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वरिष्ठ पत्रकार चंद्रशेखर शर्मा की बात बेबाक… राज्योत्सव की बधाईयों के साथ कल की अधूरी बात

राज्योत्सव की बधाईयों के साथ कल की अधूरी बात बेबाक ” वैसे भी सत्ता के गलियारे में बस अलीबाबा ही बदलता है चोर तो वही चालीस के चालीस ही रहते है ” पर रुकी थी आज आगे बढ़ाते है ।
25 वर्षीय युवा होते हमारे छत्तीसगढ़ में घपले घोटालों के साथ साथ तरक्की , विकास और बदलती जीवन शैली की भी बाढ़ आई हुई है । इसमें कोई शक नही कल तक सेकेंड हैण्ड मोटरसाइकल में घूमने वाले नेता अब चमचमाती महंगी चार पहिये मोटर कार के मालिक बन बैठे है , जिनकी गाड़ियों के पीछे उड़ते धूल के गुबार विकास की गाथा बयाँ करते है । अफसरों के घरों की तिजोरियां सोना चांदी और करेंसी उगल रही । जब विकास और तरक्की की बात हो तो मोदी और रमन राज की जुगलबंदी की याद आनी ही है । रमन राज में विकास की इबारत के बावजूद कर्ज माफी और मुफ्तखोर बनाती योजनाओं के झांसे में आई जनता ने कांग्रेस को चुना जरूर किंतु भ्रष्टाचार और मनमानी से जल्द ही उकता कर कांग्रेस की सरकार को फिर से वनवास में भेज दिया । दूसरी ओर 5 साल के वनवास भोग पुनः सत्ता में आई भाजपा में साय सरकार के राज में सांय सांय विकास की उम्मीद जनता को है । साय सरकार के सांय सांय विकास के कामों के बावजूद लोग रमन राज को याद करने लगे है जिसके राजनैतिक तौर पर कई मायने निकाले जा रहे है ।
खैर बात यहां विकास की हो रही है और विकास विकास के खेल में मेरा छोटा-सा शहर विकास की गाथाओं से बच जाए, यह कैसे संभव है ? मेरे शहर में भी पिछले कुछ सालों से तरक्की (?) घुटने मोड़कर आ बैठी है। जहाँ पहले गिट्टी की फेयर वेदर सड़कें या कोलतार पुती सड़कें थीं, वहाँ अब सीमेंट की सड़कें हो गई हैं। सीसी रोड पर सीसी रोड बन रही है । खेतो में सीसी रोड बन रही । एक ही नाली को बार बार तोड़ कर बनाया जा रहा है ।
मनोरंजन व घूमने के लिए बनाए गए उर्जापार्क , अटल उद्यान मृतप्राय हो गए , सुधादेवी गार्डन अपनी दुर्दशा को रो रहा । इनकी दुर्दशा के बीच एक खुशखबर ये है कि शहर को सुसज्जित धार्मिक भावनाओं से ओतप्रोत हनुमंत वाटिका और विशाल हनुमान जी की क्षत्रछाया मिल गई है , जल्द ही मेडिकल कालेज , नालंदा लाइब्रेरी , घोटिया रोड , गौरव पथ , भोरमदेव कॉरिडोर की सौगात भी धरातल पर उतरेगी ।
वैसे प्रदेश के साथ साथ शहर में विकास की गाथा लिखने चौक चौराहों , सड़को और गलियों को सजा सँवारकर शहर को सुंदर बनाने कलेक्टर से लेकर चपरासी तक मंत्री से लेकर दरी उठाने वाले कार्यकर्ता तक मजदूर से ज्यादा पसीना बहा रहे है । कुछ कुछ विकास का असर शहीद चौक , अटल चौक , गुरुनानक देव चौक , आकार ले रही चौपाटी के रूप में दिखता है ।
यहां हज़ारो जनहित के मुद्दे उछलने को कुलबुला रहे है पर विपक्ष अपने दमदार नेता की तरह लापता है तो उन मुद्दों को भुनाए कैसे और कौन। मार्केट और गलियों में सड़को पर कब्जा जमाते व्यापारियों पर भी मुंह और औकात देख कार्यवाही की खाना पूर्ति करते फोकट में टाइम पास करते अफसर की बेचारगी ने एक पुरानी कहावत सच कर दी कि शासन प्रशासन का मुक्का पुष्ट और मजबूत पीठ पर उठता तो है पर मुक्के के नीचे आते तक वो पीठ ही बदल जाती है । खैर ये तो आदि अनादि काल से चली आ रही परंपरा है कि जिसकी लाठी उसकी भैंस हमे क्या ।
विकास की गाथा के बीच प्रायवेट स्कूलो की भीड़ में सरकारी बाल मंदिर को कौन पूछता है ? अब तो यहां के मास्टर जी कौन है ? लोग भूल तक गए है शायद बाबूगिरी में मस्त है बेचारे ? तरक्की के लिए वो भी बंद हो ही गई ।आत्मानंद के नाम पर नए स्कूलों का ढिंढोरा पिटा गया जबकि नए स्कूल खोलने की जगह नवीन स्कूल जैसे कई स्कूलों की कब्र पर आत्मनन्द स्कूल खोल वाहवाही लूटी गई । नवीन स्कूल जैसे स्कूलों के बंद होने और नये स्कूल नही खुलने से जिला व ब्लॉक मुख्यालय में आकर पढ़ाई का स्वप्न देखने वाले हिंदी मीडियम के हजारों बच्चों के सपने टूट गए । हिंदी मीडियम स्कूलों की कब्र पर बने आत्मनन्द स्कूल को ही हम विकास समझ बैठे हैं ।
विकास की झलक तो नेता , ठेकेदार और अफसरों तरक्की में मिल जाती है । इनकी इस तरक्की का राज की सड़क घटिया बनाओ जेब भरो फिर सड़क बनाओ एक सड़क अलग अलग नामो से बनाओ जेब गरम करो से हो जाती है । आधुनिक मशीनों से युक्त कम मैंन पावर लगने वाले सरदार वल्लभ भाई कारखाने में ऐतिहासिक रूप से कार्यकर्ताओं व ग्रामीणों को काम दे लोगो को रोजगार देने जैसे उत्कृष्ट काम क्षेत्र की शान है अब लोगो की इस मदद के एवज में कारखाना थोड़ा बहुत नुकसान में चला जाय तो क्या बिगड़ना है लोगों को रोजगार तो मिल रहा ।
मेरे शहर और आसपास के गाँवों के लोग लोन, धान व गन्ने के बोनस से ली गई मोटर साइकलों और चारपहिये वाहनों को दनदनाते हुए शहर की सड़कों पर बेतहाशा दौड़ते हैं । शहर के बिगड़े नवाबो की बिगड़ी औलादों की रफ ड्राइविंग हमारी शान है । हमारे देश का ट्रैफिक कानून बहुत सख्त है । इसीलिये हमारे कथित जनता के हित में 100 – 200 का रंगीन कागज देखते ही पूरा कानून ही बदल देते है ? जिससे कुछ कथितों की ऊपरी कमाई भी हो ही जाती है ? अब ये विकास नहीं तो क्या है भाई ?
शहर में बने ब्रेकरों की संख्या व बेढंगी बनावट को ले शहर का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज करवाने की कवायद भी जरूरी है , कुछ ब्रेकर कम हो तो बड़े से बड़े ब्रेकर बनवा कर कमी की पूर्ति की जा सकती है । इससे जिले का नाम रतनजोत वृक्षारोपण की तरह वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हो चर्चित हो जाएगा और विश्व पटल पर नाम छा जाएगा ।
25 साल के युवा होते छात्तीसगढ़ में जैसे जैसे विकास हो रहा है विकास व उन्नति के साथ साथ लोगों की भावनाएं भीकमजोर होती जा रही है , जो जरा जरा सी बात पर आहत हो जाती है । पुरानी कहावतें या हाना भी कोई बोल दे तो अब जातिवाद के झण्डाबरदारों की भावनाए आहत हो जाती है । FIR करवाना आम हो गया है ऐसे में तो नीम चढ़े करेले से भी कड़वी बाते कहने वाले हमारे बुजुर्ग या संत कही आज छात्तीसगढ़ में आ जाते तो वो बेचारे जेल से बाहर ही निकल नही पाते । हाना , मुहावरे और कहावत बनाने वाले हमारे सियान तो शायद जिंदा ही नही रह पाते । विगत के कुछ वर्षों में जातिवाद क्षेत्रवाद का जहर धीरे धीरे छात्तीसगढ़ की नसों में भरा जा रहा है । धर्मान्तरण और जमीन जेहाद बढ़ने लगा है । धर्मान्तरण और जमीन जेहाद पर बन्द रहने वाले मुंह भी जातिवाद और आहत भावनाओ को ले मुखर हो जाते है । मूर्तियों के विध्यवन्स के बहाने भी विकास पथ पर रेंग रहे छत्तीसगढ़ का सौहार्द्र व शांति बिगाड़ने के प्रयास हो रहे है । जितना हिंदुओ के आराध्य देवी देवताओं , छात्तीसगढ़ महतारी , छात्तीसगढ़ के वीरों का अपमान किया जाता है उतना किसी अन्य धर्मों या धर्मस्थलों का नही आखिर इन सबके मायने क्या है । विकास की राह पकड़ रहे छतीसगढ़ के लिए जातिवाद व धर्मान्तरण का जहर कही आगे चल नासूर न बन जाय इस बाबत सत्ता व विपक्ष दोनो को चिंता करने की आवश्यकता है ।
इन सबके बीच आत्मसमर्पण करते व मारे जाते नक्सलियों से नक्सल मुक्त होने की ओर कदम बढ़ाते छत्तीसगढ़ को ले छात्तीसगढ़ के मुखिया विष्णुदेव साय , गृहमंत्री विजय शर्मा और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की तिकड़ी बधाई के काबिल है ।
25 वें राज्योत्सव की मंगलकामनाओं के साथ

चलते चलते एक सवाल :-
पर्यावरण नियमों को क्रशर में पिसते व नियम विपरीत खनन करते मुरम चोरों पर खनिज विभाग के स्मार्ट अधिकारी क्यो मेहरबान है ? उनकी इस मेहरबानी का राज कही वही तो नहीं??

और अंत मे :-
चोर चाहे जितनी रात में चालाकी कर जाए,
सच की किरन सुबह होते ही उजागर हो जाए।
हमने देखा है आँखों में उजालों का सफ़र,
अब उन सपनों को हक़ीक़त में ढालेंगे हम मगर।।

#जय_हो 31 अक्टूबर 2025 कवर्धा (छत्तीसगढ़)

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