
राजनांदगांव 06 नवम्बर 2026। बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान अंतर्गत जिला पंचायत राजनांदगांव के सभाकक्ष में जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव श्रीमती प्रीति नागवंशी उपस्थित थी। उन्होंने बताया कि बाल विवाह शून्यीकरण की विधिक प्रक्रिया एवं बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। सभी प्रतिभागियों को बाल विवाह रोकथाम हेतु शपथ दिलाई गई। कार्यशाला में कंसल्टेंट यूनिसेफ महिला एवं बाल विकास विभाग रायपुर श्री शशांक शर्मा द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया गया। उन्होंने बताया कि बाल विवाह की रोकथाम केवल एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसके लिए प्रशासन, पुलिस, शिक्षा विभाग, पंचायत प्रतिनिधियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मितानिनों, सामाजिक संगठनों एवं समुदाय की सामूहिक भागीदारी आवश्यक है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की भूमिका ग्राम पंचायत स्तर पर बाल विवाह के विरूद्ध जनजागरूकता, ग्राम सभाओं में इस विषय पर चर्चा करना तथा ग्राम स्तर पर होने वाले विवाहों की जानकारी एवं निगरानी में सहयोग करना है। जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी श्रीमती दीपा शाह द्वारा जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने हेतु प्रतिभागियों को अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार करने, प्रत्येक ग्राम सभा में बाल विवाह के मुद्दे पर चर्चा करने तथा सभी पंचायतों में विवाह पंजी अनिवार्य रूप से संधारित करने के लिए प्रेरित किया गया। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के प्रावधानानुसार 21 वर्ष से कम आयु के पुरूष तथा 18 वर्ष से कम आयु की महिला का विवाह बाल विवाह की श्रेणी में आता है। कम उम्र में विवाह होने से विशेष रूप से बालिकाओं की शिक्षा बाधित होती है तथा उनके शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। बाल विवाह बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन है। प्रत्येक बच्चे को शिक्षा प्राप्त करनेए सुरक्षित वातावरण में रहने, अपने व्यक्तित्व का विकास करने तथा सम्मानपूर्वक बचपन जीने का अधिकार है। इसलिए समाज के प्रत्येक वर्ग को बाल विवाह के विरूद्ध जागरूक करना, परिवारों को समझाइश देना तथा बालिकाओं की शिक्षा को प्रोत्साहित करना आवश्यक है। जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में व्यापक जनजागरूकता गतिविधियां संचालित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। ग्राम पंचायतों, नगरीय निकायों, विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों तथा सामुदायिक बैठकों के माध्यम से लोगों को बाल विवाह के कानूनी एवं सामाजिक दुष्परिणामों से अवगत कराया जाना महत्वपूर्ण है। कार्यशाला में नागरिकों से अपने आसपास होने वाले संभावित बाल विवाह की जानकारी नहीं छुपाने तथा संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग अथवा चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर सूचना देने की अपील की गई।








