जलाशयों के पारिस्थितिकीय महत्व पर प्रकाश डालते हुए जलस्रोतों को स्वच्छ, निर्मल एवं सुरक्षित बनाए रखने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीणों को बताया गया कि जल संरक्षण केवल शासकीय विभागों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का सामूहिक दायित्व है। जलस्रोतों की स्वच्छता एवं नियमित देखरेख से पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलने के साथ ही भावी पीढ़ियों के लिए जल की उपलब्धता सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी।
इस अवसर पर जल संसाधन विभाग, संभाग क्रमांक-1, अम्बिकापुर के अधिकारी-कर्मचारी, ग्राम पंचायत के पंचगण, स्थानीय नागरिक एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे। सभी ने श्रमदान में सक्रिय भागीदारी निभाते हुए जलाशय की स्वच्छता बनाए रखने एवं प्राकृतिक जलस्रोतों के संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
उल्लेखनीय है कि सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत जनभागीदारी के माध्यम से स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण एवं जल संवर्धन जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी कड़ी में सायर जलाशय में आयोजित सामूहिक श्रमदान कार्यक्रम के माध्यम से ‘स्वच्छ जलस्रोत, सुरक्षित भविष्य’ का संदेश दिया गया।

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