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कृषि विज्ञान केन्दों के कर्मचारियों की समस्याओं के निराकरण हेतु प्रयासरत है कृषि विश्वविद्यालय

*विश्वविद्यालय प्रशासन ने आई.सी.ए.आर. और राज्य शासन से वित्तीय सहायता का किया है अनुरोध*

रायपुर, 19 फरवरी 2026 (IMNB NEWS AGENCY) इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित कृषि विज्ञान केन्द्रों के वरिष्ठ वैज्ञानिकों, विषय वस्तु विशेषज्ञों एवं अन्य कर्मचारियों की समस्ययों के निराकरण हेतु इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय निरंतर प्रयासरत है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा कृषि विज्ञान केन्द्रों के आधिकारियों एवं कर्मचारियों की वेतन विसंगतियों के संबंध में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् नई दिल्ली तथा छत्तीसगढ़ शासन से निरंतर पत्राचार कर इन विसंगतियों को दूर करने के प्रयास किये जा रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि कृषि विज्ञान केन्द्र, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् से शत-प्रतिशत वित्त पोषित परियोजना है जिसके तहत कृषि विज्ञान केन्द्रों के अधिकारियों तथा कर्मचारियों का वेतन एवं अन्य भत्ते भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा प्रदान किये जाते हैं। आई.सी.ए.आर., नई दिल्ली द्वारा 20 अगस्त 2024 को जारी नये दिशा-निर्देशों के अनुसार कृषि विज्ञान केन्द्रों में पदस्थ अधिकारियों/कर्मचारियों के वेतन भत्तों मे विशेषकर एन.पी.एस. अंशदान एवं अन्य भत्तों में कटौती की गई है। पूर्व में उपरोक्त सभी भत्तों के लिए आई.सी.ए.आर. से अनुदान प्राप्त हो रहा था।

यह भी उल्लेखनीय है कि सम्पूर्ण पूरे भारत वर्ष में 731 कृषि विज्ञान केन्द्र संचालित है सभी जगहों पर कृषि विज्ञान केन्द्र केन्द के अधिकारियों/कर्मचारियों के वेतनभत्तों में आई.सी.एस.आर. के पत्र 20 अगस्त 2024 के नये दिशा-निर्देश के उपरांत वेतन भत्तों से संबंधित कटौती होने की वजह से पूर्ण वेतन भुगतान करने में कठिनाई उत्पन्न हो रही है। नये दिशा निर्देशों के अनुसार भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा कृषि विज्ञान केन्द्रों के कर्मचारियों के मूल वेतन, मंहगाई भत्ता एवं गृह भाड़ा का भुगतान किया जा रहा है और पेंशन अनुदान एवं अन्य भत्तों का भुगतान नहीं किया जा रहा है।

इस संबंध मे कृषि विज्ञान केन्द्रों के कर्मचारियों द्वारा दायर याचिका पर उच्च न्यायालय, बिलासपुर द्वारा जारी स्थगन आदेश के परिपालन में विश्वविद्यालय द्वारा याचिकाकर्ताओं को पूर्ववत् वेतन भत्तों का भुगतान किया जा रहा है, जिसके लिए विगत वित्तीय वर्ष 2024-25 में विश्वविद्यालय ने अपने रिसिप्ट एकाउंट में से 1.6 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भुगतान किया है।

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के पास स्वयं के आय के स्त्रोत नही है अतः विश्वविद्यालय द्वारा कृषि विज्ञान केन्द्रों के कर्मचारियों को पूर्ववत् वेतन भत्तों का भुगतान करने हेतु वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य शासन से 3.50 करोड़ रुपए की राशि प्रदान करने अनुरोध किया गया है ताकि समय पर पूर्ववत् वेतन भत्तों का भुगतान किया जा सके। वेतन मे अंतर की राशि के संबंध में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद एवं छत्तीसगढ़ शासन से निरंतर पत्राचार किया जा रहा है। यदि भविष्य में आई.सी.ए.आर. द्वारा पूर्ववत् सम्पूर्ण वेतन भुगतान हेतु राशि उपलब्ध कराई जाती है या राज्य शासन से अंतर की राशि प्राप्त होती है, तो विश्वविद्यालय द्वारा भी कृषि विज्ञान केन्द्र के अधिकारियों/कर्मचारियों को पूर्ववत् वेतन एवं भत्तों का भुगतान किया जाएगा। पूर्व में विश्वविद्यालय द्वारा कृषि विज्ञान केन्द्रों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के हित में आई.सी.ए.आर. से बढ़ी हुई राशि प्राप्त होने की प्रत्याशा में उच्च वेतनमान का भी लाभ दिया गया है परन्तु उक्त राशि आज तक अप्राप्त है। आई.सी.ए.आर. से आवश्यक राशि उपलब्ध न हो पाने तथा कृषि विज्ञान केन्द्रों के अधिकारियों/कर्मचारियों द्वारा बढ़े हुए वेतन का लाभ लिये जाने के कारण वेतन भुगतान संबंधी गतिरोध उत्पन्न हो रहा है।

कृषि विज्ञान केन्द्र में कार्यरत अधिकारियों/कर्मचारियों को दिए जाने वाले वेतन भत्तों में अंतर की राशि का भुगतान आई.सी.ए.आर नई दिल्ली अथवा छत्तीसगढ़ शासन से राशि प्राप्त होने पर ही दिया जा सकता है। वर्तमान में कृषि विज्ञान केन्द्र में कार्यरत आधिकारियों/कर्मचारियों को छत्तीसगढ़ शासन के अन्य कर्मचारियों की भांति 62 वर्ष की आयु में ही सेवानिवृित्त दी जा रही है। विश्वविद्यालय में केवल शिक्षक संवर्ग के लिए ही सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष है, अन्य गैर शिक्षकीय पदों हेतु सेवा निवृत्ति आयु 62 वर्ष है। कृषि विज्ञान केन्द्रों में कार्यरत समस्त अधिकारी एवं कर्मचारी गैर शिक्षकीय संवर्ग के अतंर्गत आते हैं अतः यह कहना उचित नहीं है कि कृषि विज्ञान केन्द्रों के अधिकारियो एवं कर्मचारियों को जल्द सेवानिवृत्त किया जा रहा है। विश्वविद्यालय परिसर में कन्या छात्रावास भी स्थित है। वर्तमान में विद्यार्थियों की परीक्षाएं चल रही है। हड़ताल एवं धरना प्रदर्शन से विद्यार्थियों के अध्ययन में व्यवधान उत्पन्न होने के कारण हड़ताली कर्मचारियों को विश्वविद्यालय परिसर में प्रदर्शन करने से प्रतिबंधित की गई है।

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