
Baba Baidyanath Temple: श्रावण मास में द्वादश ज्योतिर्लिंगों में शामिल बाबा वैद्यनाथ की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है. झारखंड की सांस्कृतिक राजधानी देवघर स्थित श्री वैद्यनाथ धाम में हर वर्ष लाखों श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं. धार्मिक मान्यता है कि सुल्तानगंज से उत्तरवाहिनी गंगा का जल लेकर पदयात्रा करते हुए देवघर में जलार्पण की परंपरा रामायण काल से चली आ रही है, जिसकी शुरुआत स्वयं भगवान श्रीराम ने की थी. यही वजह है कि श्रावणी मेला देश के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में गिना जाता है.
महाराष्ट्र और तेलंगाना में भी है वैद्यनाथ का विशेष स्थान
शिव पुराण में वर्णित “परल्या वैद्यनाथं च” श्लोक के आधार पर कई विद्वान तेलंगाना के हैदराबाद के निकट स्थित परली को वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग मानते हैं. वहीं महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले के परली में भी श्री वैद्यनाथ का प्रसिद्ध मंदिर है. इतिहास के अनुसार इन दोनों मंदिरों का जीर्णोद्धार मालवा की प्रसिद्ध शासिका महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने कराया था.
बिहार, काशी और उज्जैन में भी मिलते हैं बाबा वैद्यनाथ
बिहार के कैमूर जिले के रामगढ़ में प्रतिहार वंश द्वारा स्थापित प्राचीन वैद्यनाथ मंदिर स्थित है. गया के विष्णुपद मंदिर के निकट ‘वैद्यनाथ बैटका’ नाम से प्रसिद्ध शिव मंदिर भी श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है. वहीं उज्जैन के 84 प्रमुख शिवलिंगों में श्री वैद्यनाथ का विशेष स्थान है. काशी में कामाख्या कुंड के पास अंतर्वेदी परिक्रमा मार्ग पर स्थित वैद्यनाथ मंदिर भी धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है.
हिमालय से दक्षिण भारत तक फैली है बाबा वैद्यनाथ की महिमा
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा, उत्तराखंड के अल्मोड़ा और हरिद्वार, असम के कामाख्या क्षेत्र, ओडिशा के भुवनेश्वर, मध्य प्रदेश के छतरपुर, तमिलनाडु के रामेश्वरम तथा पश्चिम बंगाल के कोलकाता में भी बाबा वैद्यनाथ के प्रसिद्ध मंदिर स्थापित हैं. ये सभी मंदिर अलग-अलग ऐतिहासिक और धार्मिक मान्यताओं से जुड़े हैं तथा वर्षभर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बने रहते हैं.
Baba Baidyanath Temple: श्रावण मास में द्वादश ज्योतिर्लिंगों में शामिल बाबा वैद्यनाथ की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है. झारखंड की सांस्कृतिक राजधानी देवघर स्थित श्री वैद्यनाथ धाम में हर वर्ष लाखों श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं. धार्मिक मान्यता है कि सुल्तानगंज से उत्तरवाहिनी गंगा का जल लेकर पदयात्रा करते हुए देवघर में जलार्पण की परंपरा रामायण काल से चली आ रही है, जिसकी शुरुआत स्वयं भगवान श्रीराम ने की थी. यही वजह है कि श्रावणी मेला देश के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में गिना जाता है.
महाराष्ट्र और तेलंगाना में भी है वैद्यनाथ का विशेष स्थान
शिव पुराण में वर्णित “परल्या वैद्यनाथं च” श्लोक के आधार पर कई विद्वान तेलंगाना के हैदराबाद के निकट स्थित परली को वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग मानते हैं. वहीं महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले के परली में भी श्री वैद्यनाथ का प्रसिद्ध मंदिर है. इतिहास के अनुसार इन दोनों मंदिरों का जीर्णोद्धार मालवा की प्रसिद्ध शासिका महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने कराया था.
बिहार, काशी और उज्जैन में भी मिलते हैं बाबा वैद्यनाथ
बिहार के कैमूर जिले के रामगढ़ में प्रतिहार वंश द्वारा स्थापित प्राचीन वैद्यनाथ मंदिर स्थित है. गया के विष्णुपद मंदिर के निकट ‘वैद्यनाथ बैटका’ नाम से प्रसिद्ध शिव मंदिर भी श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है. वहीं उज्जैन के 84 प्रमुख शिवलिंगों में श्री वैद्यनाथ का विशेष स्थान है. काशी में कामाख्या कुंड के पास अंतर्वेदी परिक्रमा मार्ग पर स्थित वैद्यनाथ मंदिर भी धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है.
हिमालय से दक्षिण भारत तक फैली है बाबा वैद्यनाथ की महिमा
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा, उत्तराखंड के अल्मोड़ा और हरिद्वार, असम के कामाख्या क्षेत्र, ओडिशा के भुवनेश्वर, मध्य प्रदेश के छतरपुर, तमिलनाडु के रामेश्वरम तथा पश्चिम बंगाल के कोलकाता में भी बाबा वैद्यनाथ के प्रसिद्ध मंदिर स्थापित हैं. ये सभी मंदिर अलग-अलग ऐतिहासिक और धार्मिक मान्यताओं से जुड़े हैं तथा वर्षभर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बने रहते हैं.







