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तीन सहेलियां, एक सहारा – महतारी वंदन योजना

*पेंशनबाड़ा की तीन बुजुर्ग महिलाओं को हर महीने मिल रही राहत*

रायपुर, 6 फरवरी 2026। उम्र के इस पड़ाव में जब लोग अकेलेपन, बीमारी और आर्थिक चिंता से घिर जाते हैं, ऐसे समय में रायपुर के पेंशनवाड़ा में रहने वाली तीन बुजुर्ग सहेलियों के लिए छत्तीसगढ़ शासन की महतारी वंदन योजना ऐसा एक सहारा बनकर आई है, जिसने उनके बुढ़ापे के दिनों को थोड़ा आसान और सम्मानजनक बना दिया है।

श्रीमती जोहत्री यादव (70 वर्ष), श्रीमती राजकुमारी यादव (70 वर्ष) और श्रीमती सुशीला यादव (63 वर्ष) वर्षों से एक-दूसरे की सहेलियां हैं। जीवन की कठिनाइयों और बढ़ती उम्र की परेशानियों के बीच इन तीनों ने हमेशा एक-दूसरे का सहारा बनकर साथ निभाया है।

जब से उन्हें महतारी वंदन योजना के तहत हर महीने ₹ 1000 मिलने लगे हैं, तब से उनकी जिंदगी में एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण बदलाव आया है। तीनों सहेलियों ने तय किया कि वे इस पैसे को मिलकर अपनी दवाइयों, जांच और दैनिक जीवन की जरूरी चीजों पर खर्च करेंगी। अब हर महीने मिलने वाली राशि से वे अपनी सेहत का ध्यान रखने के लिए जरूरी दवाइयां खरीद रही हैं और इलाज करवा रही हैं।

इन तीनों की दोस्ती भी अपने आप में मिसाल है। जब भी किसी को डॉक्टर के पास जाना होता है, बाकी दो सहेलियां साथ चलती हैं। कभी दवाइयों के लिए, तो कभी छोटे-मोटे घरेलू खर्च के लिए वे आपस में मिलकर फैसला करती हैं। उनका कहना है कि इस योजना ने न सिर्फ आर्थिक सहारा दिया है, बल्कि उन्हें यह भरोसा भी दिलाया है कि सरकार बुजुर्ग महिलाओं की चिंता कर रही है।

श्रीमती सुशीला यादव की कहानी सबसे ज्यादा भावुक कर देने वाली है। उनके पति का कई वर्ष पहले निधन हो चुका है और उनके कोई बच्चे भी नहीं हैं। अकेलेपन के बीच जीवन बिताते हुए उन्हें अक्सर अपने भविष्य की चिंता रहती थी। सुशीला यादव कहती हैं कि जब से उन्हें महतारी वंदन योजना का लाभ मिलना शुरू हुआ है, तब से उन्हें लगता है कि कोई उनका भी ख्याल रखने वाला है।

भावुक होकर वे कहती हैं, “मेरे पति नहीं रहे और मेरे कोई बच्चे भी नहीं हैं। लेकिन मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने जिस तरह से इस योजना के जरिए हमारी सेहत और जरूरतों का ख्याल रखा है, मुझे लगता है जैसे उन्होंने बेटे की तरह हमारी जिम्मेदारी निभाई है।”

पेंशनवाड़ा की इन तीन सहेलियों के लिए महतारी वंदन योजना केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि सम्मान और आत्मविश्वास का भी आधार बन गई है। बढ़ती उम्र के इस दौर में अब उन्हें यह भरोसा है कि वे अपनी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए किसी पर बोझ नहीं बनेंगी और अपने जीवन को सम्मान के साथ जी सकेंगी।

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