
ये वो शब्द थे जो स्मिता पाटिल अक्सर अपने मेकअप आर्टिस्ट और करीबियों से कहा करती थीं. उनकी ये अजीब सी लगने वाली बात तब सच साबित हुई जब उनके निधन के बाद उनकी इस अंतिम इच्छा को पूरी शिद्धत के साथ निभाया गया.
सनांतर सिनेमा की शान और बेहतरीन अदाकारी से हिंदी पर्दे पर राज करने वाली स्मिता पाटिल की ऑन-स्क्रीन जिंदगी जितनी बेबाक रही, उनकी रियल लाइफ उतनी ही कम समय में उथल-पुथल से गुजर गई. महज 31 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह जाने वाली स्मिता की जिंदगी से जुड़े कई ऐसे किस्से हैं, जो उनकी मौत से पहले की बेचैनी और उनकी आखिरी अधूरी इच्छाओं की गवाही देते हैं.
स्मिता पाटिल ने महज 31 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया था. आज, 17 अक्टूबर को उनकी जयंती है. उन्होंने ‘भूमिका’, ‘मंथन’, ‘अर्थ’, ‘बाजार’ और ‘अर्ध सत्य’ जैसी फिल्मों में शानदार अभिनय किया. आइए जानते हैं उनकी जिंदगी के आखिरी दिनों की कहानी, उन दर्द भरे पलों और उन अधूरी इच्छाओं के बारे में, जिन्हें वह पूरा नहीं कर सकीं.
बचपन से ही कला से था गहरा नाता
स्मिता पाटिल का जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ, जहां सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर बातचीत होती थी. उनके पिता शिवाजीराव पाटिल राजनेता थे और मां विद्या पाटिल सामाजिक कार्यकर्ता थीं. बचपन से ही स्मिता की दिलचस्पी कला में थी. यही लगाव आगे चलकर उन्हें एक्टिंग की दुनिया तक ले आया.
लेकिन पर्दे पर दूसरों की जिंदगी को जीने वाली स्मिता की अपनी जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आने वाला था, जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी.
मां बनने के बाद बदल गई थी जिंदगी
नवंबर 1986 में स्मिता ने बेटे प्रतीक को जन्म दिया. मां बनने के बाद उनकी दुनिया बदल गई थी. अब उनकी खुशियों के केंद्र में उनका छोटा-सा बच्चा था. वह उसके भविष्य के सपने देखने लगी थीं.
दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, निधन से एक दिन पहले स्मिता अपने बेटे के पास गईं. उन्होंने उसे गोद में लिया और उसके भविष्य के बारे में सोचने लगीं. कभी कल्पना करतीं कि बड़ा होकर बेटा उनकी तरह एक्टर बनेगा, तो कभी सोचतीं कि वह अपने नाना की तरह राजनीति में जाएगा.
एक मां अपने बच्चे के लिए सपने बुन रही थी. वह उसके आने वाले कल के बारे में सोच रही थी. लेकिन उसे क्या पता था कि जिंदगी उसे अपने बेटे के साथ बिताने के लिए बहुत कम वक्त देने वाली है.
बचपन की यादों में लौटना चाहती थीं स्मिता
उस दिन स्मिता को अपने बचपन की यादें भी सताने लगीं. पुणे में बहनों के साथ बिताए दिन और मां के गाए मराठी लोकगीत उनके जेहन में घूमने लगे. उन्होंने उन गानों को एक नोटबुक में लिखने और फिर से गाने की इच्छा जताई थी.
यह कोई बड़ी ख्वाहिश नहीं थी. बस बचपन के उन पलों को दोबारा महसूस करने की चाह थी, जो वक्त के साथ पीछे छूट गए थे. जिंदगी की भागदौड़ में शायद वह उन यादों को फिर से जीना चाहती थीं.
लेकिन उस दिन उनकी तबीयत ठीक नहीं थी. शरीर में दर्द था और मन में अजीब-सी बेचैनी. वह अपने रोजमर्रा के काम कर रही थीं, मगर भीतर कुछ ऐसा था, जो उन्हें परेशान कर रहा था.
‘कुछ ठीक नहीं लग रहा…’, आखिरी दिन स्मिता पाटिल को क्यों हो रही थी बेचैनी?
स्मिता की तबीयत बिगड़ने लगी थी. इसी दौरान उन्होंने अपनी हेयर ड्रेसर माया से गोद भराई की वीडियो कैसेट मांगी. वह चाहती थीं कि बेटे के नामकरण के मौके पर अपनी बहनों के साथ बैठकर वह वीडियो देखें. उन्होंने यह भी कहा कि बेटे के साथ उनकी कोई तस्वीर नहीं है.
इसके बाद उन्होंने माया से अपनी बेचैनी का जिक्र किया. दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, स्मिता ने कहा कि उन्हें अच्छा महसूस नहीं हो रहा है और वह चाहती हैं कि माया उनके ठीक होने की दुआ करे.
उनकी बात सुनकर कोई भी परेशान हो सकता था. आखिर वह हाल ही में मां बनी थीं और उनकी तबीयत भी ठीक नहीं चल रही थी. लेकिन उस वक्त शायद किसी को अंदाजा नहीं था कि आने वाले घंटे उनकी जिंदगी के सबसे मुश्किल घंटे साबित होंगे.
मां से सुलझाए थे सारे गिले-शिकवे, पूनम ढिल्लों को भी किया फोन
स्मिता ने मां से अपने रिश्ते और बीते दिनों की परेशानियों के बारे में बात की. उन्होंने कहा कि बीते कुछ समय में मां से कई बार झगड़ा हुआ था, लेकिन अब सब ठीक हो गया है और उन्होंने अपनी परेशानियों को सुलझा लिया है.
इसके बाद उन्होंने एक्ट्रेस पूनम ढिल्लों को फोन किया. उन्होंने उनसे बात की और मिलने की इच्छा जताई. उस दिन स्मिता अपने करीबियों से जुड़ना चाहती थीं. वह परिवार और दोस्तों के साथ वक्त बिताना चाहती थीं.
शाम को राज बब्बर घर लौटे तो स्मिता उनके साथ एक कार्यक्रम में जाना चाहती थीं. कुछ देर के लिए लगा कि उनकी तबीयत बेहतर है. लेकिन फिर अचानक उनकी हालत बिगड़ने लगी. उनका चेहरा पीला पड़ गया और उन्हें तेज दर्द होने लगा.
स्मिता को लेकर अस्पताल की ओर भागा परिवार
स्मिता की बिगड़ती हालत देखकर परिवार के लोग घबरा गए. उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाने की तैयारी की गई. एक तरफ उनकी तबीयत लगातार खराब हो रही थी, तो दूसरी तरफ उनका नवजात बेटा घर पर था. मां बनने के कुछ ही दिन बाद स्मिता को अपने बच्चे से दूर अस्पताल जाना पड़ा. परिवार को उम्मीद थी कि इलाज से वह ठीक हो जाएंगी. लेकिन हालात तेजी से बिगड़ते गए.
13 दिसंबर 1986 को स्मिता पाटिल का निधन हो गया. वह सिर्फ 31 साल की थीं. उनका बेटा अभी दुनिया को ठीक से समझ भी नहीं पाया था और उसके सिर से मां का साया उठ गया.
जिस अभिनेत्री के सामने पूरी जिंदगी पड़ी थी, जिसकी आंखों में अपने बच्चे के भविष्य के सपने थे, उसकी कहानी इतनी जल्दी खत्म हो गई. फिल्म इंडस्ट्री ने एक बेहतरीन कलाकार खो दिया और प्रतीक ने अपनी मां को.
‘सुहागन की तरह सजाकर विदा करना…’, पूरी हुई आखिरी इच्छा
स्मिता के निधन के बाद उनकी एक पुरानी बात फिर याद की गई. उनके मेकअप आर्टिस्ट दीपक सावंत ने ‘रील मीट्स रियल’ में बताया था कि स्मिता उनसे अक्सर कहती थीं कि जब वह दुनिया में न रहें, तो उन्हें सुहागन की तरह सजाकर विदा किया जाए.
दीपक सावंत के मुताबिक, वह स्मिता को ऐसी बातें करने से रोकते थे. लेकिन वह अपनी इच्छा दोहराती रहती थीं. उनके निधन के बाद जब उनकी मां ने दीपक को बुलाया, तो वह भावुक हो गए. उन्होंने स्मिता को उनकी इच्छा के मुताबिक सजाया और इस तरह उनकी आखिरी ख्वाहिश पूरी की.
दीपक सावंत ने स्मिता पाटिल के निधन के बाद के मुश्किल समय को भी याद किया. उन्होंने बताया कि स्मिता की बहन उस वक्त शिकागो में थीं और उन्हें भारत पहुंचने में दो से तीन दिन लगने वाले थे. उनके आने तक स्मिता के पार्थिव शरीर को बर्फ पर रखा गया था. दीपक के मुताबिक, इस दौरान शरीर में सूजन आ गई थी. उन्होंने बताया कि स्मिता का आखिरी मेकअप करना उनके लिए बेहद भावुक पल था और इसे याद करना आज भी आसान नहीं है.
क्या स्मिता को सचमुच अपनी मौत का पहले से अहसास था? इस सवाल का कोई पक्का जवाब नहीं है. उनके बारे में ऐसी कई बातें और किस्से मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आए हैं, लेकिन उन्हें निश्चित सच नहीं कहा जा सकता.
अपने बेटे को बड़ा होते नहीं देख सकीं स्मिता, अधूरे रह गए जिंदगी के कई सपने
स्मिता पाटिल की जिंदगी का सबसे दर्दनाक पहलू यह रहा कि वह अपने बेटे को बड़ा होते नहीं देख सकीं. वह उसके साथ बचपन की यादें नहीं बना सकीं और न ही उसके भविष्य को अपनी आंखों के सामने आकार लेते देख पाईं.
लेकिन स्मिता की कहानी सिर्फ उनकी कम उम्र में हुई मौत या उनकी आखिरी इच्छा तक सीमित नहीं है. उन्होंने अपने अभिनय से हिंदी सिनेमा में ऐसी पहचान बनाई, जिसे आज भी याद किया जाता है. उनके किरदार, उनकी बेबाकी और पर्दे पर उनकी मौजूदगी आज भी दर्शकों के दिलों में जिंदा है.
17 अक्टूबर को उनकी जयंती पर उनकी जिंदगी को याद करते हुए मन में एक सवाल जरूर आता है- अगर स्मिता को थोड़ा और वक्त मिला होता, तो वह कितनी और कहानियां पर्दे पर उतारतीं और अपने बेटे के साथ कितने खूबसूरत पल जीतीं?
इस सवाल का जवाब कभी नहीं मिलेगा. लेकिन उनकी फिल्मों और उनसे जुड़े किस्सों में स्मिता पाटिल हमेशा जिंदा रहेंगी. उनकी जिंदगी छोटी जरूर थी, पर उनकी अदाकारी की कहानी आज भी खत्म नहीं हुई है.









