योग: मन की शुद्धि से मोक्ष तक का मार्ग
यदि शांति, संतोष, करुणा और संयम बोए जाएँ, तो जीवन सुंदर हो उठता है। योग हमें यह विवेक देता है कि हम क्या सोचें, क्यों सोचें, और कैसे सोचें। यही…
Read moreविकास उपाध्याय के नेतृत्व मे शराबियों का स्वागत, चखना मुफ़्त, ज़ुर्म करने वाले-सामान्यजन को सजा, सरकारी से सौहार्द्र, वरिष्ठ पत्रकार जवाहर नागदेव की खरी… खरी….
शराब हर दल के लिये वरदान है। इसलिये हर कोई इसके आगे दण्डवत रहता है। बस जो सत्ता में है वो इस पर प्रायः मौन समर्थन में दिखता है और…
Read moreकोचिंग का क्रेडिट, स्कूल की गुमनामी: शिक्षकों के साथ यह अन्याय कब तक?
शिक्षा कभी एक बाज़ार नहीं थी। वह एक संबंध था – गुरु और शिष्य का। लेकिन जब से शिक्षा के क्षेत्र में कोचिंग संस्थानों का वर्चस्व बढ़ा है, तब से…
Read moreइंदिराजी 54 सैनिकों का क्या दोष था ‘पग-पग’ पर उछली ‘पग’ और गिरा ‘पग’ पर वरिष्ठ पत्रकार जवाहर नागदेव की खरी…. खरी….
पग-पग (हर कदम) पर पग (पगड़ी) उछलती है और बार-बार पग (पैरों) पर गिरता है, फिर भी अपनी हरकतों से बाज नहीं आता। तात्पर्य ये है कि हमेशा दुश्मनी का…
Read moreविशेष आलेख : कॉरपोरेट जगत में व्हिसलब्लोअर्स की दयनीय स्थिति
(लेखकद्वय : परंजॉय गुहा ठाकुरता और आयुष जोशी, अनुवाद : संजय पराते) अपने कामों को उजागर करने के लिए संरक्षित और प्रशंसित होने के बजाय, भारतीय व्हिसलब्लोअर को प्रतिशोध, कानूनी…
Read moreजशपुर जिले के किसान अब गर्मी के मौसम में खेती से अतिरिक्त आय अर्जित कर अच्छे जीवन यापन कर रहे हैं।
राज्य के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में दूरस्थ अंचल में निवासरत किसानों और जरूरतमंदों को छत्तीसगढ़ शासन द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। इसी कड़ी…
Read moreबॉक्स ऑफिस पर ‘हाउसफुल 5’ की डीसेंट शुरुआत, ‘ठग लाइफ’ की कमाई दूसरे दिन ही रह गई आधी
बॉक्स ऑफिस पर इस शुक्रवार साल की सबसे बड़ी कॉमेडी फिल्म मानी जाने वाली ‘हाउसफुल 5’ सिनेमाघरों में रिलीज हुई। फिल्म को लेकर काफी बज क्रिएट किया गया था और…
Read moreटप्पा खाकर उछली गेंद कैचकर खुश राहुल, काम के, बाराती और लंगड़े घोड़े कांग्रेस में वरिष्ठ पत्रकार जवाहर नागदेव की खरी… खरी….
भोपाल में संगठन सृजन अभियान की शुरूआत करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस में तीन तरह के घोड़े हैं। एक रेस के यानि काम के जिन्हें चुनाव लड़वाया…
Read moreऔर अब मामला शर्मिष्ठा पनोली का : लोकतंत्र वाकई खतरे में है! (आलेख : संजय पराते)
लगता है हमारी सरकार और न्यायपालिका के लिए सांप्रदायिकता, वैमनस्यता और धार्मिक भावनाओं को आहत करने के पैमाने अलग-अलग लोगों के लिए अलग-अलग है। सत्ताधारी पार्टी से जुड़े नेताओं के…
Read moreनिशाने पर सिर्फ मूर्ति भर नहीं है! (आलेख : बादल सरोज)
मप्र हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ के परिसर में डॉ. बी आर अम्बेडकर की मूर्ति लगाने के सवाल पर हो रहे विरोध को सिर्फ स्वयं को वकील बताने वाले चंद कुंदबुद्धि,…
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