
कभी मजदूरी कर चलाती थीं परिवार की आजीविका, आज तीन एकड़ में खेती से अर्जित की तीन लाख रुपये तक की आमदनी
बिहान योजना से मिला आर्थिक संबल, 50 हजार रुपये के ऋण से मिली आत्मनिर्भरता की राह
अम्बिकापुर 06 नवम्बर 2026/ स्व-सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं न केवल लखपति दीदी बन रही हैं बल्कि अपनी आजीविका के नए साधन भी विकसित कर रही हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य शासन की जनहितैषी योजनाओं से ग्रामीण महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रही हैं। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के साथ उनके आत्मविश्वास और आर्थिक स्वतंत्रता को नई दिशा दे रहा है। सरगुजा जिले के लखनपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत दमोहकुड़ की श्रीमती रुकमनियां ने अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प से यह साबित किया है कि अवसर और सहयोग मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी सफलता की नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकती हैं। कभी मजदूरी पर निर्भर रहने वाली आज सब्जियों की खेती से तीन लाख रुपये से अधिक तक की आमदनी अर्जित कर लखपति दीदी के रूप में अपनी पहचान बना रहीं हैं।
आर्थिक निर्भरता से आत्मनिर्भरता तक का सफर
गुलाब महिला स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष श्रीमती मुना रुकमनिया के जीवन में बिहान योजना से जुड़ने के बाद सकारात्मक बदलाव आया। पहले वे मजदूरी कर परिवार की आजीविका चलाती थीं। सीमित आय के कारण आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता था। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें 50 हजार रुपये का ऋण मिला, जिससे उन्होंने तीन एकड़ भूमि में सब्जियों की खेती शुरू की। वर्तमान में वे खीरा, टमाटर, मटर, गोभी, मिर्च और करेला सहित विभिन्न सब्जियों का उत्पादन कर रही हैं। खेती में उनकी मेहनत रंग लाई और उन्हें तीन लाख रुपये तक की आमदनी हुई। इससे न केवल परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई, बल्कि स्वयं के निर्णय से आजीविका आगे बढ़ाने का उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है।
समूह की शक्ति से मिली नई पहचान
श्रीमती रुकमनिया बताती हैं कि समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आर्थिक सहायता के साथ अन्य महिलाओं का सहयोग और मार्गदर्शन भी मिला। समूह की दीदियां समय-समय पर खेती के बेहतर तरीकों की जानकारी देती हैं, जिन्हें अपनाकर वे अपने कार्य को आगे बढ़ा रही हैं। सामूहिक सहयोग और अपनी मेहनत के बल पर उन्होंने लखपति दीदी के रूप में पहचान बनाई है।
कभी 10-12 हजार रुपये कमाना भी था मुश्किल, आज तीन लाख तक पहुंची आमदनी
अपनी सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए श्रीमती रुकमनिया बताती हैं कि पहले 10 से 12 हजार रुपये की आमदनी जुटाना भी मुश्किल होता था। आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण बड़े स्तर पर खेती करने के बारे में सोच भी नहीं पाती थीं। लेकिन शासन की सहायता से आज वे अपनी खेती संभाल रही हैं और परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन की मदद से ही वे आगे बढ़ सकी हैं। आज लखपति दीदी बनकर उन्हें खुशी और गर्व महसूस हो रहा है।
सशक्त महिलाएं बन रहीं ग्रामीण अर्थव्यवस्था की ताकत
रुकमनिया की सफलता महिला सशक्तिकरण की उस बदलती तस्वीर को सामने लाती है, जिसमें ग्रामीण महिलाएं अब केवल परिवार की जिम्मेदारियां निभाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि स्वयं आय अर्जित कर परिवार की आर्थिक प्रगति में सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं।
15 नवंबर से शुरू होगी धान खरीदी, सरगुजा जिले के 61 उपार्जन केंद्रों में तैयारियां अंतिम चरण में
जिले के 61 उपार्जन केंद्रों में 62 हजार 471 किसान पंजीकृत
67 हजार 929.40 हेक्टेयर धान के रकबे का हुआ पंजीयन’
उपार्जन केंद्रों में पेयजल, छाया और साफ-सफाई सहित आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही सुनिश्चित
अम्बिकापुर 06 नवम्बर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य शासन किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने तथा धान खरीदी की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी एवं सुविधाजनक बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है। इसी क्रम में सरगुजा जिले में आगामी 15 नवंबर से प्रारंभ होने वाली धान खरीदी को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिले के सभी धान उपार्जन केंद्रों में आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।
खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के अंतर्गत जिले में कुल 62 हजार 471 किसानों का पंजीयन किया गया है, जिनका कुल पंजीकृत रकबा 67 हजार 929.40 हेक्टेयर है। जिले में पूर्व में संचालित 54 धान उपार्जन केंद्रों के अतिरिक्त किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए 7 नवीन धान उपार्जन केंद्र बनाए गए हैं। इसके साथ ही जिले में धान उपार्जन केंद्रों की कुल संख्या बढ़कर 61 हो गई है। इन केंद्रों के माध्यम से पंजीकृत किसानों से धान खरीदी की जाएगी।
नवीन उपार्जन केंद्रों से किसानों को मिलेगी सुविधा, कम होगी दूरी
राज्य शासन द्वारा किसानों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए जिले में 7 नए धान उपार्जन केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों के प्रारंभ होने से संबंधित ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए दूरस्थ उपार्जन केंद्रों तक जाने की आवश्यकता कम होगी। इससे किसानों के परिवहन में लगने वाले समय और खर्च में कमी आने के साथ धान विक्रय की प्रक्रिया भी अधिक सुविधाजनक हो सकेगी।
उपार्जन केंद्र में तैयारियां लगभग पूर्ण, किसानों की सुविधाओं पर विशेष ध्यान
दरिमा धान उपार्जन केंद्र में भी खरीदी को लेकर तैयारियां लगभग अंतिम चरण में हैं। धान उपार्जन समिति के सत्यम कुमार ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार 15 नवंबर से धान खरीदी प्रारंभ होनी है। इसके लिए केंद्र परिसर की साफ-सफाई के साथ किसानों के लिए पेयजल, बैठने हेतु छाया सहित अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की जा रही है।
उन्होंने बताया कि दरिमा समिति में लगभग 885 किसान पंजीकृत हैं, जिनमें से प्रतिवर्ष धान का विक्रय करते हैं। किसानों को उपार्जन केंद्र में अपनी उपज बेचने के दौरान किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसे ध्यान में रखते हुए सभी आवश्यक तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। खरीदी प्रारंभ होने से पहले शेष व्यवस्थाएं भी पूर्ण कर ली जाएंगी, ताकि किसानों को बेहतर सुविधाओं के साथ सुचारू रूप से धान विक्रय की सुविधा मिल सके।
दीपावली पर्व पर अग्नि दुर्घटनाओं से बचाव के लिए एडवाइजरी जारी
पटाखे जलाते समय बरतें विशेष सावधानी, सुरक्षित एवं जिम्मेदारीपूर्वक मनाएं दीपावली
अम्बिकापुर 06 नवम्बर 2026/ दीपावली पर्व के दौरान पटाखों एवं दीपों के उपयोग से आगजनी की दुर्घटनाओं की आशंका को देखते हुए छत्तीसगढ़ अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा अम्बिकापुर द्वारा नागरिकों के लिए आवश्यक अग्नि सुरक्षा एडवाइजरी जारी की गई है। विभाग ने सभी नागरिकों, व्यापारियों, पटाखा विक्रेताओं एवं आवासीय कॉलोनियों के निवासियों से सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए दीपावली का पर्व सुरक्षित एवं हर्षोल्लास के साथ मनाने की अपील की है।
पटाखा दुकानदारों एवं व्यवसायियों के लिए निर्देश-
पटाखा विक्रेताओं को निर्देशित किया गया है कि वे सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी वैध अस्थायी अनुज्ञप्ति के अनुसार निर्धारित स्थान पर ही पटाखों का विक्रय करें। दुकानों में पेट्रोल, डीजल एवं गैस सिलेंडर जैसी ज्वलनशील सामग्री न रखें। प्रत्येक दुकान में कम से कम दो कार्यशील अग्निशमन यंत्र अनिवार्य रूप से उपलब्ध रखें। दुकानों के बीच निर्धारित सुरक्षित दूरी बनाए रखें तथा विद्युत वायरिंग मानक अनुरूप रखें। दुकान में धूम्रपान, बीड़ी, सिगरेट एवं किसी भी प्रकार की खुली आग पूर्णतः प्रतिबंधित रखें। पटाखों का भंडारण निर्धारित सीमा के अनुसार करें तथा पानी, रेत एवं अग्निशमन उपकरणों की पर्याप्त व्यवस्था रखें। दुकानों के सामने आवागमन एवं अग्निशमन वाहनों के लिए रास्ता खाली रखना भी अनिवार्य है।
बच्चों एवं अभिभावकों के लिए सुरक्षा निर्देश-
बच्चों को पटाखे हमेशा बड़ों की देखरेख में ही जलाने दें। पटाखे खुले मैदान एवं सुरक्षित स्थान पर जलाएं तथा इस दौरान सूती एवं आरामदायक कपड़े पहनें। पटाखे जलाने के लिए मोमबत्ती का उपयोग करें और उन्हें हाथ में पकड़कर न जलाएं। फूटे हुए अथवा अधजले पटाखों को दोबारा जलाने का प्रयास न करें और न ही पटाखों को जेब में रखें। रॉकेट एवं हवाई पटाखे खुले स्थान पर ही जलाएं तथा उनका मुंह मकान, बिजली के तारों या लोगों की ओर न रखें। पटाखे जलाते समय चेहरे एवं आंखों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें।
घर एवं आवासीय परिसर में बरतें सावधानी-
घर के अंदर एवं बाहर दीपक सुरक्षित स्थान पर रखें। दीपक एवं मोमबत्तियों को पर्दों, लकड़ी के सामान तथा अन्य ज्वलनशील वस्तुओं से दूर रखें। घर से बाहर जाते समय सभी दीपक, मोमबत्तियां एवं विद्युत सजावटी लाइट बंद कर दें। बिजली के ओवरलोड कनेक्शन एवं खुले तारों का उपयोग न करें। पूजा स्थल एवं शयनकक्ष में जलते दीपक को अकेला न छोड़ें। घर में अग्निशमन यंत्र के साथ पानी एवं रेत से भरी बाल्टी की व्यवस्था रखें। गैस सिलेंडर एवं ज्वलनशील पदार्थों को पटाखों से दूर रखें तथा छत, बालकनी एवं संकरे स्थानों पर पटाखे न जलाएं। परिवार के सभी सदस्यों को आपातकालीन स्थिति में सुरक्षित बाहर निकलने का रास्ता मालूम होना चाहिए।
बाजार एवं भीड़भाड़ वाले स्थानों पर विशेष सतर्कता-
बाजारों एवं सार्वजनिक स्थलों पर पटाखे जलाना प्रतिबंधित रखें। दुकानों एवं प्रतिष्ठानों के सामने अग्निशमन वाहनों के आवागमन के लिए पर्याप्त रास्ता उपलब्ध कराएं। अनधिकृत विद्युत कनेक्शन एवं असुरक्षित वायरिंग का उपयोग न करें। भीड़भाड़ वाले स्थानों पर ज्वलनशील सामग्री का अनावश्यक भंडारण न करें। सभी व्यापारिक प्रतिष्ठानों में अग्निशमन उपकरण उपलब्ध एवं कार्यशील रखें तथा आपातकालीन निकास मार्ग अवरुद्ध न करें। आग या धुआं दिखाई देने पर तत्काल लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाएं।
कॉलोनियों एवं आवासीय क्षेत्रों के लिए निर्देश-
कॉलोनियों की सड़कों एवं गलियों में पटाखे जलाते समय विशेष सावधानी बरतें। संकरी गलियों एवं मकानों के बीच रॉकेट तथा हवाई पटाखे न चलाएं। बिजली के ट्रांसफार्मर, विद्युत तारों, वाहनों एवं पार्किंग स्थलों से दूर सुरक्षित स्थान पर ही पटाखे जलाएं। मुख्य मार्गों एवं गलियों में वाहनों की पार्किंग इस प्रकार न करें कि अग्निशमन वाहनों का आवागमन बाधित हो। सामुदायिक भवनों एवं पार्कों में सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करें। जलते हुए पटाखे एवं दीपक कचरे के ढेर में न डालें।
आग लगने या दुर्घटना होने पर तत्काल अपनाएं ये उपाय-
नागरिकों को सलाह दी गई है कि आग लगने की स्थिति में घबराएं नहीं और तत्काल आसपास के लोगों को सूचित करें। आग छोटी होने पर उपलब्ध अग्निशमन उपकरणों की सहायता से बुझाने का प्रयास करें। गैस सिलेंडर या विद्युत उपकरण में आग लगने पर उचित अग्निशमन विधि अपनाएं। आग तेजी से फैलने पर तत्काल सुरक्षित स्थान पर चले जाएं। किसी व्यक्ति के झुलसने पर प्रभावित स्थान को सामान्य ठंडे बहते पानी से लगभग 20 मिनट तक ठंडा करें। झुलसे हुए स्थान पर बर्फ, तेल या टूथपेस्ट का उपयोग न करें। किसी भी बड़ी आग या आपातकालीन स्थिति में तत्काल अग्निशमन विभाग को सूचना दें।
आपातकालीन स्थिति में इन नंबरों पर करें संपर्क-
विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि आगजनी अथवा किसी भी बड़ी आपातकालीन स्थिति में तत्काल अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा को सूचना दें। इसके लिए 101 एवं 112 आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर के साथ विभागीय संपर्क नंबर 07774-220100 तथा 07774-222123 जारी किए गए हैं।
विभाग ने सभी नागरिकों से अग्नि सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करने, सतर्कता बरतने और स्वयं के साथ-साथ दूसरों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए दीपावली का पर्व सुरक्षित, शांतिपूर्ण एवं हर्षोल्लास के साथ मनाने की अपील की है।









