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आज की संगोष्ठी गीग मजदूरों के पुर्नउत्थान का शंखनादः शोभा सिंहदेव

*महाराष्ट्र मंडल में हुई गीग मजदूरों की सामाजिक सुरक्षा और उत्थान पर संगोष्ठी*

– *देश में 80 लाख से अधिक और छत्तीसगढ़ में दो लाख गीग वर्कर*

– *ई-श्रम पोर्टल में अब होने लगा गीग मजदूरों का भी पंजीयन*

रायपुर12 अप्रैल 2026 (IMNB NEWS AGENCY) गीग मजदूर यानी ओला, उबर, जोमेटो, रैपिडो, स्विगी, अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसे संस्थानों में कार्य करने वाले मजदूरों के जिन्हें कंपनियां अपना पार्टनर कहती है, लेकिन उनकी सुरक्षा औऱ सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति उदासीन रहती है। गीग मजदूरों के लिए आयोजित आज की यह संगोष्ठी उनके पुर्नउत्थान का शंखनाद है। गीग मजदूरों को आज यूनियन की जरूरत हैं, क्योंकि एकता ही शक्ति है। उक्ताशय के विचार रविवार को महाराष्ट्र मंडल में आयोजित संगोष्ठी में भारतीय मजदूर संघ की अध्यक्ष शोभा सिंहदेव ने कहीं।
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए शोभा सिंहदेव ने कहा कि आनलाइन सेवाएं देने वाली कंपनियां आपको पार्टनर तो कहती है, लेकिन इस शब्द की आड में आपको बुनियादी सुविधाओं से दूर रखती है। इन्हीं सुविधाओं को उनसे लेने के लिए हमें संगठित रहना जरूरी है।
छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल के अध्यक्ष योगेश दत्त मिश्रा ने कहा कि संगठन की शक्ति है। उसी संगठन का परिणाम है कि आज केंद्र में मोदी की सरकार बैठी है। गीग वर्करों का एक बड़ा तंत्र देश में कार्य कर रहा है। वह हर व्यक्ति को आपको घर पहुंच सेवा देता है गीग वर्कर की श्रेणी में आता है, फिर यह जरूरी नहीं कि वह किसी बड़ी कंपनी से जुड़ा हो। चार नये श्रम कानून मजदूरों के हित में है।
कर्मकार मंडल के पूर्व अध्यक्ष मोहन एंटी ने कहा कि गीग वर्करों को अपने अधिकारों को जानना जरूरी है। आपको अब ई-श्रम में पंजीयन का अधिकार है। पहले यह अधिकार नहीं था। श्रमिक पंजीयन के तहत दो लाख रुपये का बीमा भी आपका अधिकार है। वहीं किसी कंपनी द्वारा आईडी ब्लाक कर देने पर कंपनी के विरुद्ध सुनवाई का भी आपको अधिकार है। अधिकार जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी आपके कर्तव्य भी है। और आपका कर्तव्य है कि आप कंपनी को अपनी सही जानकारी दें। कंपनी के साथ होने वाले अनुबंध को अच्छे से पढ़े और समझे।
इससे पूर्व स्वतंत्र श्रमिक शोधार्थी सुश्री शुभांगी शुक्ला ने कहा कि गीग की सेवा देश की अर्थ व्यवस्था के लिए जरूरी है। बड़ी कंपनी सरकार तक अपनी बात आसानी से पहुंचा देती है, लेकिन गीग मजदूरों को अपनी बात सरकार तक पहुंचाने के लिए एक उचित माध्यम चाहिए और वह माध्यम हमारा संगठन हैं। देश की जीडीपी में गीग मजदूरों का लगभग 2 फीसद योगदान है। इनकी परेशानियों को सरकार तक पहुंचाने का काम संगठन कर रहा है। राजस्थान, कर्नाटक, तेलंगाना जैसे राज्यों में गीग मजदूरों के लिए कानून बन चुके है। छत्तीसगढ़ में भी इसकी तैयारी कर चल रही है।
छत्तीसगढ़ शासन की मोर संगवारी प्रोजेक्टर के परियोजना प्रबंधक और महाराष्ट्र मंडल के परितोष डोनगांवकर ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी गीग श्रमिकों को बताया कि अब बे शासन की ई-श्रम पोर्टल पर अपना पंजीयन करा सकते है। अब पोर्टल में इसके लिए अलग से विकल्प दिया गया है। इसमें आपको अपनी कंपनी का नाम दर्ज करना होगा। इसके तहत आपको दो लाख का बीमा लाभ भी मिलता है।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष और समाजसेवी अजय मधुकर काले ने कहा कि भारतीय मजदूर संघ की शुरूआत भी कुछ इसी तरह कुछ लोगों के साथ हुई थी। आज वह देश की बड़ी संघ के रुप में मजदूरों के हित के लिए कार्य कर रही है। आज की यह संगोष्ठी गीग मजदूरों की सफलता की पहली सीढ़ी है। संगठन की शक्ति ही सफलता दिलाएगी। इस दौरान छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल द्वारा 20 गीग मजदूरों को साइकिल खरीदने के लिए 3697 रुपये का चेक प्रदान किया गया।

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