Ro no D15139/23

शोले में दिखाया-सिक्के का एक ही पहलू, बृजमोहन का प्रयास-कुम्हारी टोल-रूकने से छूट, कायम है लूट, वरिष्ठ पत्रकार जवाहर नागदेव की खरी… खरी…. 

छत्तीसगढ़ के लोकप्रिय सांसद बृजमोहन अग्रवाल के प्रयासों से कुम्हारी के टोल नाके में बड़ी राहत मिली है। अगले साल जून से यहां पर रूकना नहीं पड़ेगा। यहां पर टोल आटोमैटिक सिस्टम से जुड़ जाएगा और अपने आप पैसे कट जाएंगे। लेकिन पैसे तो तब भी देने ही होंगे।

वास्तव में इस टोल की मियाद 2015 में ही पूरी हो गयी थी लेकिन सड़क मेन्टेनेन्स के नाम पर आज तक वसूली जारी है। इस पर कई बार विवाद भी हुआ है। सांसद सरोज पाण्डे और पूर्व मंत्री राजेश मूणत भी अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। लेकिन फिर भी पैसे वसूली पर कोई रोक नहीं लग पाई है।

अगले साल जून के बाद से आपको अपनी गाड़ी वहां रोकनी नहीं पड़ेगी लेकिन जेब तो कटवानी ही पड़ेगी।

कितनी बार देखी शोले 

हमारे जमाने में…. ये तारक मेहता का उल्टा चश्मा के भीड़े का डायलाॅग है जो यहां लागू हो रहा है तो सुधार कर कहूं कि हमारे तरूणाई के जमाने में 1976 में एक फिल्म आई थी शोले। ये मील का पत्थर साबित हुई।

उन दिनों टीवी नहीं थी, मोबाईल नहीं था, इंटरटंेटमेंट का कोई साधन नहीं था तो पिक्चर जाना एक बड़ा उत्सव की तरह मनाया जाता था। ऐसे में महीनो तक नयी पिक्चर का इंतजार रहता था और प्रायः दोस्तों रिश्तेदारों के बीच चर्चा का विषय रहता था कि फलां पिक्चर देखी कि नहीं, कैसी है, किसने कैसा काम किया है, आदि… । लेकिन एकमात्र शोले वो पिक्चर थी जिसके बारे में कोई नहीं पूछता था कि ‘देखी क्या…।

शोले के बारे में पहला डायलाॅग होता था ‘कितनी बार देखी’। सभी उसे बार-बार देखते थे। पान दुकानों के बाहर उसके डायलाॅग चला करते थे। खेल-खेल में भी उसी की बातें हुआ करती थीं।

उसका एक डायलाॅग ‘कितने आदमी थे’ तो हर क्षेत्र स्तर के इंसान की जबान पर था। कुछ वर्ष पहले एक फिल्म आई थी ‘अतिथि ! तुम कब जाओगे’। इसमें शोले के इस डायलाॅग कितने आदमी थे… सरदार दो…. का बेहतरीन प्रयोग कर एक हास्य दृष्य डाला गया था। यानि इतने वर्षांे के बाद भी शोले का क्रेज़ बना हुआ है।

इस डायलाॅग पर ढेर सारे चुटकुले भी बन चुके हैं 

ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे,

होली के दिन दिल खिल जाते हैं

लीक से हटकर बनी इस फिल्म में कई बेहतरीन मजेदार सीन थे। यूं कहा जाता है कि हर सिक्के के दो पहलू होते हैं पर इसमें सिक्के का एक ही पहलू दिखाया गया।

जब भी कोई भलाई का काम करना होता तो जय यानि अमिताभ बच्चन अपना सिक्का निकालकर उछालता और हेड ही आता और तय किये अनुसार दोनों दोस्त जय और वीरू उस काम को करते।

कारण ये कि सिक्के के दोनों ओर हेड ही प्रिन्ट था टेल था ही नहीं। दोस्ती को प्रदर्शित करते हुए गाना ‘ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे’ आज भी सुना-गाया जाता है। इसी तरह होली का गाना ‘होली के दिन दिल खिल जाते हैं रंगों में रंग मिल जाते हैं’ मस्ती भरे होली गाने में मील का पत्थर साबित हुआ है।

ट्रेन में डाकुओं की गोली से घायल इंस्पेक्टर को अस्पताल ले जाने के लिये भी इस सिक्के का सहारा लिया और अंत में वीरू की जान बचाने के लिये उसे गांव भेजकर खुद डाकूओं से अकेले लड़ने का निर्णय लेने में भी सिक्के को ही माध्यम बनाया गया।

है न दोस्ती के लिये दिलचस्प कहानी। शाबाशी है शोले के निर्माताओं और कलाकारों को। 50 साल पूरे हुए शोले को। आज भी मजेदार।


जवाहर नागदेव, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, चिन्तक, विश्लेषक

मोबा. 9522170700

‘बिना छेड़छाड़ के लेख का प्रकाशन किया जा सकता है’

  • Related Posts

    Diwali 2026: बिहार में दिवाली से पहले बेटियां क्यों बनाती हैं मिट्टी का घरौंदा? जानें कुलहिया-चुकिया की परंपरा

    Diwali 2026: दिवाली का त्योहार आते ही बिहार के गांवों और कस्बों के आंगन एक खास रौनक से भर जाते हैं. कहीं घरों की सफाई होती है, तो कहीं रंगोली…

    Read more

    धनतेरस – दिवाली पर महंगे गैजेट और होम अप्लायंसेज खरीदने से पहले गांठ बांध लें ये बातें, फायदे में रहेंगे

    धनतेरस – दिवाली की खरीदारी में अब सिर्फ नया सामान घर लाना ही मकसद नहीं रह गया है. लोग ऐसा स्मार्टफोन, टीवी या होम अप्लायंस चाहते हैं, जो आने वाले…

    Read more

    NATIONAL

    खतरे में नौकरी: गुरुजी संभल जाइए! क्लासरूम में AI की एंट्री, क्या खतरे में हैं कोचिंग टीचर्स का करियर?

    खतरे में नौकरी: गुरुजी संभल जाइए! क्लासरूम में AI की एंट्री, क्या खतरे में हैं कोचिंग टीचर्स का करियर?

    ट्रंप की परिसीमन रणनीति फेल, बीजेपी के लिए क्या है सबक? चुनावी नक्शे बदलने के बाद भी नहीं मिली जीत

    ट्रंप की परिसीमन रणनीति फेल, बीजेपी के लिए क्या है सबक? चुनावी नक्शे बदलने के बाद भी नहीं मिली जीत

    पटना में एनकाउंटर में 3 अपराधी ढेर, SHO को लगी गोली, पैक्स अध्यक्ष हत्याकांड से जुड़े थे आरोपी

    पटना में एनकाउंटर में 3 अपराधी ढेर, SHO को लगी गोली, पैक्स अध्यक्ष हत्याकांड से जुड़े थे आरोपी

    ‘मुझे शर्म आती है कि ऐसी सरकार का हिस्सा हूं’, अपनी ही सरकार को चुनौती देने पर चिराग ने बताई ये वजह’मुझे शर्म आती है कि ऐसी सरकार का हिस्सा हूं’, अपनी ही सरकार को चुनौती देने पर चिराग ने बताई ये वजह

    ‘मुझे शर्म आती है कि ऐसी सरकार का हिस्सा हूं’, अपनी ही सरकार को चुनौती देने पर चिराग ने बताई ये वजह’मुझे शर्म आती है कि ऐसी सरकार का हिस्सा हूं’, अपनी ही सरकार को चुनौती देने पर चिराग ने बताई ये वजह

    अयोध्या, काशी और मथुरा को दहलाने की धमकी: 27 नवंबर तक अलर्ट, स्कूलों-मंदिरों की बढ़ाई गई सुरक्षा

    अयोध्या, काशी और मथुरा को दहलाने की धमकी: 27 नवंबर तक अलर्ट, स्कूलों-मंदिरों की बढ़ाई गई सुरक्षा

    अमेरिका में कमजोर हुए ट्रंप, डेमोक्रेट्स की जीत का भारत-US रिश्तों पर क्या होगा असर? एक्सपर्ट से समझिए

    अमेरिका में कमजोर हुए ट्रंप, डेमोक्रेट्स की जीत का भारत-US रिश्तों पर क्या होगा असर? एक्सपर्ट से समझिए