
Shardiya Navratri 2026 Day 4: के चौथे दिन मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा ने अपनी मंद मुस्कान से पूरे ब्रह्मांड की रचना की थी. इसी वजह से उन्हें सृष्टि की आदिशक्ति भी कहा जाता है.
मान्यता है कि मां की विधिवत पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और सकारात्मकता आती है. आइए जानते हैं नवरात्र के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, प्रिय रंग, भोग, मंत्र और विशेष उपाय.
नवरात्र के चौथे दिन कब करें मां कूष्मांडा की पूजा?
- मां कूष्मांडा की पूजा तिथि: 14 अक्टूबर 2026, बुधवार.
- चतुर्थी तिथि: 13 अक्टूबर की रात 11:28 बजे से 15 अक्टूबर की सुबह 1:13 बजे तक.
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:06 बजे से 4:56 बजे तक.
- अमृत काल: शाम 4:38 बजे से 6:23 बजे तक.
- आयुष्मान योग: 13 अक्टूबर की रात 8:23 बजे से 14 अक्टूबर की रात 8:39 बजे तक.
- सौभाग्य योग: 14 अक्टूबर की रात 8:39 बजे के बाद से 15 अक्टूबर की रात 9:15 बजे तक.
- अमृत सिद्धि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग: 14 अक्टूबर की सुबह 5:45 बजे से 15 अक्टूबर की सुबह 4:03 बजे तक.
- राहुकाल: दोपहर 11:35 बजे से 1:02 बजे तक.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान शुभ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है. साथ ही यह
मां कूष्मांडा को कौन सा रंग, फूल और भोग प्रिय है?
को अष्टभुजा देवी के नाम से भी जाना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उनके आठ हाथों में विभिन्न अस्त्र-शस्त्र, अमृत कलश, कमंडल, कमल और जपमाला सुशोभित हैं. उनका वाहन सिंह है.
मां की पूजा में पीले और हरे रंग के वस्त्रों को शुभ माना जाता है. पीला गेंदा और पीला कमल उनके प्रिय फूल माने जाते हैं. भोग में मालपुआ और कुम्हड़ा यानी पेठा अर्पित करने की मान्यता है. भक्त श्रद्धा के साथ इन चीजों को मां को अर्पित कर सकते हैं.
नवरात्र के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा कैसे करें, विधि
नवरात्र के चौथे दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें. इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करके गंगाजल छिड़कें. सबसे पहले भगवान गणेश और अन्य देवी-देवताओं का स्मरण करें. फिर मां कूष्मांडा का ध्यान करते हुए उन्हें पीले फूल, सिंदूर, अक्षत, धूप, दीप और हरी इलायची अर्पित करें.
इसके बाद मां कूष्मांडा के मंत्र ‘ओम् कूष्माण्डायै नमः‘ का 108 बार जाप करें. पूजा के अंत में मां को मालपुआ या पेठे का भोग लगाएं और सुख-समृद्धि की कामना करें.
मां कूष्मांडा के प्रमुख मंत्र और उनके अर्थ
1. मां कूष्मांडा का सामान्य मंत्र ॐ कूष्माण्डायै नमः.
2. मां कूष्मांडा का बीज मंत्र ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कूष्माण्डायै नमः.
3. मां कूष्मांडा का ध्यान मंत्र सुरासंपूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च. दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे.
4. मां कूष्मांडा का उपासना मंत्र कूष्माण्डा ऐं ह्रीं देव्यै नमः.
5. मां कूष्मांडा की स्तुति का मंत्र या देवी सर्वभूतेषु सृष्टि रूपेण संस्थिता. नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः.
स्तुति मंत्र का हिंदी अर्थ- हे मां! आप सभी प्राणियों में सृष्टि की रचना करने वाली शक्ति के रूप में विराजमान हैं. मां कूष्मांडा के रूप में प्रसिद्ध अम्बे, आपको बार-बार प्रणाम है. हे मां, मुझे सभी पापों से मुक्ति प्रदान करें.
मां कूष्मांडा की व्रत कथा क्या है?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब सृष्टि में चारों ओर अंधकार था और ब्रह्मांड का अस्तित्व नहीं था, तब मां कूष्मांडा ने अपनी मंद मुस्कान से सृष्टि की रचना की. इसी कारण उन्हें ब्रह्मांड की रचनाकार शक्ति के रूप में पूजा जाता है.
मान्यता है कि मां का तेज सूर्य के समान है और उनका निवास सूर्य मंडल में बताया गया है.
नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा करने से भक्तों को आयु, यश, बल और आरोग्य की प्राप्ति होती है. मां की कृपा पाने के लिए श्रद्धा और भक्ति के साथ उनकी आराधना करना महत्वपूर्ण माना जाता है.









